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किसान संघर्ष समिति पलवल को किया सम्मानित
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पलवल। किसान आंदोलन के दौरान अगुवाई करने वाले किसान संघर्ष समिति पलवल के सदस्यों का जगह-जगह स्वागत किया जा रहा है। सोमवार को मथुरा जिला के छाता कस्बा में समिति के पदाधिकारियों को भव्य स्वागत किया गया। पलवल के किसान छाता में किसान विजय यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। किसानों ने छाता में चौधरी छोटूराम की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर नमन किया।
पलवल से सम्मानित हुए किसानों में मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, रतन सिंह सौरोत, तारा चंद प्रधान, धर्मचंद प्रधान, बीधू सिंह, नरेंद्र सहरावत, बीर सिंह, वीरेंद्र रावत, दादा मट्ठर, रूपचंद दलाल, महेंद्र पहलवान, किशन चंद शर्मा, सतीश भुर्जा, धनीराम शामिल थे। शिव सिंह छाता की तरफ से किसानों का फूलमालाओं व पगड़ी बांधकर स्वागत किया गया। शिव सिंह ने कहा कि उनका क्षेत्र भी पलवल के 52 पाल में आता है। उनके यहां भी किसान संघर्ष समिति पलवल की अगुवाई में किसान आंदोलन किया गया। समिति के सदस्यों के कुशल नेतृत्व से ही धरना एक वर्ष तक पूरी तरह से सफल रहा।
धरना स्थल को खाली करने का सिलसिला जारी
केएमपी-केजीपी इंटरचेंज स्थित किसान धरना स्थल को खाली करने का सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा। सोमवार को धरना स्थल पर बनी झोपड़ियों को हटाने का शुरू किया गया। कई झोपड़ियों को हटा दिया गया, बाकियों को हटाने का काम जारी है। पालों के हिसाब से बनी झोपड़ियों में अब भी एक दो किसान नियमित रह रहे हैं। किसानों का कहना है कि दो-तीन दिन में पूरे धरना स्थल को खाली कर दिया जाएगा।
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पलवल से सम्मानित हुए किसानों में मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, रतन सिंह सौरोत, तारा चंद प्रधान, धर्मचंद प्रधान, बीधू सिंह, नरेंद्र सहरावत, बीर सिंह, वीरेंद्र रावत, दादा मट्ठर, रूपचंद दलाल, महेंद्र पहलवान, किशन चंद शर्मा, सतीश भुर्जा, धनीराम शामिल थे। शिव सिंह छाता की तरफ से किसानों का फूलमालाओं व पगड़ी बांधकर स्वागत किया गया। शिव सिंह ने कहा कि उनका क्षेत्र भी पलवल के 52 पाल में आता है। उनके यहां भी किसान संघर्ष समिति पलवल की अगुवाई में किसान आंदोलन किया गया। समिति के सदस्यों के कुशल नेतृत्व से ही धरना एक वर्ष तक पूरी तरह से सफल रहा।
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धरना स्थल को खाली करने का सिलसिला जारी
केएमपी-केजीपी इंटरचेंज स्थित किसान धरना स्थल को खाली करने का सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा। सोमवार को धरना स्थल पर बनी झोपड़ियों को हटाने का शुरू किया गया। कई झोपड़ियों को हटा दिया गया, बाकियों को हटाने का काम जारी है। पालों के हिसाब से बनी झोपड़ियों में अब भी एक दो किसान नियमित रह रहे हैं। किसानों का कहना है कि दो-तीन दिन में पूरे धरना स्थल को खाली कर दिया जाएगा।
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