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बूंदाबांदी ने खेतों में लिटाई सरसों की फसल
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होडल। मौसम विभाग की बारिश की चेतावनी का असर जिले में बुधवार देर रात को ही देखने को मिला। बुधवार रात को अचानक मौसम बदल गया तथा देर रात को बूंदाबांदी शुरू हो गईं, जो सुबह तक होती रही। सुबह बारिश तो बंद हो गई, लेकिन तेज हवा चलनी शुरू हो गईं। इससे खेतों में खड़ी सरसों की फसल गिरकर खराब हो गई। किसानों का कहना है कि बारिश व तेज हवा से सरसों की फसल पूरी तरह से प्रभावित हो गई है। गेहूं की फसल में बाली आ चुकी है और अब पकाव की तरफ बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि यदि हवा ऐसे ही चलती रही गेहूं की फसल में नुकसानदायक साबित होगी।
पिछले तीन दिनों से निकली तेज धूप के बाद मौसम विभाग ने आशंका जाहिर कर दी थी कि आगे मौसम बिगड़ सकता है। मौसम विभाग ने 3 व 4 फरवरी को बारिश होने की संभावना जताई थी। बुधवार की देर रात को ही मौसम परिवर्तन हो गया तथा ठंड का प्रकोप बढ़ने लगा। तेज हवा चलने लगी। जिस कारण फसलों में भी नुकसान होना बताया जा रहा है। हालांकि अभी फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन कई जगह पर सरसों की फसल बिछ गई है। उधर, बारिश व तेज हवाओं से बृहस्पतिवार को फिर से ठंड का प्रकोप बढ़ गया। ठंड बढ़ने से लोग घरों में दुबके रहे तथा बाहर अलाव जलाकर बैठे नजर आए।
यह ठंड फसल के लिए अच्छी, लेकिन तेज हवा फसलों के लिए नुकसानदायक है। बारिश से फसलों को नुकसान हो सकता है। उनका कहना है कि तेज हवाएं व बारिश सरसों, जौ, मटर और बाली आ चुकी है। गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक है। पकाव की ओर बढ़ रही फसलें इस हवा के कारण पूरी तरह से प्रभावित हुई हैं। सरसों की अधिकांश फसल तो हवा के कारण खेतों में लेट चुकी है।
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- डॉ. महावीर सिंह मलिक, कृषि विशेषज्ञ
बूंदाबांदी एवं तेज हवा से बढ़ी ठंड
हथीन। बूंदाबांदी तो कुछ समय ही हुई। उसके बाद चली शीतलहर ने कंपा दिया। हल्की बारिश के बाद बिजली गुल हो गई। सुबह ऑफिस और कारोबार को जाने वाले लोगों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। शीतलहर से बचने के लिए लोग घरों में दुबके रहे। लोगों ने अलाव जलाकर ठंड से बचाव किया। बाजार में दुकानदारों ने भी अलाव जलाया। इलाके में न्यूनतम तापमान नौ डिग्री सेल्सियस एवं अधिकतम 19 डिग्री रहा। हवा 17 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती रही।
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पिछले तीन दिनों से निकली तेज धूप के बाद मौसम विभाग ने आशंका जाहिर कर दी थी कि आगे मौसम बिगड़ सकता है। मौसम विभाग ने 3 व 4 फरवरी को बारिश होने की संभावना जताई थी। बुधवार की देर रात को ही मौसम परिवर्तन हो गया तथा ठंड का प्रकोप बढ़ने लगा। तेज हवा चलने लगी। जिस कारण फसलों में भी नुकसान होना बताया जा रहा है। हालांकि अभी फसलों को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन कई जगह पर सरसों की फसल बिछ गई है। उधर, बारिश व तेज हवाओं से बृहस्पतिवार को फिर से ठंड का प्रकोप बढ़ गया। ठंड बढ़ने से लोग घरों में दुबके रहे तथा बाहर अलाव जलाकर बैठे नजर आए।
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यह ठंड फसल के लिए अच्छी, लेकिन तेज हवा फसलों के लिए नुकसानदायक है। बारिश से फसलों को नुकसान हो सकता है। उनका कहना है कि तेज हवाएं व बारिश सरसों, जौ, मटर और बाली आ चुकी है। गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक है। पकाव की ओर बढ़ रही फसलें इस हवा के कारण पूरी तरह से प्रभावित हुई हैं। सरसों की अधिकांश फसल तो हवा के कारण खेतों में लेट चुकी है।
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- डॉ. महावीर सिंह मलिक, कृषि विशेषज्ञ
बूंदाबांदी एवं तेज हवा से बढ़ी ठंड
हथीन। बूंदाबांदी तो कुछ समय ही हुई। उसके बाद चली शीतलहर ने कंपा दिया। हल्की बारिश के बाद बिजली गुल हो गई। सुबह ऑफिस और कारोबार को जाने वाले लोगों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। शीतलहर से बचने के लिए लोग घरों में दुबके रहे। लोगों ने अलाव जलाकर ठंड से बचाव किया। बाजार में दुकानदारों ने भी अलाव जलाया। इलाके में न्यूनतम तापमान नौ डिग्री सेल्सियस एवं अधिकतम 19 डिग्री रहा। हवा 17 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती रही।