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कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर मनाई काली होली

Sun, 28 Mar 2021 11:07 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 28 Mar 2021 11:07 PM IST
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Kali Holi celebrated by burning copies of agricultural laws
पलवल। कृषि कानूनों के विरोध में केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर चल रहे धरने में रविवार को किसानों ने काली होली मनाई। इस दौरान होलिका में कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर विरोध जताया गया। किसान नेताओं ने कहा कि फसल कटाई के तुरंत बाद आंदोलन को आर-पार की नीति के तहत चलाया जाएगा। आंदोलन में बुजुर्गों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में शामिल होने की अपील की गई। वहीं भारत बंद के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने को लेकर पुलिस द्वारा किसानों पर दर्ज मुकदमों को तुरंत रद्द करने की भी मांग की गई। इस दौरान बढ़राम से आई महाशय बिजेंद्र की पार्टी ने चौपाई कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इस दौरान देशभक्ति रागनियों व किसान आंदोलन की चौपाई के जरिये किसानों में जोश भरने का काम किया गया।
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किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि किसान आंदोलन को चार माह हो गए। आंदोलन अब कृषि कानूनों के साथ ही समाप्त होगा। किसान आर-पार की लड़ाई लडे़ंगे और तीनों कृषि कानूनों को खत्म करवाकर की हटेंगे। एक अप्रैल से गेहूं की खरीद यदि एमएसपी से कम रेट पर हुई तो मंडियों में प्रदर्शन किए जाएंगे। किसान किसी भी कीमत पर एमएसपी से कम दामों पर फसल नहीं बेचेगा। सरकार ने यूपी या राजस्थान के किसानों को हरियाणा में फसल लाने से रोका तो इसका विरोध किया जाएगा। कोई भी किसान एमएसपी से कम रेट पर अपनी फसल नहीं बेचेगा। धरने की अध्यक्षता चौधरी रूपचंद दलाल ने किया। इस मौके पर अच्छेलाल जोधपुुर, सोहनलाल प्रधान, राजेश रावत, रूपराम तेवतिया, धर्मचंद घुघेरा, होशियार सरपंच, मानसिंह डागर, धनीराम थानेदार, भागीरथ बेनीवाल आदि मौजूद रहे।
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किसानों पर दर्ज मुकदमों को रद्द करे प्रशासन
स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती ने कहा है कि भारत बंद के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग को शांतिपूर्ण ढंग से जाम करने को लेकर किसानों पर गलत तरीके से मुकदमे दर्ज कर दिए गए हैं, जिन्हें तुरंत प्रभाव से प्रशासन रद करे। सरकार चाह कर भी किसानों की आवाज नहीं दबा सकती है। रास्ता रोकना, प्रदर्शन करना, धरना देना लोगों का संवैधानिक अधिकार है। सरकार जितनी ज्यादा ज्यादती करेगी उतना ही आंदोलन मजबूत होगा। सरकार के तीनों कृषि कानून जन विरोधी हैं। किसान सत्ता के दलाल जन प्रतिनिधियों को गांवों में प्रवेश नहीं करने देंगे। किसान आंदोलन आर्थिक आजादी की लड़ाई है, ये आंदोलन पूरी तरह से गैर राजनीतिक है। सरकार यदि किसानों को आत्मनिर्भर बनाना चाहती है तो न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी दे और कानूनों को रद करे।
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