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अलाव सेकते रात भर चलती है आंदोलन पर चर्चा
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पलवल। कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन में अब तेजी आने लगी है। पिछले 18 दिनों से धरना दे रहे किसानों के साथ अब स्थानीय किसान भी उठ खड़े हुए हैं। गांवों में पंचायतें कर समर्थन देने का निर्णय लिया जा रहा है। वहीं युवा किसान देर रात तक अलाव पर हाथ सेंकते हुए किसान आंदोलन पर चर्चा करते रहते हैं।
रविवार को गांव अलावलपुर, घुघेरा, अल्लीका, घोड़ी, बड़ौली, अटोहां सहित अन्य गांवों में बैठक कर धरने में शामिल होने का निर्णय लिया गया। बुंदेलखंड के किसानों द्वारा शुरू किए गए आंदोलन में स्थानीय लोगों द्वारा लंगर के लिए हरसंभव मदद भिजवाई जा रही है। कोई खाद्य सामग्री ला रहा है, तो कोई ईंधन व साधनों की कमी को पूरा कर रहा है। रविवार को गांव अलावलपुर में पंचायत आयोजित कर धरने में रोजाना दो ट्रैक्टर-ट्रॉली भरकर किसानों के शामिल होने का निर्णय लिया गया। इसी प्रकार अन्य गांवों से ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर किसानों का आगमन जारी है। दिन में बड़े बुजुर्ग बुंदेलखंड के किसानों के साथ धरना स्थल पर डटे रहते हैं, तो रात में युवा उनका हौसला बढ़ाते रहते हैं। उनके साथ अलाव सेंकते हुए घंटों चर्चा की जाती है।
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रविवार को गांव अलावलपुर, घुघेरा, अल्लीका, घोड़ी, बड़ौली, अटोहां सहित अन्य गांवों में बैठक कर धरने में शामिल होने का निर्णय लिया गया। बुंदेलखंड के किसानों द्वारा शुरू किए गए आंदोलन में स्थानीय लोगों द्वारा लंगर के लिए हरसंभव मदद भिजवाई जा रही है। कोई खाद्य सामग्री ला रहा है, तो कोई ईंधन व साधनों की कमी को पूरा कर रहा है। रविवार को गांव अलावलपुर में पंचायत आयोजित कर धरने में रोजाना दो ट्रैक्टर-ट्रॉली भरकर किसानों के शामिल होने का निर्णय लिया गया। इसी प्रकार अन्य गांवों से ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरकर किसानों का आगमन जारी है। दिन में बड़े बुजुर्ग बुंदेलखंड के किसानों के साथ धरना स्थल पर डटे रहते हैं, तो रात में युवा उनका हौसला बढ़ाते रहते हैं। उनके साथ अलाव सेंकते हुए घंटों चर्चा की जाती है।
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