पलवल। नए कृषि कानूनों के विरोध में अटोहां मोड़ पर किसानों का धरना सोमवार को भी जारी रहा। किसानों ने जिले में कार्यरत सभी जनसंगठनों, सामाजिक संस्थाओं, बुद्धिजीवियों, वकीलों, मजदूरों और कर्मचारियों से 27 सितंबर को भारत बंद में शामिल होकर उसे सफल बनाने की अपील की। किसानों ने कहा कि यह आंदोलन केवल किसानों का नहीं बल्कि सभी वर्गों का है।
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव रतन सिंह सौरौत और धर्मचंद ने कहा कि सरकार कृषि सुधार के नाम पर कानून तो ले आई, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देने को तैयार नहीं है। क्योंकि, कानूनों में स्पष्ट नहीं किया गया है कि किसान की उपज की खरीद कैसे सुनिश्चित होगी और किसानों की कर्जमाफी का क्या होगा। इन कानूनों से सरकार ने किसानों से अदालत जाने का अधिकार भी छीन लिया है। अनुबंध करने वाली कंपनियां अगर किसान के साथ धोखा करती हैं तो किसान अदालत न जाकर एसडीएम के पास जाएगा। इस व्यवस्था में एसडीएम किसानों को क्या न्याय देगा, इसका अंदाजा करनाल में लाठीचार्ज के दोषी एसडीएम द्वारा सरेआम किसानों के सिर फोड़ने के गैरकानूनी आदेश देने से लगाया जा सकता है। सरकार की मंशा ठीक नहीं है। सरकार कह रही है कि किसान अपनी फसल कहीं भी बेच सकता है। भारत में 86 प्रतिशत किसानों के पास 2 हेक्टेयर या इससे भी कम खेती है। सरकार ने किसानों से बातचीत के समय इन कानूनों की दर्जनों खामियों को स्वीकार किया था, लेकिन अब तक संशोधन नहीं किया। धरने का संचालन नरेंद्र सहरावत ने किया और अध्यक्षता मानसिंह डागर ने की। धरने में शामिल किसानों को सोहनपाल चौहान, रूपराम तेवतिया, रमेशचंद सौरौत, बिधू सिंह, दिगंबर सिंह, अच्छेलाल, इंद्रसिंह रावत, पोहप सिंह डागर, किशन चंद शर्मा, महाशय श्रीचंद ने भी संबोधित किया।