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एसकेएम की पांच सदस्यीय कमेटी से बात कर समाधान निकाले सरकार
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पलवल। कृषि क्षेत्र से जुड़ी मांगों व समस्याओं को लेकर केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर चल रहा किसान आंदोलन जारी रहा। बुधवार को धरने में सहरावत के गांव गहलब, कलसाड़ा, भंगूरी, भमरौला, पहरा सहित अन्य गांवों के किसानों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया। नरेंद्र सहरावत द्वारा संचालित धरने की अध्यक्षता अतर सिंह मैंबर गहलब ने की। धरने में शामिल किसानों ने सरकार द्वारा बैंकों के निजीकरण करने के बिल को संसद में रखने की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उसे वापस लेने की मांग की।
धरने में किसान नेता भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत व मास्टर महेंद्र चौहान ने कहा कि सरकार ने कृषि कानून को रद्द कर दिए, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने को अब भी तैयार नहीं है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले। सरकार एक साथ सभी मांगों को मानने की वजह धरने को खत्म कराने के लिए नई-नई युक्ति बना रही है। अखिल भारतीय किसान सभा के नेता धर्मचंद घुघेरा ने कहा ने कहा कि कृषि कानूनों का वापस होना ही किसानों की आय दोगुनी नहीं करेगा। यह तो एमएसपी की कानूनी गारंटी के साथ ही संभव हो सकेगा। यह ध्यान रखना चाहिए कि किसानों का यह विरोध केवल अपने लिए नहीं बल्कि इस देश की जनता को बचाने के लिए है। ऐसा ही एक विरोध शहीद-ए-आजम भगत सिंह जी के चाचा सरदार अजीत सिंह ने अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों का विरोध वर्ष 1907 में किया था, जो आंदोलन नौ महीने तक चला था। करीब सवा सौ साल बाद हालात उसी मुकाम पर आकर खड़े हो गए हैं। आज भी किसानों के हौसले कम नहीं हुए हैं। सरकार को अतिशीघ्र संयुक्त किसान मोर्चा की पांच सदस्य कमेटी से बात करके समस्या का समाधान करना चाहिए। धरने में किसान नेता रूपराम तेवतिया, राजकुमार ओलिहान, शिव सिंह थानेदार, अच्छेलाल, गोपी हवालदार, समय सिंह, रोशन लाल, धन्नी, बीर सिंह चौहान, पोहप सिंह, बुद्धि ने भी विचार व्यक्त किए।
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धरने में किसान नेता भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरोत व मास्टर महेंद्र चौहान ने कहा कि सरकार ने कृषि कानून को रद्द कर दिए, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने को अब भी तैयार नहीं है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले। सरकार एक साथ सभी मांगों को मानने की वजह धरने को खत्म कराने के लिए नई-नई युक्ति बना रही है। अखिल भारतीय किसान सभा के नेता धर्मचंद घुघेरा ने कहा ने कहा कि कृषि कानूनों का वापस होना ही किसानों की आय दोगुनी नहीं करेगा। यह तो एमएसपी की कानूनी गारंटी के साथ ही संभव हो सकेगा। यह ध्यान रखना चाहिए कि किसानों का यह विरोध केवल अपने लिए नहीं बल्कि इस देश की जनता को बचाने के लिए है। ऐसा ही एक विरोध शहीद-ए-आजम भगत सिंह जी के चाचा सरदार अजीत सिंह ने अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों का विरोध वर्ष 1907 में किया था, जो आंदोलन नौ महीने तक चला था। करीब सवा सौ साल बाद हालात उसी मुकाम पर आकर खड़े हो गए हैं। आज भी किसानों के हौसले कम नहीं हुए हैं। सरकार को अतिशीघ्र संयुक्त किसान मोर्चा की पांच सदस्य कमेटी से बात करके समस्या का समाधान करना चाहिए। धरने में किसान नेता रूपराम तेवतिया, राजकुमार ओलिहान, शिव सिंह थानेदार, अच्छेलाल, गोपी हवालदार, समय सिंह, रोशन लाल, धन्नी, बीर सिंह चौहान, पोहप सिंह, बुद्धि ने भी विचार व्यक्त किए।
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