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मुंह खुर बीमारी से पशुओं की मौत का मुआवजा देने की मांग

Fri, 04 Jan 2019 11:14 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 04 Jan 2019 11:14 PM IST
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मुंह खुर बीमारी से पशुओं की मौत का मुआवजा देने की मांग
मुंह खुर से मवेशियों की मौत का मुआवजा देने की मांग
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रामगढ़ के लोगों ने पंचायत कर मुख्यमंत्री पर लगाया पलवल के लोगों से भेदभाव का आरोप
- फतेहाबाद और सिरसा में पशुओं के मरने पर सीएम ने दिया 68.71 लाख रुपये मुआवजा
अमर उजाला ब्यूरो
हसनपुर। प्रदेश सरकार द्वारा फतेहाबाद और सिरसा में मुंह खुर बीमारी से हुई पशुओं की मौत के मामले में 68.71 लाख रुपये की मुआवजा राशि मंजूर करने पर गांव रामगढ़ के पशु पालकों में बेहद रोष व्याप्त है। रामगढ़ के लोगों ने मुख्यमंत्री का ‘हरियाणा एक, हरियाणवी एक’ के नारे को भी धोखा करार देते हुए शुक्रवार को चौपाल पर पंचायत कर सरकार की कथनी व करनी पर सवाल उठाए। पशु पालकों का आरोप था कि जब फतेहाबाद और सिरसा में मुंह खुर की बीमारी से पशुओं की मौत होने पर पशु पालकों को नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा मिल सकता है तो पलवल जिले के पशु पालकों को क्यों नहीं। पंचायत में पशु पालकों ने मुख्यमंत्री से सवाल किया है कि पलवल जिले के गरीब पशु पालकों से ऐसा बर्ताव क्यों किया जा रहा है। इस सवाल का जवाब मांगने के लिए एक पत्र भी मुख्यमंत्री के नाम भेजा गया है।
यह था मामला
अगस्त माह में प्राकृतिक आपदा के कारण गांव के मवेशियों में मुंह खुर की बीमारी फैली थी। जिससे गांव के पशु पालकों के 100 से भी ज्यादा दुधारू पशु इस बीमारी से मर गए थे। जिस पर ग्रामीणों ने पशु पालन विभाग व जिला उपायुक्त के माध्यम से सरकार से मुंह खुर बीमारी से मरने वाले पशुओं के नुकसान की भरवाई के लिए मुआवजा मांगा था, परंतु सरकार की तरफ से इंकार कर दिया गया था। अब बाद में फतेहाबाद और सिरसा में भी मुंह खुर बीमारी से पशुओं की मौत हो गई तो सरकार ने वहां के पशु पालकों के लिए 68.71 लाख रुपये की राशि मुआवजा के रूप में मंजूर कर दी।
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सरकार पर लगाया भेदभाव का आरोप
सरकार द्वारा सिरसा और फतेहाबाद में मुआवजा राशि मंजूर करने पर शुक्रवार को गांव की चौपाल पर पंचायत कर ग्रामीणों ने भेदभाव का आरोप लगाया। पंचायत में पशु पालक किसान बलबीर, ह्रदय राम, सोन सिंह ठाकुली, बदन सिंह, मोहन श्याम ने कहा कि मुख्यमंत्री की कथनी व करनी में अंतर है। फतेहाबाद और सिरसा में मुआवजा मंजूर कर साबित कर दिया गया है कि पलवल को सरकार व मुख्यमंत्री हरियाणा का जिला नहीं मानते। उन्होंने कहा कि इस बारे में मुख्यमंत्री से जवाब मांगा जाएगा तथा मुंह खुर बीमारी से मरने वाले पशुओं का मुआवजा उन्हें नहीं मिला तो वे चुनावों में भाजपा सरकार का विरोध करेंगे।
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कांग्रेस विधायक उदयभान व जननायक जनता दल के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व मंत्री जगदीश नायर का कहना है कि भाजपा सरकार की कथनी व करनी में अंतर है। सरकार किसान व पशु पालकों की ही नहीं, बल्कि हर वर्ग की विरोधी है। ‘हरियाणा एक हरियाणवी एक’ का नारा केवल नारा है, हकीकत में कुछ नहीं। पलवल जिले के साथ सरकार की भेदभावपूर्ण नीति का खामियाजा सरकार को चुनावों में भुगतना पड़ेगा।
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