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चौपाई के जरिये कानूनों को रद्द करने की मांग
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पलवल। कृषि कानूनों के विरोध में चले रहे धरने में चौपाई प्रतियोगिता के दूसरे दिन कलाकारों ने सरकार पर जमकर कटाक्ष किए। इस दौरान कृषि कानूनों को निरस्त करने, एमएसपी पर कानून बनाने व बढ़ती महंगाई को कम करने की मांग उठाई गई।
रविवार को चौपाई प्रतियोगिता में पार्टियों को अपनी प्रस्तुति देने के लिए 40 मिनट का समय दिया गया। इस दौरान आठ नगाड़ा पार्टियों धामाका, मीतरौल, छाता, जनौली, पेलक, मर्रोली, बंचारी, सौंदहद व आलदौका शामिल रहे। सभी ने डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दाम, पुलवामा में सैनिकों की शहादत, एयर स्ट्राइक, चीन का अटैक, कालाधन, 15-15 लाख रुपये खाते में आने जैसे मुद्दों को लोकगीतों के जरिये पेश किया। ग्रामीण कलाकारों ने बृजशैली में चौपाइयों के जरिये देश के गंभीर मुद्दों का बखान किया। वहीं ब्राह्मण बाहुल्य गांव पेलक के कलाकारों ने पुलवामा अटैक और एयर स्ट्राइक पर सवाल खडे़ किए। धरने की अध्यक्षता 52 पालों के अध्यक्ष अरुण जेलदार व संचालन ज्ञान सिंह चौहान ने किया। इस मौके पर विधायक सोमवीर सांगवान, पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल, पूर्व विधायक रघुवीर सिंह तेवतिया, इनेलो नेता महेंद्र चौहान, रतन सिंह सौरोत आदि मौजूद रहे।
आंदोलन को भेंट किए पुरस्कार
दो दिवसीय चौपाई प्रतियोगिता के दौरान पार्टियों को किसानों द्वारा जो भी इनाम मिला, उन्होंने आंदोलन को सहयोग के तौर पर दे दिया। वहीं गांव जनौली की तरफ से पूर्व विधायक रघुवीर सिंह तेवतिया ने दो लाख एक हजार रुपये सहयोग के तौर पर दिए। गांव डीग की तरफ से भी धरने के लिए सहयोग राशि दी गई। किसान नेताओं ने बताया कि चौपाई बृज क्षेत्र की संस्कृति है। होली तक यहां गांव-गांव में इसका आयोजन किया जाता है। अब धरने पर नियमित रूप से चौपाई कार्यक्रम होगा। प्रतिदिन एक गांव की चौपाई पार्टी धरने पर आकर अपनी प्रस्तुति देगी।
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पंडाल पड़ा छोटा, तंबुओं में बैठे लोग
प्रतियोगिता के दौरान धरनास्थल पर पंडाल को बढ़ाया गया था, लेकिन किसानों की संख्या ज्यादा होने के कारण यह छोटा पड़ गया। किसान धरनास्थल के चारो तरफ खड़े होकर चौपाई का आनंद लेते रहे। वहीं कुछ किसान अपने पालों के तंबुओं में ही बैठ गए।
महिलाओं ने जमकर किया चौपई पर नृत्य
प्रतियोगिता के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं ने धरनास्थल पर अपनी भागीदारी दर्ज कराई। बीच-बीच में चौपाई पर जमकर नृत्य भी किया। इस अवसर पर समिति की तरफ से मिष्ठान वितरित किया गया। वहीं पूरा दिन लंगर चलता रहा।
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रविवार को चौपाई प्रतियोगिता में पार्टियों को अपनी प्रस्तुति देने के लिए 40 मिनट का समय दिया गया। इस दौरान आठ नगाड़ा पार्टियों धामाका, मीतरौल, छाता, जनौली, पेलक, मर्रोली, बंचारी, सौंदहद व आलदौका शामिल रहे। सभी ने डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दाम, पुलवामा में सैनिकों की शहादत, एयर स्ट्राइक, चीन का अटैक, कालाधन, 15-15 लाख रुपये खाते में आने जैसे मुद्दों को लोकगीतों के जरिये पेश किया। ग्रामीण कलाकारों ने बृजशैली में चौपाइयों के जरिये देश के गंभीर मुद्दों का बखान किया। वहीं ब्राह्मण बाहुल्य गांव पेलक के कलाकारों ने पुलवामा अटैक और एयर स्ट्राइक पर सवाल खडे़ किए। धरने की अध्यक्षता 52 पालों के अध्यक्ष अरुण जेलदार व संचालन ज्ञान सिंह चौहान ने किया। इस मौके पर विधायक सोमवीर सांगवान, पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल, पूर्व विधायक रघुवीर सिंह तेवतिया, इनेलो नेता महेंद्र चौहान, रतन सिंह सौरोत आदि मौजूद रहे।
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आंदोलन को भेंट किए पुरस्कार
दो दिवसीय चौपाई प्रतियोगिता के दौरान पार्टियों को किसानों द्वारा जो भी इनाम मिला, उन्होंने आंदोलन को सहयोग के तौर पर दे दिया। वहीं गांव जनौली की तरफ से पूर्व विधायक रघुवीर सिंह तेवतिया ने दो लाख एक हजार रुपये सहयोग के तौर पर दिए। गांव डीग की तरफ से भी धरने के लिए सहयोग राशि दी गई। किसान नेताओं ने बताया कि चौपाई बृज क्षेत्र की संस्कृति है। होली तक यहां गांव-गांव में इसका आयोजन किया जाता है। अब धरने पर नियमित रूप से चौपाई कार्यक्रम होगा। प्रतिदिन एक गांव की चौपाई पार्टी धरने पर आकर अपनी प्रस्तुति देगी।
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पंडाल पड़ा छोटा, तंबुओं में बैठे लोग
प्रतियोगिता के दौरान धरनास्थल पर पंडाल को बढ़ाया गया था, लेकिन किसानों की संख्या ज्यादा होने के कारण यह छोटा पड़ गया। किसान धरनास्थल के चारो तरफ खड़े होकर चौपाई का आनंद लेते रहे। वहीं कुछ किसान अपने पालों के तंबुओं में ही बैठ गए।
महिलाओं ने जमकर किया चौपई पर नृत्य
प्रतियोगिता के दौरान बड़ी संख्या में महिलाओं ने धरनास्थल पर अपनी भागीदारी दर्ज कराई। बीच-बीच में चौपाई पर जमकर नृत्य भी किया। इस अवसर पर समिति की तरफ से मिष्ठान वितरित किया गया। वहीं पूरा दिन लंगर चलता रहा।