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बजट में महिला सैनिक स्कूल खुडाना के धरातल पर उतरने की आस
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पहली बार जब सत्ता संभाली थी तो 2016 के आम बजट में गांव खुडाना में महिला सैनिक स्कूल खोलने की घोषणा की थी। छह वर्ष बीतने के बाद भी घोषणा सिर्फ घोषणा ही रह गई। इसको लेकर कोई कार्य नहीं किया गया। यहां तक की कोई पत्राचार भी नहीं शुरू हो सका।
शुरुआत में यह मामला पूर्व मंत्री रामबिलास शर्मा ने तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के सामने रखा था। उसके बाद क्षेत्र के किसी नेता ने यह मांग नहीं उठाई है। मंगलवार को महिला दिवस पर सरकार अपना आठवां आम बजट पेश करेगी। महिला दिवस पर पेश हो रहे बजट से लोगों को उम्मीद है कि जिले को महिला सैनिक स्कूल की सौगात मिल जाए। प्रदेश सरकार बजट में महिला सैनिक स्कूल के लिए अपने हिस्से का बजट जारी कर केंद्र सरकार से इसकी सिफारिश करे।
बता दें कि 22 मार्च 2016 को भाजपा सरकार ने अपना दूसरा आम बजट पेश किया था। उस बजट में तत्कालीन शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने गांव खुडाना में महिला सैनिक स्कूल खोलने की घोषणा की थी। घोषणा करने के बाद एक बार लगा था कि अहीरवाल की बेटियां भी अपने पिता एवं दादा की तरह सेना में अधिकारी बनकर अपना सपना साकार कर सकेंगी. छह वर्ष बीत गया लेकिन अभी तक इस प्रोजेक्ट को लेकर कोई पत्राचार भी नहीं हुआ। सबसे बड़ी बात यह की जन सरोकार के मुद्दों को लेकर एक दूसरे को घेरने वाले पक्ष-विपक्ष के नेताओं ने भी यह मामला कभी नहीं उठाया। इसी कारण यह घोषणा भी मात्र घोषणा ही बनकर रह गई है।
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कौन चलाता है सैनिक स्कूल
सैनिक सोसायटी की ओर से जारी एडेड स्कूल होता है, जो सीबीएसई द्वारा मान्यता प्राप्त होता है। इसका प्रबंधन आर्मी अधिकारी देखते हैं। प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक का अधिकारी होता है, जबकि अध्यापक और प्रवक्ता भी आर्मी एजूकेशन विभाग से लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के होते हैं, जो विद्यार्थियों को एनडीए की कोचिंग देते हैं। ऐसा माना जाता है कि सबसे अधिक लेफ्टिनेंट सैनिक स्कूलों के विद्यार्थी बनते हैं। यह स्कूल कक्षा छठी से 12वीं तक होता है। 11 व 12वीं कक्षा में केवल नॉन मेडिकल संकाय होता है।
देश में हैं पांच महिला सैनिक स्कूल, हरियाणा में एक भी नहीं
वर्तमान में देश में पांच महिला सैनिक स्कूल चल रहे हैं। इनमें चंद्रपुर (महाराष्ट्र), बीजापुर (कर्नाटक), कोडागु (कर्नाटका), कलिकिरी (आंध्र प्रदेश) और घोड़ाखाल (उत्तराखंड) स्थित सैनिक स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों में पहली बार 2020 में दाखिले हुए थे। इससे पहले केवल पुरुष सैनिक स्कूल ही होते थे। हरियाणा में एक भी महिला सैनिक स्कूल नहीं है।
जिले में हैं लगभग 33 हजार सैनिक परिवार
सैनिक बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार जिले में लगभग 21 हजार पूर्व सैनिक हैं। जिनमें 20 हजार से अधिक आर्मी, लगभग 380 नेवी, 330 एयरफोर्स से सेवानिवृत्त हैं। वर्तमान में जिले के अंदर लगभग 12 हजार जवान अलग-अलग सेना में ड्यूटी कर रहे हैं। इस हिसाब से जिले में लगभग 33 हजार सैनिक परिवार हैं। यहीं नहीं, इस देश की रक्षा करते हुए लगभग 190 जवानों ने शहादत दी है। अवॉर्ड की बात करें तो दो विक्टोरिया क्रॉस अवॉर्ड, दो मिलिट्री क्रॉस, एक अशोक चक्र, दो कीर्ति चक्र, 10 वीर चक्र, 12 शौर्य चक्र, 45 सेना मेडल व दो नौसेना मेडल से यहां के जवानों को सम्मानित किया जा चुका है।
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शुरुआत में यह मामला पूर्व मंत्री रामबिलास शर्मा ने तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के सामने रखा था। उसके बाद क्षेत्र के किसी नेता ने यह मांग नहीं उठाई है। मंगलवार को महिला दिवस पर सरकार अपना आठवां आम बजट पेश करेगी। महिला दिवस पर पेश हो रहे बजट से लोगों को उम्मीद है कि जिले को महिला सैनिक स्कूल की सौगात मिल जाए। प्रदेश सरकार बजट में महिला सैनिक स्कूल के लिए अपने हिस्से का बजट जारी कर केंद्र सरकार से इसकी सिफारिश करे।
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बता दें कि 22 मार्च 2016 को भाजपा सरकार ने अपना दूसरा आम बजट पेश किया था। उस बजट में तत्कालीन शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने गांव खुडाना में महिला सैनिक स्कूल खोलने की घोषणा की थी। घोषणा करने के बाद एक बार लगा था कि अहीरवाल की बेटियां भी अपने पिता एवं दादा की तरह सेना में अधिकारी बनकर अपना सपना साकार कर सकेंगी. छह वर्ष बीत गया लेकिन अभी तक इस प्रोजेक्ट को लेकर कोई पत्राचार भी नहीं हुआ। सबसे बड़ी बात यह की जन सरोकार के मुद्दों को लेकर एक दूसरे को घेरने वाले पक्ष-विपक्ष के नेताओं ने भी यह मामला कभी नहीं उठाया। इसी कारण यह घोषणा भी मात्र घोषणा ही बनकर रह गई है।
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कौन चलाता है सैनिक स्कूल
सैनिक सोसायटी की ओर से जारी एडेड स्कूल होता है, जो सीबीएसई द्वारा मान्यता प्राप्त होता है। इसका प्रबंधन आर्मी अधिकारी देखते हैं। प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक का अधिकारी होता है, जबकि अध्यापक और प्रवक्ता भी आर्मी एजूकेशन विभाग से लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के होते हैं, जो विद्यार्थियों को एनडीए की कोचिंग देते हैं। ऐसा माना जाता है कि सबसे अधिक लेफ्टिनेंट सैनिक स्कूलों के विद्यार्थी बनते हैं। यह स्कूल कक्षा छठी से 12वीं तक होता है। 11 व 12वीं कक्षा में केवल नॉन मेडिकल संकाय होता है।
देश में हैं पांच महिला सैनिक स्कूल, हरियाणा में एक भी नहीं
वर्तमान में देश में पांच महिला सैनिक स्कूल चल रहे हैं। इनमें चंद्रपुर (महाराष्ट्र), बीजापुर (कर्नाटक), कोडागु (कर्नाटका), कलिकिरी (आंध्र प्रदेश) और घोड़ाखाल (उत्तराखंड) स्थित सैनिक स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों में पहली बार 2020 में दाखिले हुए थे। इससे पहले केवल पुरुष सैनिक स्कूल ही होते थे। हरियाणा में एक भी महिला सैनिक स्कूल नहीं है।
जिले में हैं लगभग 33 हजार सैनिक परिवार
सैनिक बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार जिले में लगभग 21 हजार पूर्व सैनिक हैं। जिनमें 20 हजार से अधिक आर्मी, लगभग 380 नेवी, 330 एयरफोर्स से सेवानिवृत्त हैं। वर्तमान में जिले के अंदर लगभग 12 हजार जवान अलग-अलग सेना में ड्यूटी कर रहे हैं। इस हिसाब से जिले में लगभग 33 हजार सैनिक परिवार हैं। यहीं नहीं, इस देश की रक्षा करते हुए लगभग 190 जवानों ने शहादत दी है। अवॉर्ड की बात करें तो दो विक्टोरिया क्रॉस अवॉर्ड, दो मिलिट्री क्रॉस, एक अशोक चक्र, दो कीर्ति चक्र, 10 वीर चक्र, 12 शौर्य चक्र, 45 सेना मेडल व दो नौसेना मेडल से यहां के जवानों को सम्मानित किया जा चुका है।