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रजवाहे के सफाई घोटाले में सिंचाई विभाग भी सवालों के घेरे में
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पलवल। हसनपुर रजवाहे की सफाई के नाम पर हुए 9.45 लाख रुपये घोटाले में सिंचाई विभाग भी सवालों के घेरे में आ गया है। इससे पहले घोटाले में पंचायत विभाग व नरेगा के अधिकारियों की संलिप्तता ही बताई जा रही थी। मामले में रविवार को जिला विजिलेंस कमेटी के अध्यक्ष व एडीसी उत्तम सिंह ने चांदहट थाना में मुकदमा दर्ज कराई। इसके बाद सिंचाई विभाग में भी खलबली का माहौल है। पुलिस ने जुलाई 2021 में कार्यरत अधिकारियों के ब्योरा भी सिंचाई विभाग से मांगा है। मामले में फर्जी एमबी भर राशि निकाली गई थी, जबकि मौके पर एक रुपया का भी काम नहीं किया गया।
दरअसल, नरेगा योजना के तहत गरीब लोगों को काम देकर काम कराए जाते हैं। साल 2021 में हसनपुर रजवाहे की सफाई की जानी थी। रजवाहे से जाला व जलकुंबी झाड़ियों की सफाई की जानी थी। इस सफाई कार्य का नेतृत्व सिंचाई के अधिकारियों द्वारा किया जाना था। मेजरमेंट बुक भी विभाग के अधिकारियों द्वारा ही भरी जानी थी। रजवाहे में आठ जुलाई से 21 जुलाई तक सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने एमबी में काम होना दर्शाया, जबकि मौके पर कोई काम नहीं हुआ। जोला व जलकुंबी झाड़ियों की सफाई के नाम पर 9,44,983 रुपये निकाल लिए गए। एमबी के अनुसार 15 जुलाई 2021 को सफाई होना दर्ज किया गया।
स्टेट विजिलेंस टीम के एसई ईश्वर सिंह ने द्वारा की गई जांच रिपोर्ट में कहा है कि हसनपुर रजवाहे में सफाई के नाम पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया गया है। सिंचाई विभाग के जेई और एसडीओ भी इस मामले में जिम्मेवारी से पीछे नहीं हट सकते। पंचायत व सिंचाई विभाग तथा मनरेगा के अधिकारियों ने बिना काम कराए ही घोटाले को अंजाम दे दिया।
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सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता एसपी गर्ग का कहना है कि घोटाले में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी से लेकर ग्राम सचिव व नरेगा के अधिकारी इसके लिए जिम्मेवार हैं। साल 2021 में तैनात जेई व एसडीओ के बारे में जानकारी के लिए पत्राचार किया जा रहा है।
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दरअसल, नरेगा योजना के तहत गरीब लोगों को काम देकर काम कराए जाते हैं। साल 2021 में हसनपुर रजवाहे की सफाई की जानी थी। रजवाहे से जाला व जलकुंबी झाड़ियों की सफाई की जानी थी। इस सफाई कार्य का नेतृत्व सिंचाई के अधिकारियों द्वारा किया जाना था। मेजरमेंट बुक भी विभाग के अधिकारियों द्वारा ही भरी जानी थी। रजवाहे में आठ जुलाई से 21 जुलाई तक सिंचाई विभाग के कर्मचारियों ने एमबी में काम होना दर्शाया, जबकि मौके पर कोई काम नहीं हुआ। जोला व जलकुंबी झाड़ियों की सफाई के नाम पर 9,44,983 रुपये निकाल लिए गए। एमबी के अनुसार 15 जुलाई 2021 को सफाई होना दर्ज किया गया।
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स्टेट विजिलेंस टीम के एसई ईश्वर सिंह ने द्वारा की गई जांच रिपोर्ट में कहा है कि हसनपुर रजवाहे में सफाई के नाम पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया गया है। सिंचाई विभाग के जेई और एसडीओ भी इस मामले में जिम्मेवारी से पीछे नहीं हट सकते। पंचायत व सिंचाई विभाग तथा मनरेगा के अधिकारियों ने बिना काम कराए ही घोटाले को अंजाम दे दिया।
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सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता एसपी गर्ग का कहना है कि घोटाले में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी से लेकर ग्राम सचिव व नरेगा के अधिकारी इसके लिए जिम्मेवार हैं। साल 2021 में तैनात जेई व एसडीओ के बारे में जानकारी के लिए पत्राचार किया जा रहा है।