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Palwal News: हर्षोल्लास से जिले में हुई गोवर्धन पूजा, घर-घर गूंजा श्रीकृष्ण नाम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Oct 2025 06:30 PM IST
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Govardhan Puja was celebrated with great enthusiasm in the district, the name of Shri Krishna echoed in every house.
अन्नकूट, भंडारों और लोकगीतों से महका जिला
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संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल/होडल। जिले में बुधवार को भक्ति और उल्लास के साथ गोवर्धन पूजा की गई। शहरों से लेकर गांवों तक सुबह से ही धार्मिक माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार आंगनों में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाई और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना की। घरों और मंदिरों में अन्नकूट का भोग लगाया गया और प्रसाद के रूप में कढ़ी-बाजरा, खिचड़ी व मिठाइयां वितरित की गईं। मंदिरों में भंडारे भी आयोजित हुए जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

श्रद्धालुओं ने मंगलवार को शहर के अनेक इलाकों में साफ-सफाई और सजावट का कार्य किया। इसके बाद बुधवार सुबह श्रद्धालुओं ने हल्दी, आटा, कपास और रुई का प्रयोग कर गोवर्धन पर्वत की प्रतीकात्मक आकृति तैयार की। पूजा के दौरान महिलाएं और युवतियां पारंपरिक लोकगीत गाकर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का स्मरण करती रहीं। घरों के मुख्य द्वारों पर सेलखड़ी से देवी-देवताओं के प्रतीक चिन्ह बनाए गए। शाम को पूजा-अर्चना के बाद घरों और मंदिरों में दीप प्रज्वलित किए गए जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंग गया।
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ब्रज क्षेत्र, विशेषकर होडल और उसके आसपास के गांवों में पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान गोवर्धन महाराज और श्रीकृष्ण से अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई सामाजिक संस्थाओं और समितियों ने भंडारे लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। पंडित कन्हैया लाल शर्मा ने बताया कि कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर मनाया जाने वाला यह पर्व इस बार बुधवार को पड़ा, क्योंकि प्रतिपदा तिथि का आरंभ 21 अक्तूबर की शाम से और समापन 22 अक्तूबर की रात हुआ। इसलिए उदय तिथि के अनुसार बुधवार को पूजा की गई।
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धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्रदेव के अहंकार को शांत करने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए गोवर्धन पर्वत की पूजा प्रारंभ की थी। उन्होंने इंद्र द्वारा कराई गई वर्षा से ब्रजवासियों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाया था तभी से यह पर्व प्रकृति और आस्था के संतुलन का प्रतीक माना जाता है। पूरे जिले में इस अवसर पर भक्ति, सजावट और सादगी का अद्भुत संगम देखने को मिला। जगह-जगह अन्नकूट का प्रसाद बांटा गया और भक्तों ने भगवान गोवर्धन की परिक्रमा कर अपने जीवन में सुख-शांति की कामना की।
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