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बरिश की चेतावनी से किसान चिंतित
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पलवल। मौसम विभाग की तीन व चार फरवरी को संभावित बारिश की चेतावनी के बाद किसान बेहद चिंतित हैं। पहले ही जनवरी महीने में कई बार हुई जरूरत से ज्यादा वर्षा से फसलें अभी संभल भी नहीं पाई हैं, कई क्षेत्रों में फसलों पर वर्षा का प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ रहा है। यदि अब फिर से बारिश हुई तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।
कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर सिंह मलिक ने बताया कि इस समय रबी की मुख्य फसल गेहूं फुटाव व कहीं-कहीं बालियां निकलने की अवस्था में खड़ी हुई है। सरसों में फूल व फलियां बन चुकी हैं। पिछले माह कई बार हुई वर्षा से तथा लगातार कोहरा व बादल छाए रहने से गेहूं, जौ में फुटाव कम तथा पीलापन दिखाई देने लगा है। सरसों व गन्ना फसल में भी गिरने से नुकसान हुआ है। आलू, सिंगरी व धनिया, मेथी में छिपा कीट के साथ-साथ झुलसा रोग भी लगने लगा है। डॉ. मलिक ने कहा कि इस समय सभी फसलों व सब्जियों को साफ व धूप वाले मौसम की आवश्यकता होती है परंतु लगातार कई दिनों तक धूप न निकलने तथा कुछ क्षेत्रों में पानी खड़ा रहने से सभी फसलें प्रभावित होने लगी है। पौधों की भोजन बनाने की प्रक्रिया बाधित होने लगी है। आगामी दिनों में वर्षा की संभावना को देखते हुए किसान फसलों में छिड़काव व सिंचाई रोक ले। फसलों में पानी की निकासी का समुचित प्रबंध करें। पछेती गेहूं फसल में कुछ जगह पत्तियां जिंक की कमी से पीली व चॉकलेटी हो गई है। वहां पर किसान संभावित वर्षा के दिनों के बाद मौसम साफ होने पर एक किलो जिंक सल्फेट 21 प्रतिशत व 5 किलो यूरिया 200 लीटर पानी में प्रति एकड़ छिड़काव करें। मटर, टमाटर, मसूर आदि फसल में पानी न रहने दें। बसंत कालीन गन्ना व भिंडी तथा बेल वाली कद्दू जाति की सब्जियों की बिजाई की तैयारी के लिए खेत में गोबर की गली सड़ी खाद डाल दे। गेहूं, जौ में पीला रतुआ रोग की पहचान करके उसका उपचार करें।
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कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर सिंह मलिक ने बताया कि इस समय रबी की मुख्य फसल गेहूं फुटाव व कहीं-कहीं बालियां निकलने की अवस्था में खड़ी हुई है। सरसों में फूल व फलियां बन चुकी हैं। पिछले माह कई बार हुई वर्षा से तथा लगातार कोहरा व बादल छाए रहने से गेहूं, जौ में फुटाव कम तथा पीलापन दिखाई देने लगा है। सरसों व गन्ना फसल में भी गिरने से नुकसान हुआ है। आलू, सिंगरी व धनिया, मेथी में छिपा कीट के साथ-साथ झुलसा रोग भी लगने लगा है। डॉ. मलिक ने कहा कि इस समय सभी फसलों व सब्जियों को साफ व धूप वाले मौसम की आवश्यकता होती है परंतु लगातार कई दिनों तक धूप न निकलने तथा कुछ क्षेत्रों में पानी खड़ा रहने से सभी फसलें प्रभावित होने लगी है। पौधों की भोजन बनाने की प्रक्रिया बाधित होने लगी है। आगामी दिनों में वर्षा की संभावना को देखते हुए किसान फसलों में छिड़काव व सिंचाई रोक ले। फसलों में पानी की निकासी का समुचित प्रबंध करें। पछेती गेहूं फसल में कुछ जगह पत्तियां जिंक की कमी से पीली व चॉकलेटी हो गई है। वहां पर किसान संभावित वर्षा के दिनों के बाद मौसम साफ होने पर एक किलो जिंक सल्फेट 21 प्रतिशत व 5 किलो यूरिया 200 लीटर पानी में प्रति एकड़ छिड़काव करें। मटर, टमाटर, मसूर आदि फसल में पानी न रहने दें। बसंत कालीन गन्ना व भिंडी तथा बेल वाली कद्दू जाति की सब्जियों की बिजाई की तैयारी के लिए खेत में गोबर की गली सड़ी खाद डाल दे। गेहूं, जौ में पीला रतुआ रोग की पहचान करके उसका उपचार करें।
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