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नारनौल: बिमला मर्डर केस में उम्रकैद की सजा के बाद भी हत्यारे गैंगस्टर पपला गुर्जर के चेहरे पर नहीं दिखी शिकन

Tue, 26 Oct 2021 11:39 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौल Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Tue, 26 Oct 2021 11:39 PM IST
सार

बिमला मर्डर केस में फैसला आने के बाद भी गैंगस्टर पपला गुर्जर के चेहरे पर शिकन नहीं दिखी। उसने अपने लिए जज से रहम की अपील भी की, लेकिन सब बेकार गया। जज से हत्यारे ने कहा कि उसके मां-बाप बूढ़े हैं और वह सिर्फ अकेला ही अपने घर में कमाने वाला है। उसे कम सजा दी जाए। उसने 23 गोलियां मारकर हत्या की थी।

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Even after life imprisonment in Bimla murder case in Narnaul no wrinkle was visible on the face of gangster Papla Gurjar
सजा सुनाए जाने के बाद पपला को ले जाती पुलिस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

जिला कोर्ट द्वारा बिमला मर्डर केस में हत्यारे गैंगस्टर विक्रम उर्फ पपला गुर्जर को उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जिसके बाद भी उसके चेहरे पर जरा भी शिकन नहीं दिखाई दी। सजा सुनाए जाने के बाद उसने एक बार न्यायाधीश से कहा कि मेरे बूढ़े मां-बाप हैं। परिवार का अकेला कमाने वाला हूं। मेरे ऊपर रहम किया जाए। इसके अलावा उसने न्यायाधीश के समक्ष कुछ नहीं कहा। जब पुलिस उसको ले जा रही थी, तब भी चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। उसके चेहरे पर सजा का कोई प्रभाव नहीं दिखा।

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फांसी की दी थीं दलीलें
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अजय चौधरी ने न्यायाधीश के समक्ष दोषी विक्रम उर्फ पपला की सजा के लिए फांसी की सजा की दलील दी। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या भी इसी तरह हुई थी। उन पर 30 गोलियां चलाई गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने उस केस को विरलतम से विरल केस माना था और दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। उसी प्रकार विमला भी अपने घर सो रही थी।
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23 गोलियां मारकर की थी हत्या
विमला पर दोषी विक्रम ने 23 गोलियां चलाई थीं। कुल छह गोलियां लगी थी, जिसमें चार गोलियां उसके प्राइवेट पार्ट के आसपास मारी गईं थी। वहीं, विपक्षी अधिवक्ता कुलदीप भरगड़ ने दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह विरलतम से विरल केस न होकर सामान्य केस है। न्यायाधीश ने सामान्य केस मानकर सजा सुनाई।

बिमला मर्डर केस में न्यायाधीश ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। हमने फांसी की दलीलें दी थीं, लेकिन न्यायाधीश ने सामान्य केस मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके अलावा 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा होगी।
-अजय चौधरी, अधिवक्ता, पीड़ित पक्ष

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कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन इस मामले में साढ़े तीन वर्ष पहले कोर्ट ने छह आरोपियों को बरी कर दिया था। इसलिए हम आगे हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
-कुलदीप भरगड़, अधिवक्ता, विक्रम उर्फ पपला पक्ष
 

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