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Haryana Politics: किसके गढ़ में बढ़ा व कहां घटा मतदान, कम वोटिंग के आंकड़े क्या कहते हैं... जानिए पूरी जानकारी

Sun, 06 Oct 2024 09:52 AM IST
नवीन दलाल कुलदीप शुक्ला, चंडीगढ़
कुलदीप शुक्ला, चंडीगढ़ Published by: नवीन दलाल Updated Sun, 06 Oct 2024 09:52 AM IST
सार

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ माने जाने वाला जाटलैंड में अबकी बार 1.02 प्रतिशत मतदान कम हुआ है। इस क्षेत्र में रोहतक, पानीपत, झज्जर, जींद, भिवानी, चरखी दादरी के 25 सीटें आती हैं।

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no party got third consecutive chance In history of Haryana, government changed even with low voter turnout
हरियाणा के कार्यवाहक सीएम और पूर्व सीएम हुड्डा - फोटो : संवाद

विस्तार

हरियाणा गठन के बाद 1967 से लेकर 2019 तक प्रदेश में 13 बार विधानसभा चुनाव हुए हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी कर चुकी है, मगर राज्य के इतिहास में अभी तक किसी भी दल को लगातार तीसरी बार जनादेश नहीं मिला, यानी की सत्ता में वापसी नहीं हुई है। विधानसभा चुनाव 2024 में कुल 66.96 प्रतिशत मतदान हुआ है, जोकि विधानसभा चुनाव 2019 के मुकाबले 1.12 प्रतिशत कम है। इतना ही नहीं हरियाणा के कुल 13 विधानसभा चुनाव की औसत मतदान प्रतिशत 69.19 रहा है। इससे भी मतदान प्रतिशत काफी कम रहा है।

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हरियाणा के इतिहास में औसत प्रतिशत से चार बार कम मतदान होने पर भी सत्ता परिवर्तन हुआ है। हालांकि, सात बार औसत प्रतिशत ज्यादा मतदान होने पर भी सत्ता की चाबी सत्ताधारी पार्टी के हाथ से दूसरे दल के पाले में गई है। औसत से कम मत प्रतिशत का उलटफेर वर्ष 2000 के चुनाव में 69.09 प्रतिशत मतदान होने बाद भी दिखाई पड़ा। इस बार भी हरियाणा विकास पार्टी से सत्ता इनेलो को मिल गई और चौधरी ओम प्रकाश चौटाला सीएम बनें।
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अब वर्ष 2005 में 71.97 प्रतिशत यानी कि पिछले विधानसभा चुनाव से 2 प्रतिशत ज्यादा मतदान होने के बाद कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई और पहली भूपेंद्र सिंह हुड्डा राज्य के सीएम बनें। वहीं, वर्ष 2009 में कुल 72.29 मत प्रतिशत होने के साथ कांग्रेस ही सत्ता में आई और भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वर्ष 2014 में कुल 76.13 प्रतिशत मतदान हुआ था। इस मतदान ने कांग्रेस को हटाकर सत्ता की कुर्सी भाजपा को पकड़ा दी।
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पहली बार भाजपा से मनोहर लाल सीएम बने। जबकि वर्ष 2019 में 67.92 प्रतिशत मतदान हुआ यानि की 8.21 प्रतिशत कम मतदान के बावजूद भाजपा ने जजपा के साथ मिलकर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। दूसरी बार मनोहर लाल ने सीएम पद संभाला, हालांकि 13 मार्च 2024 में भाजपा ने उलटफेर करते हुए मनोहर लाल की जगह नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री पद की कमान सौंपी थी।

जीटी बेल्ट में 1.30 प्रतिशत मतदान बढ़ा

सत्ताधारी भाजपा का गढ़ माना जाने वाले जीटी बेल्ट में आने वाले क्षेत्र पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, पानीपन, कैथल, कुरुक्षेत्र, अंबाला सहित 27 सीटें इसी इलाके में आते हैं। यहां पिछले चुनाव में औसत 66.40 मतदान के मुकाबले इस बार 67.70 प्रतिशत मतदान हुआ है। यह पिछले चुनाव के मुकाबले 1.30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

दक्षिण हरियाणा में 2.25 प्रतिशत बढ़ा मतदान

राज्य के दक्षिण हरियाणा में आने वाले जिले गुरुग्राम, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नूंह, पलवल, फरीदाबाद समेत कुल 23 सीटें है, जिसमें भाजपा को 15 सीटें मिली थी। यहां पिछली बार चुनाव में 63.75 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि इस बार के चुनाव में बढ़कर 66 प्रतिशत मतदान हुआ है।

हुड्डा के गढ़ में 1.02प्रतिशत घटा मतदान

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ माने जाने वाला जाटलैंड में अबकी बार 1.02 प्रतिशत मतदान कम हुआ है। इस क्षेत्र में रोहतक, पानीपत, झज्जर, जींद, भिवानी, चरखी दादरी के 25 सीटें आती हैं। यहां मतदान प्रतिशत उल्टा सामने आया है, पिछली बार 67.87 प्रतिशत मतदान वाले जाटलैंड क्षेत्र में अबकी बार 1.02 प्रतिशत कम यानी 66.85 प्रतिशत मतदान हुआ है।

पश्चिम हरियाणा वोटिंग में सबसे अव्वल, 2.51 प्रतिशत मतदान ज्यादा

पश्चिम हरियाणा वोटिंग के मामले में सबसे अव्वल रहा है। इस क्षेत्र में सिरसा, फतेहाबाद, हिसार जिले की 15 सीटें आती हैं। यहां पिछली बार चुनाव में 70 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि इस बार चुनाव में कुल 72.51 प्रतिशत मतदान हुआ है।

सीएम सैनी के हलके में 3 और हुड्डा के हलके में 5 प्रतिशत मतदान गिरा

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सीट लाडवा हलके में 3 प्रतिशत से ज्यादा मतदान प्रतिशत गिरा है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ी-सापलां-किलोई सीट पर 5 प्रतिशत से ज्यादा मतदान प्रतिशत कम हुआ है। हरियाणा में 42 सीटों पर 70 प्रतिशत से ज्यादा और 7 सीटों पर 55 प्रतिशत मतदान हुआ है। सबसे ज्यादा लोहारु में 79.30 प्रतिशत मतदान और सबसे कम बड़खल में 47.29 प्रतिशत मतदान हुआ है।

यह कहते चुनावी मतदान के आंकड़े

शहरी मतदाता घर से बाहर कम निकला। ग्रामीण मतदाता की भी दिलचस्पी अपेक्षाकृत कम दिखी।

  • टिकट वितरण के दौरान कांग्रेस व भाजपा में बगावत हुई। जिससे अनेक नाराज नेता दिखाने को माने लेकिन चुनाव में सक्रिय नहीं रहे।
  • जनता से जुड़े मुद्दे इस बार चुनाव में कम रहे। राष्ट्रीय नेताओं और राष्ट्रीय मुद्दों के आस-पास चुनाव घूमा है।
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