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किसी भी विधेयक को रद्द करने से पहले चर्चा जरूरी
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पलवल। कृषि क्षेत्र से जुड़ी मांगों व समस्याओं को लेकर केएमपी-केजीपी इंटरजेंच पर चल रहा धरना जारी रहा। किसान संघर्ष समिति पलवल के नेतृत्व में जारी धरने की अध्यक्षता रूपचंद दलाल ने की, जबकि संचालन नरेंद्र सहरावत ने किया। धरने में शामिल किसानों ने सरकार द्वारा बैंकों के निजीकरण करने के बिल को संसद में रखने की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उसे वापिस लेने की मांग की। किसानों ने कहा कि कृषि भी विधेयक को लाने से पहले व पारित करने के दौरान पक्ष, विपक्ष व जानकारों की राय लेनी चाहिए, जोकि सरकार जरूरी नहीं समझ रही है।
धरने में किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान व उदयसिंह सरपंच ने कहा कि तीन कृषि कानून अच्छे थे या बुरे, किसानों के भले के लिए या पूंजीपतियों के भले के लिए थे, सरकार की मंशा अच्छी थी या शोषणकारी इसके लिए देश की संसद में चर्चा होनी चाहिए थी। बिना चर्चा के कानूनों का बनना या रद्द होना संसदीय लोकतंत्र के लिए गिरावट का लक्षण है। किसान नेता रमेशचंद सौरोत व धर्मचंद घुघेरा ने कहा कि भारत की आधे से ज्यादा आबादी कृषि पर निर्भर है। यह ध्यान रखना चाहिए कि कृषि क्षेत्र ने कोरोना महामारी के सबसे बुरे दौर में तथा विवादित तीन काले कृषि कानूनों से जूझते हुए देश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान किया है, जो यह दर्शाता है कि कृषि क्षेत्र में भारी संख्या में किसान अथक परिश्रम कर रहे हैं। इससे यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि खेती किसानी में किसानों के सामने आ रही समस्याओं पर चर्चा करके उनका समाधान करना बहुत ही जरूरी है।
धरने को किसान नेता महावीर मलिक, रुपराम तेवतिया, राजकुमार ओहलियान, राजेंद्र बैंसला, छिद्दी सरपंच, बीरसिंह दलाल, जियाराम सूबेदार, शिव सिंह थानेदार, अच्छेलाल, गोपी हवलदार, जयदेव चौहान, समय सिंह, रोशनलाल, धन्नी अलावलपुर, बीर सिंह चौहान व हुकम सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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धरने में किसान नेता मास्टर महेंद्र सिंह चौहान व उदयसिंह सरपंच ने कहा कि तीन कृषि कानून अच्छे थे या बुरे, किसानों के भले के लिए या पूंजीपतियों के भले के लिए थे, सरकार की मंशा अच्छी थी या शोषणकारी इसके लिए देश की संसद में चर्चा होनी चाहिए थी। बिना चर्चा के कानूनों का बनना या रद्द होना संसदीय लोकतंत्र के लिए गिरावट का लक्षण है। किसान नेता रमेशचंद सौरोत व धर्मचंद घुघेरा ने कहा कि भारत की आधे से ज्यादा आबादी कृषि पर निर्भर है। यह ध्यान रखना चाहिए कि कृषि क्षेत्र ने कोरोना महामारी के सबसे बुरे दौर में तथा विवादित तीन काले कृषि कानूनों से जूझते हुए देश की जीडीपी में महत्वपूर्ण योगदान किया है, जो यह दर्शाता है कि कृषि क्षेत्र में भारी संख्या में किसान अथक परिश्रम कर रहे हैं। इससे यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि खेती किसानी में किसानों के सामने आ रही समस्याओं पर चर्चा करके उनका समाधान करना बहुत ही जरूरी है।
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धरने को किसान नेता महावीर मलिक, रुपराम तेवतिया, राजकुमार ओहलियान, राजेंद्र बैंसला, छिद्दी सरपंच, बीरसिंह दलाल, जियाराम सूबेदार, शिव सिंह थानेदार, अच्छेलाल, गोपी हवलदार, जयदेव चौहान, समय सिंह, रोशनलाल, धन्नी अलावलपुर, बीर सिंह चौहान व हुकम सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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