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हे भगवान यह दिन दिखाने से पहले मुझे ही उठा लेता

Wed, 29 Sep 2021 10:06 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 29 Sep 2021 10:06 PM IST
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Lakhiram said, it would have been fine if God had lifted it before showing it.
होडल (रोशन लाल शर्मा)। ‘हे भगवान...अब मैं कैसे जी पाऊंगा। मुझे यह दिखाने से पहले ही उठा लेता तो ठीक था। यह कहते हुए नरेश के पिता लखीराम फूट-फूटकर रो पड़े। परिवार के शवों को देखकर उनकी टांगें लड़खड़ा गईं और वे जमीन पर गिर पड़े। वहां मौजूद लोगों ने उन्हें किसी तरह संभाला और कुर्सी पर बिठाया। कुर्सी से बार-बार उठकर लखीराम अंदर कमरे में जाते और बच्चों के एक साथ पड़े शवों को देखकर फिर फूट-फूटकर रोने लगते। लोग उसे पकड़कर बाहर लाते, लेकिन कुछ देर बाद ही वे फिर अपने परिवार के शव देखने पहुंच जाते। लखीराम रो-रोकर कह रहे थे कि फूलों की तरह खुशियों से भरा मेरा आंगन अब सूना हो गया है।
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गांव के बुजुर्गों के सामने उन्होंने कहा कि वे पहले ही गमों के दर्द को सीने में छिपाए बैठे थे। इस घटना के बाद तो उनका जीना बेहद मुश्किल हो जाएगा। लखीराम की हालत और घर के अंदर एक साथ पांच परिजनों के शव देखकर आसपास के अन्य लोगों की आंखों से भी आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
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लखीराम ने बताया कि वर्ष 2012 से ही उनके परिवार पर भगवान का कहर टूट रहा है। 2012 में बड़े बेटे तोताराम की गदपुरी के पास सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। 2018 में नरेश के साथ अपने गांव अटारी से आ रही उसकी मां माया की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। वर्ष 2019 में नरेश का भाई रणबीर भी उनका साथ छोड़ गया। अपने घर के तीन लोगों की मौत से वे उबरे भी नहीं थे कि अब पूरे परिवार एक साथ जाने से पूरी तरह टूट गए हैं।
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नरेश की दोनों बहनों का भी था बुरा हाल
नरेश की दो बहनों सुनीता और राजबाला का भी रो-रोकर बुरा हाल था। सुनीता रो-रोकर कह रही थीं कि नरेश से कुछ दिन पहले अपने बेटे के विवाह को लेकर भात की बात हुई थी, लेकिन अब तो भाई ही दुनिया से चला गया। लखीराम ने रोते हुए सवाल किया कि घर में दो बेटियों की जिम्मेदारी अब कौन संभालेगा। उन्होंने कहा कि एक बेटी तोताराम की बची है, जिसका दुनिया में कोई नहीं। दूसरी बेटी 8 वर्ष की नरेश की है, जो ननिहाल में मामा के यहां रह रही है। उसे तो इस बात की खबर भी नहीं कि उसके सिर से मां-बाप दोनों का साया उठ गया है। उसका दुश्मन पिता ही निकला, जो उसे अनाथ बनाकर चला गया। संवाद
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