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एमएसपी पर गारंटी कानून बनाने के सहना पड़ेगा किसानों का विरोध
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पलवल। तीनों कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद एमएसपी पर गारंटी कानून सहित अन्य मांगों को लेकर केएमपी-केजीपी इंटरचेंज पर किसानों का शनिवार को धरना जारी रहा। धरने में भूडेर पाल के गांव धतीर, घुघेरा, किशोरपुर, अल्लीका सहित अन्य गांवों के किसानों ने हिस्सा लिया। धरने में किसानों ने निर्णय लिया कि एमएसपी पर गारंटी कानून बनाने, बिजली संशोधन बिल की वापसी व लेबर कोड्स वापसी तक धरना जारी रहेगा। इसके साथ सरकार से स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की भी अपील की गई। तीनों कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा पर किसान उत्साहित नजर आए।
किसान संघर्ष समिति पलवल के नेतृत्व में जारी धरने की अध्यक्षता 52 पाल पंच अरुण जेलदार ने की, जबकि संचालन राजकुमार ओहलियान ने किया। धरने में किसान नेताओं ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा ने लोकतंत्र में विरोध की राजनीति की आवश्यकता के विश्वास को मजबूत किया है। चाहे जो राजनीतिक व्यवस्था हो जनता ऐसा महासागर है जिसमें सत्ताओं का सिंहासन डूब कर मिट जाता है। सत्ता बेलगाम न हो जाए, इसलिए जनता को सड़कों पर पहरेदारी करनी पड़ती है। सरकार की कानून वापसी की घोषणा सड़कों पर इसी पहरेदारी का नतीजा है। किसानों के इस आंदोलन की यह जीत सभी तरह के धार्मिक-जातीय और क्षेत्रीय आधार पर आंदोलन को तोड़ने व कुचलने के सरकारी प्रयासों के ऊपर जीत है। हरियाणा के मुख्यमंत्री किसान संगठन बनाने और किसानों पर लठ बरसाने की सीख दे रहे थे, जिस ब्यान को लेकर बाद में उन्होंने भी माफी मांग ली। देश दुनिया के सबसे बड़े संघर्ष ने निरंकुश शासन को जमीन दिखा दी है। सरकार ने एक साल में किसानों को घेरकर एक ऐसे मैदान में पहुंचा दिया, जहां से निकलने का रास्ता और साहस केवल किसानों के पास था। किसानों ने हर अपमान को अमृत की तरह पिया तथा उन्हें देश की राजधानी में जाने से रोका गया। इस अवसर पर अच्छेलाल जोधपुर, समयराम ककराली, बीर सिंह चौहान, पोहप सिंह स्यारौली, जयदेव चौहान, करतार चौहान, चेतराम मेंबर ने भजन प्रस्तुत किए।
धरने को किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, धर्मचंद घुघेरा, उदय सिंह सरपंच, रमेश चंद गौडोता, सोहनपाल चौहान, धर्मवीर रूंधी, रूपराम तेवतिया, सतीश भुर्जा, ज्ञान सिंह चौहान, राजेंद्र बैसला, नरेंद्र सहरावत, बीधू सिंह, बिजेंद्र शर्मा एडवोकेट, धर्मबीर शर्मा व योगेश शर्मा सहित अन्य ने संबोधित किया।
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किसान संघर्ष समिति पलवल के नेतृत्व में जारी धरने की अध्यक्षता 52 पाल पंच अरुण जेलदार ने की, जबकि संचालन राजकुमार ओहलियान ने किया। धरने में किसान नेताओं ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा ने लोकतंत्र में विरोध की राजनीति की आवश्यकता के विश्वास को मजबूत किया है। चाहे जो राजनीतिक व्यवस्था हो जनता ऐसा महासागर है जिसमें सत्ताओं का सिंहासन डूब कर मिट जाता है। सत्ता बेलगाम न हो जाए, इसलिए जनता को सड़कों पर पहरेदारी करनी पड़ती है। सरकार की कानून वापसी की घोषणा सड़कों पर इसी पहरेदारी का नतीजा है। किसानों के इस आंदोलन की यह जीत सभी तरह के धार्मिक-जातीय और क्षेत्रीय आधार पर आंदोलन को तोड़ने व कुचलने के सरकारी प्रयासों के ऊपर जीत है। हरियाणा के मुख्यमंत्री किसान संगठन बनाने और किसानों पर लठ बरसाने की सीख दे रहे थे, जिस ब्यान को लेकर बाद में उन्होंने भी माफी मांग ली। देश दुनिया के सबसे बड़े संघर्ष ने निरंकुश शासन को जमीन दिखा दी है। सरकार ने एक साल में किसानों को घेरकर एक ऐसे मैदान में पहुंचा दिया, जहां से निकलने का रास्ता और साहस केवल किसानों के पास था। किसानों ने हर अपमान को अमृत की तरह पिया तथा उन्हें देश की राजधानी में जाने से रोका गया। इस अवसर पर अच्छेलाल जोधपुर, समयराम ककराली, बीर सिंह चौहान, पोहप सिंह स्यारौली, जयदेव चौहान, करतार चौहान, चेतराम मेंबर ने भजन प्रस्तुत किए।
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धरने को किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान, धर्मचंद घुघेरा, उदय सिंह सरपंच, रमेश चंद गौडोता, सोहनपाल चौहान, धर्मवीर रूंधी, रूपराम तेवतिया, सतीश भुर्जा, ज्ञान सिंह चौहान, राजेंद्र बैसला, नरेंद्र सहरावत, बीधू सिंह, बिजेंद्र शर्मा एडवोकेट, धर्मबीर शर्मा व योगेश शर्मा सहित अन्य ने संबोधित किया।
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