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सतत विकास के लिए महिला सशक्तिकरण जरूरी : प्रो. टंकेश्वर

Thu, 28 Mar 2024 02:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 28 Mar 2024 02:12 AM IST
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Women empowerment is necessary for sustainable development: Prof. Tankeshwar
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) महेंद्रगढ़ में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) नई दिल्ली की ओर से वित्त पोषित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार की शुरुआत हुई। महिला सशक्तिकरण और सतत विकास मेघालय व हरियाणा के संदर्भ में एक तुलनात्मक अध्ययन विषय पर केंद्रित इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (यूसीएमटी), मेघालय व त्रिपुरा बेंबु एंड केन डेवलपमेंट सेंटर के सहयोग से आयोजित इस सेमिनार के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. पीसी जोशी, अतिथि वक्ता हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रो. आभा चौहान, पंजाब यूनिवर्सिटी चंंडीगढ़ की प्रो. राजेश गिल व मुख्य वक्ता के रूप में यूसीटीएम के प्रो. अब्दुल मतीन उपस्थित रहे।
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विश्वविद्यालय की प्रथम महिला प्रो. सुनीता श्रीवास्तव भी उपस्थित रहीं। विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि शोध का विषय बेहद महत्त्वपूर्ण है और अवश्य ही आयोजन में सम्मिलित विशेषज्ञों के माध्यम से इस विषय को और बारीकी से समझा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि सतत विकास के लिए महिला सशक्तिकरण आवश्यक है। प्रो. टंकेश्वर कुमार ने कहा कि महिला-पुरुष के बीच समानता स्थापित करने हेतु आवश्यक है कि शिक्षा के मोर्चे से लेकर सामाजिक व आर्थिक विकास के स्तर पर बदलाव किए जाएं। यूसीएमटी के कुलपति प्रो. जीडी शर्मा ने अपने संबोधन में विशेष रूप से हरियाणा व मेघालय पर केंद्रित इस आयोजन के संदर्भ में कहा कि दोनों ही स्थानों पर भौगोलिक, सांस्कृतिक, सामाजिक स्तर पर भारी अंतर देखने को मिलता है और अवश्य ही यह शोध कार्य उल्लेखनीय बदलावों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
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मुख्य वक्ता प्रो. पीसी जोशी ने भारत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में दिखने वाली विविधता अपने आप में अद्वितीय है। यह शोध कार्य भी ऐसी ही दो विविधताओं वाले राज्यों पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि खानपान से लेकर जीविकापार्जन व सांस्कृतिक मोर्चे पर हरियाणा, मेघालय में भारी अंतर देखने को मिलता है। अवश्य ही इस शोध के माध्यम से इस विषय से जुड़े विभिन्न पहलु सामने आएंगे। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण हेतु आवश्यक प्रयासों पर भी विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया। प्रो. आभा चौहान ने महिला सशक्तिकरण को आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक व कानूनी पक्षों से जोड़ते हुए अपनी बात रखी और महिला सशक्तिकरण के स्तर पर आवश्यक बदलावों पर जोर दिया। प्रो. राजेश गिल ने हरियाणा, मेघालय के स्तर पर महिलाओं की स्थिति पर अपनी बात रखते हुए समान व्यवस्था विकसित करने की बात कही। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता प्रो. अब्दुल मतीन ने जीविकापार्जन के माध्यम से महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित अपना व्याख्यान दिया और बताया कि किस तरह से उत्तर पूर्व में महिलाएं घर के मुखिया के रूप सशक्त रूप से सक्रिय हैं। समाजशास्त्र विभाग की शिक्षक प्रभारी डॉ. टी. लोंग्कोई ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। मंच का संचालन विभाग की सहायक आचार्य डॉ. तनवी भाटी व यूएसटीएम की डॉ. कुघाटोली आय ने किया। इस अवसर पर प्रो. पायल चंदेल, प्रो. आनंद शर्मा, डॉ. राजेंद्र प्रसाद मीणा, डॉ. अमन वर्मा, डॉ. रेनु यादव, डॉ. रश्मि तंवर, डॉ. पवन कुमार, डॉ. अरविंद तेजावत, डॉ. अभिरंजन सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, विद्यार्थी व शोधार्थी उपस्थित रहे।
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