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Palwal News: उपमंडल नागरिक अस्पताल में सुविधाओं का अभाव, आमजन को हो रही खासी परेशानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
होडल। सरकार व स्थानीय प्रशासन द्वारा भले ही आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत करने का दावा करते नहीं थक रहे हैं लेकिन स्थानीय उपमंडल नागरिक अस्पताल में सरकार के दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। चिकित्सकों व कर्मियों की कमी, उपकरणों की बदहाली व दवाओं का अभाव रहने से आम लोगों को चिकित्सकीय सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। आलम ये है चिकित्सकों के दो तीन पदों के अलावा सभी रिक्त पड़े हैं। इसके अलावा एक्स रे मशीन तो स्थानीय दानदाताओं ने दान में दे दी लेकिन रेडियोग्राफर की कमी मरीजों को खल रही है। ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए पलवल या फरीदाबाद की ओर रुख करना पड़ता है, या फिर महंगे निजी उपचार पर निर्भर रहना पड़ता है। वर्षों पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को तीन वर्ष पहले अपग्रेड कर उपमंडल नागरिक अस्पताल का दर्जा मिला था। जिससे आम लोगों में 50 बेड की क्षमता वाले इस उपमंडल नागरिक अस्पताल में एक्सरे, एम्बुलेंस, जनरेटर, डेंटिस्ट व अन्य चिकित्सा सुविधाओं की बहाली की उम्मीदें जाग उठी थी, लेकिन चिकित्सकों व संसाधनों के अभाव में ये आमजन की आशाओं पर वैसा खरा न उतर सका, जैसी उम्मीद जताई गई थी। नतीजन करोड़ों रुपये की लागत से बनी ये इमारत मरीजों को मुंह चिढ़ा रही है।
क्या कहते हैं आम लोग
रोहित जैन का कहना था कि मुख्यमंत्री जनसंवाद के दौरान उन्होंने यह मुद्दा मुख्यमंत्री के सामने रखा था। उन्होंने समस्या के समाधान का ठोस आश्वासन नहीं दिया। संजय मित्तल , जयदेव गर्ग एडवोकेट का कहना है कि यह यूपी सीमा पर सटा हुआ है। ऐसे में कस्बे व आसपास ग्रामीण क्षेत्र के अलावा निकटवर्ती यूपी के मरीज उपचार के लिए यहां पहुंचते हैं। अस्पताल की ओपीडी में रोज दो सौ से अधिक मरीजों की संख्या दर्ज हो रही है, ऐसे में मरीजों की संख्या अधिक बढ़ने से एवं चिकित्सक व कर्मियों के अभाव में मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पाता है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई पहल नहीं की जा रही है।
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महिला चिकित्सक की कमी
अस्पताल में महिला चिकित्सक की भी कमी है। इससे महिला मरीजों को सर्वाधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। महिला मरीजों के उपचार के नाम पर यहां एक महीने में तय दिन 9 तारीख को ही महिला चिकित्सक अस्पताल में मौजूद होती है। महिला चिकित्सक के अभाव में अन्य दिनों महिला उपचार व प्रसव का पूरा जिम्मा भी नर्स पर होता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्षभर में सैकड़ों प्रसव विभिन्न अस्पतालों में होते हैं, यदि कभी कोई दिक्कत आए तो इन्हें अन्य स्थानों पर रेफर कर दिया जाता है या फिर स्वयं की इच्छा व जिम्मेदारी पर उन्हें छोड़ दिया जाता है।
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सीटी स्कैन मशीन की नहीं सुविधा
शहर के अस्पताल में एमआरआई व सिटी स्कैन की सुविधा तो मिलनी दूर की बात है, अस्पताल में एक्सरे की सुविधा भी नहीं है, जबकि इसका फायदा उठा, निजी अस्पताल संचालक मरीजों से मनमाने दाम वसूलकर उनका आर्थिक शोषण कर रहे हैं। यहां चिकित्सकों द्वारा लिखे जाते टेस्ट कराने को मरीजों को मजबूरन बीस किमी दूर पलवल निजी स्कैनिग सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है।
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इस बारे में उपमंडल नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. चरण सौरोत का कहना है कि उन्होंने विभाग को स्टाफ की डिमांड भेजी है और कोरोना महामारी के दौरान कुछ डॉक्टरों की नियुक्ति हुई है परंतु विभाग की ओर से उपमंडल नागरिक अस्पताल के स्टाफ की मंजूरी नहीं मिल पाई है।
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होडल। सरकार व स्थानीय प्रशासन द्वारा भले ही आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत करने का दावा करते नहीं थक रहे हैं लेकिन स्थानीय उपमंडल नागरिक अस्पताल में सरकार के दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। चिकित्सकों व कर्मियों की कमी, उपकरणों की बदहाली व दवाओं का अभाव रहने से आम लोगों को चिकित्सकीय सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। आलम ये है चिकित्सकों के दो तीन पदों के अलावा सभी रिक्त पड़े हैं। इसके अलावा एक्स रे मशीन तो स्थानीय दानदाताओं ने दान में दे दी लेकिन रेडियोग्राफर की कमी मरीजों को खल रही है। ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए पलवल या फरीदाबाद की ओर रुख करना पड़ता है, या फिर महंगे निजी उपचार पर निर्भर रहना पड़ता है। वर्षों पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को तीन वर्ष पहले अपग्रेड कर उपमंडल नागरिक अस्पताल का दर्जा मिला था। जिससे आम लोगों में 50 बेड की क्षमता वाले इस उपमंडल नागरिक अस्पताल में एक्सरे, एम्बुलेंस, जनरेटर, डेंटिस्ट व अन्य चिकित्सा सुविधाओं की बहाली की उम्मीदें जाग उठी थी, लेकिन चिकित्सकों व संसाधनों के अभाव में ये आमजन की आशाओं पर वैसा खरा न उतर सका, जैसी उम्मीद जताई गई थी। नतीजन करोड़ों रुपये की लागत से बनी ये इमारत मरीजों को मुंह चिढ़ा रही है।
क्या कहते हैं आम लोग
रोहित जैन का कहना था कि मुख्यमंत्री जनसंवाद के दौरान उन्होंने यह मुद्दा मुख्यमंत्री के सामने रखा था। उन्होंने समस्या के समाधान का ठोस आश्वासन नहीं दिया। संजय मित्तल , जयदेव गर्ग एडवोकेट का कहना है कि यह यूपी सीमा पर सटा हुआ है। ऐसे में कस्बे व आसपास ग्रामीण क्षेत्र के अलावा निकटवर्ती यूपी के मरीज उपचार के लिए यहां पहुंचते हैं। अस्पताल की ओपीडी में रोज दो सौ से अधिक मरीजों की संख्या दर्ज हो रही है, ऐसे में मरीजों की संख्या अधिक बढ़ने से एवं चिकित्सक व कर्मियों के अभाव में मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पाता है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई पहल नहीं की जा रही है।
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महिला चिकित्सक की कमी
अस्पताल में महिला चिकित्सक की भी कमी है। इससे महिला मरीजों को सर्वाधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। महिला मरीजों के उपचार के नाम पर यहां एक महीने में तय दिन 9 तारीख को ही महिला चिकित्सक अस्पताल में मौजूद होती है। महिला चिकित्सक के अभाव में अन्य दिनों महिला उपचार व प्रसव का पूरा जिम्मा भी नर्स पर होता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्षभर में सैकड़ों प्रसव विभिन्न अस्पतालों में होते हैं, यदि कभी कोई दिक्कत आए तो इन्हें अन्य स्थानों पर रेफर कर दिया जाता है या फिर स्वयं की इच्छा व जिम्मेदारी पर उन्हें छोड़ दिया जाता है।
सीटी स्कैन मशीन की नहीं सुविधा
शहर के अस्पताल में एमआरआई व सिटी स्कैन की सुविधा तो मिलनी दूर की बात है, अस्पताल में एक्सरे की सुविधा भी नहीं है, जबकि इसका फायदा उठा, निजी अस्पताल संचालक मरीजों से मनमाने दाम वसूलकर उनका आर्थिक शोषण कर रहे हैं। यहां चिकित्सकों द्वारा लिखे जाते टेस्ट कराने को मरीजों को मजबूरन बीस किमी दूर पलवल निजी स्कैनिग सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है।
इस बारे में उपमंडल नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. चरण सौरोत का कहना है कि उन्होंने विभाग को स्टाफ की डिमांड भेजी है और कोरोना महामारी के दौरान कुछ डॉक्टरों की नियुक्ति हुई है परंतु विभाग की ओर से उपमंडल नागरिक अस्पताल के स्टाफ की मंजूरी नहीं मिल पाई है।