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Palwal News: 1350 रुपये की डीएपी खाद 1650 में खरीदने को मजबूर किसान
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निजी विक्रेता खुलेआम कर रहे डीएपी की कालाबाजारी, सरकारी दुकानों पर नहीं मिल रहा खाद
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। जिले में डीएपी खाद के नाम पर किसानों से मनमाने पैसे वसूले जा रहे हैं। किसानों को डीएपी खाद निर्धारित मूल्य 1350 रुपये के बजाय 1650 रुपये में खरीदना पड़ रहा है। सरकारी दुकानों में डीएपी खाद उपलब्ध नहीं होने पर किसानों को प्राइवेट दुकानों से खरीदना पड़ता है और वे इसका फायदा उठाकर मनमाने दामों पर खाद बेचते हैं। किसानों ने आरोप लगाया है कि प्राइवेट विक्रेता खुलेआम डीएपी खाद की कालाबाजारी कर रहे हैं फिर भी अधिकारी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। किसानों ने जिला प्रशासन से ऐसे विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
बता दें कि किसानों के लिए सरकार ने सभी कस्बों में सरकारी खाद-बीज भंडार की दुकानें खोली हुई हैं। सरकारी खाद की दुकानों पर अधिकांश खाद नहीं उपलब्ध नहीं रहता है। इसलिए किसान निजी विक्रेताओं से खरीदने को मजबूर हैं। मेवली गांव के किसान फारुख, मजीद, रज्जाक व मुस्ताक ने बताया कि वे बीस एकड़ पर सब्जी की खेती करते हैं। उन्हें डीएपी खाद की जरूरत पड़ती है। निजी विक्रेता डीएपी खाद 1650 रुपये में बेचते हैं। जब उन्होंने 300 रुपये अधिक लेने का का विरोध किया तो दुकानदारों ने शिकायत करने को कहा। वहीं, अधिकारी लिखित शिकायत की बात कहकर कार्रवाई करने से बचते हैं। किसानों का आरोप है कि अधिकारी प्राइवेट खाद-बीज भंडार वालों से मिले हुए हैं। बता दें कि जिले के नूंह, तावडू, फिरोजपुर झिरका व पुन्हाना उपमंडल में दो लाख 70 एकड़ भूमि कृषि योग्य है। कृषि योग्य भूमि में रबी व खरीफ की फसलें होती हैं। बीते रबी के सीजन में करीब डेढ़ लाख एकड़ में गेंहू, 75 हजार 300 एकड़ में सरसों की बिजाई की गई थी। अब खरीफ की फसलों की बिजाई होनी है। जिसमें धान, बाजरा, कपास, ज्वार प्रमुख हैं तो तिल, सब्जी सहित अन्य कई फसलों की बिजाई होनी है। जिनमें किसानों को डीएपी खाद की जरूरत पड़ेगी।
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मेवात में किसानों का खाद-बीज विक्रेता खुलेआम शोषण कर रहे हैं। कोई रोक-टोक नहीं है। अधिकारियों की मिलीभगत से यह हो रहा है। इनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।- रणजीत नंबरदार, इंडरी।
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अधिकारियों की मिलीभगत के कारण 1350 का खाद 1700 रुपये तक खुलेआम बेचा जा रहा है और अधिकारी लिखित में शिकायत मांगते हैं। क्या अधिकारी बिना लिखित शिकायत के कार्रवाई करने में सक्षम नहीं हैं क्या। -आफिस अली
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यहां प्राइवेट खाद-बीज भंडार वाले हर सीजन में खुलेआम लूट मचाते हैं। लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है। जिला प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। - हेमराज नंबरदार
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हमारी कोशिश होती है कि कालाबाजारी न हो। समय-समय पर चेकिंग भी होती है। किसी किसान से कोई भी ज्यादा पैसा ले रहा है तो उसकी लिखित में शिकायत दें ताकि उस पर कार्रवाई की जा सके। - वीरेंद्र सिंह, उपनिदेशक कृषि विभाग नूंह
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। जिले में डीएपी खाद के नाम पर किसानों से मनमाने पैसे वसूले जा रहे हैं। किसानों को डीएपी खाद निर्धारित मूल्य 1350 रुपये के बजाय 1650 रुपये में खरीदना पड़ रहा है। सरकारी दुकानों में डीएपी खाद उपलब्ध नहीं होने पर किसानों को प्राइवेट दुकानों से खरीदना पड़ता है और वे इसका फायदा उठाकर मनमाने दामों पर खाद बेचते हैं। किसानों ने आरोप लगाया है कि प्राइवेट विक्रेता खुलेआम डीएपी खाद की कालाबाजारी कर रहे हैं फिर भी अधिकारी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करते हैं। किसानों ने जिला प्रशासन से ऐसे विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
बता दें कि किसानों के लिए सरकार ने सभी कस्बों में सरकारी खाद-बीज भंडार की दुकानें खोली हुई हैं। सरकारी खाद की दुकानों पर अधिकांश खाद नहीं उपलब्ध नहीं रहता है। इसलिए किसान निजी विक्रेताओं से खरीदने को मजबूर हैं। मेवली गांव के किसान फारुख, मजीद, रज्जाक व मुस्ताक ने बताया कि वे बीस एकड़ पर सब्जी की खेती करते हैं। उन्हें डीएपी खाद की जरूरत पड़ती है। निजी विक्रेता डीएपी खाद 1650 रुपये में बेचते हैं। जब उन्होंने 300 रुपये अधिक लेने का का विरोध किया तो दुकानदारों ने शिकायत करने को कहा। वहीं, अधिकारी लिखित शिकायत की बात कहकर कार्रवाई करने से बचते हैं। किसानों का आरोप है कि अधिकारी प्राइवेट खाद-बीज भंडार वालों से मिले हुए हैं। बता दें कि जिले के नूंह, तावडू, फिरोजपुर झिरका व पुन्हाना उपमंडल में दो लाख 70 एकड़ भूमि कृषि योग्य है। कृषि योग्य भूमि में रबी व खरीफ की फसलें होती हैं। बीते रबी के सीजन में करीब डेढ़ लाख एकड़ में गेंहू, 75 हजार 300 एकड़ में सरसों की बिजाई की गई थी। अब खरीफ की फसलों की बिजाई होनी है। जिसमें धान, बाजरा, कपास, ज्वार प्रमुख हैं तो तिल, सब्जी सहित अन्य कई फसलों की बिजाई होनी है। जिनमें किसानों को डीएपी खाद की जरूरत पड़ेगी।
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मेवात में किसानों का खाद-बीज विक्रेता खुलेआम शोषण कर रहे हैं। कोई रोक-टोक नहीं है। अधिकारियों की मिलीभगत से यह हो रहा है। इनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।- रणजीत नंबरदार, इंडरी।
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अधिकारियों की मिलीभगत के कारण 1350 का खाद 1700 रुपये तक खुलेआम बेचा जा रहा है और अधिकारी लिखित में शिकायत मांगते हैं। क्या अधिकारी बिना लिखित शिकायत के कार्रवाई करने में सक्षम नहीं हैं क्या। -आफिस अली
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यहां प्राइवेट खाद-बीज भंडार वाले हर सीजन में खुलेआम लूट मचाते हैं। लेकिन इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है। जिला प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए। - हेमराज नंबरदार
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हमारी कोशिश होती है कि कालाबाजारी न हो। समय-समय पर चेकिंग भी होती है। किसी किसान से कोई भी ज्यादा पैसा ले रहा है तो उसकी लिखित में शिकायत दें ताकि उस पर कार्रवाई की जा सके। - वीरेंद्र सिंह, उपनिदेशक कृषि विभाग नूंह