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Mahendragarh-Narnaul News: पाली में दिया जा रहा कुश्ती का प्रशिक्षण, 50 खिलाड़ी कर रहे अभ्यास
Mon, 14 Oct 2024 02:59 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Mon, 14 Oct 2024 02:59 AM IST
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फोटो नंबर-11गांव बाघोत की खेल नर्सरी में कुश्ती का अभ्यास करते खिलाड़ी। स्त्रोत- स्वयं
नारनौल। क्षेत्र में कुश्ती, तीरंदाजी, जूडो, क्रिकेट सहित अन्य खेलों में बच्चों की रूचि बढ़ रही है। परिजन भी बच्चों को खेल जगत में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। जिन खेलों में बच्चों की सबसे ज्यादा रूचि है, उनमें कुश्ती भी प्रमुख है। कुश्ती के लिए जिले में एकमात्र प्रशिक्षण गांव पाली स्थित राजीव गांधी खेल स्टेडियम में है।
राजीव गांधी खेल स्टेडियम में कुश्ती की ट्रेनिंग के लिए एक कोच नियुक्त है और करीब 50 खिलाड़ी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। राजीव गांधी खेल स्टेडियम में कुश्ती की ट्रेनिंग के लिए प्रशिक्षण अभी कुछ दिन पहले संचालित किया गया है, जिस कारण प्रशिक्षण प्राप्त कर रहें खिलाड़ियों ने किसी राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया है।
इसके अलावा जिले के 6 गांवों में कुश्ती की ट्रेनिंग के लिए खेल नर्सरी भी चल रही है। गांव बाघोत में दो खेल नर्सरी संचालित है और सतनाली, पवेरा, दौंगड़ा अहीर व ककराला गांव में एक-एक खेल नर्सरी संचालित है, जहां कुश्ती के लिए खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दी जाती है। जहां करीब 100 खिलाड़ी कुश्ती का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। लेकिन कुश्ती के लिए मैट, कुश्ती हॉल सहित अन्य कई सुविधाओं के अभाव में प्रतिभा होते हुए भी खिलाड़ी इस क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ पा रहें।
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अखाड़ों में भी खिलाड़ी सीख रहें कुश्ती के दांव-पेंच
नारनौल व आस-पास क्षेत्र में कुश्ती की कोचिंग के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। जिस कारण कुश्ती के खेल में रूचि रखने वाले खिलाड़ी अखाड़ों में कुश्ती के दांव-पेंच सीख कर खेल जगत में आगे बढ़ रहे हैं। रामकरण दास कालोनी में स्थित दादुवाली अखाड़ा में पिछले चालीस सालों से कुश्ती के दांव-पेच सिखाएं जा रहें हैं। दादुवाली अखाड़ा के संचालक रामकिशन पहलवान का कहना है कि पहले कुश्ती केवल शरीर को स्वस्थ रखने और खेल का हिस्सा थी। लेकिन जब से ओलंपिक व कॉमनवेल्थ खेलों में प्रदेश के खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन किया है तब से अखाड़ों में कुश्ती सीखने वाले बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली है। अखाड़ा संचालकों का कहना है कि ओलंपिक जैसे खेलों में बच्चे कुश्ती के खेल में पदक जीत सकें इसके लिए सरकार व खेल विभाग द्वारा कोचिंग की उचित व्यवस्था जरूरी है।
जिले में कुश्ती के लिए अभी गांव पाली स्थित राजीव गांधी स्टेडियम में कोचिंग की व्यवस्था है। साथ ही जिले में 6 खेल नर्सरियों में भी खिलाड़ियों को कुश्ती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नारनौल के समीप स्थित गांव नीरपुर में भी कुश्ती की कोचिंग के लिए व्यवस्था की जानी थी, लेकिन हॉल बनाने के लिए ग्रामीणों से जमीन को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। कुश्ती के लिए हॉल और मैट की उचित व्यवस्था की मांग उच्च अधिकारियों को भी भेजी गई है। जल्द ही जिले में कुश्ती के लिए बेहतर कोचिंग व्यवस्था स्थापित की जाएगी ताकि क्षेत्र के युवा खिलाड़ी बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।
नरेंद्र सिंह, जिला खेल अधिकारी, नारनौल।
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राजीव गांधी खेल स्टेडियम में कुश्ती की ट्रेनिंग के लिए एक कोच नियुक्त है और करीब 50 खिलाड़ी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। राजीव गांधी खेल स्टेडियम में कुश्ती की ट्रेनिंग के लिए प्रशिक्षण अभी कुछ दिन पहले संचालित किया गया है, जिस कारण प्रशिक्षण प्राप्त कर रहें खिलाड़ियों ने किसी राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में भाग नहीं लिया है।
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इसके अलावा जिले के 6 गांवों में कुश्ती की ट्रेनिंग के लिए खेल नर्सरी भी चल रही है। गांव बाघोत में दो खेल नर्सरी संचालित है और सतनाली, पवेरा, दौंगड़ा अहीर व ककराला गांव में एक-एक खेल नर्सरी संचालित है, जहां कुश्ती के लिए खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दी जाती है। जहां करीब 100 खिलाड़ी कुश्ती का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। लेकिन कुश्ती के लिए मैट, कुश्ती हॉल सहित अन्य कई सुविधाओं के अभाव में प्रतिभा होते हुए भी खिलाड़ी इस क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ पा रहें।
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अखाड़ों में भी खिलाड़ी सीख रहें कुश्ती के दांव-पेंच
नारनौल व आस-पास क्षेत्र में कुश्ती की कोचिंग के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। जिस कारण कुश्ती के खेल में रूचि रखने वाले खिलाड़ी अखाड़ों में कुश्ती के दांव-पेंच सीख कर खेल जगत में आगे बढ़ रहे हैं। रामकरण दास कालोनी में स्थित दादुवाली अखाड़ा में पिछले चालीस सालों से कुश्ती के दांव-पेच सिखाएं जा रहें हैं। दादुवाली अखाड़ा के संचालक रामकिशन पहलवान का कहना है कि पहले कुश्ती केवल शरीर को स्वस्थ रखने और खेल का हिस्सा थी। लेकिन जब से ओलंपिक व कॉमनवेल्थ खेलों में प्रदेश के खिलाड़ियों ने बेहतर प्रदर्शन किया है तब से अखाड़ों में कुश्ती सीखने वाले बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिली है। अखाड़ा संचालकों का कहना है कि ओलंपिक जैसे खेलों में बच्चे कुश्ती के खेल में पदक जीत सकें इसके लिए सरकार व खेल विभाग द्वारा कोचिंग की उचित व्यवस्था जरूरी है।
जिले में कुश्ती के लिए अभी गांव पाली स्थित राजीव गांधी स्टेडियम में कोचिंग की व्यवस्था है। साथ ही जिले में 6 खेल नर्सरियों में भी खिलाड़ियों को कुश्ती का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नारनौल के समीप स्थित गांव नीरपुर में भी कुश्ती की कोचिंग के लिए व्यवस्था की जानी थी, लेकिन हॉल बनाने के लिए ग्रामीणों से जमीन को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। कुश्ती के लिए हॉल और मैट की उचित व्यवस्था की मांग उच्च अधिकारियों को भी भेजी गई है। जल्द ही जिले में कुश्ती के लिए बेहतर कोचिंग व्यवस्था स्थापित की जाएगी ताकि क्षेत्र के युवा खिलाड़ी बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।
नरेंद्र सिंह, जिला खेल अधिकारी, नारनौल।