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मौसम ने लिया यू टर्न, किसान खुश
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Jan 2017 12:03 AM IST
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मौसम ने लिया यूटर्न
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मौसम ने फिर से यू टर्न लिया है। गत सात व आठ जनवरी को प्रदेश के कई जगहों पर हुई बरसात व ओलावृष्टि के बाद दो-तीन दिन पहले न्यूनतम तापमान अचानक माइनस पर चला गया था लेकिन पिछले दो दिनों से बादल छाये रहने के कारण न्यूनतम तापमान में भी बढ़ोत्तरी हुई है जिससे फसलों को भी नुकसान होने की संभावना भी कम हो गई है। वहीं सोमवार को दिनभर बादलों व सूर्य देव की आंख मिचौनी चलती रही। बादलों के कारण सूर्य देव की चमक भी तेज नहीं रही।
इस तरह से मौसम बदलाव के दिन के समय लोगों को सर्दी का अहसास हुआ तथा ठंडी हवाएं भी चली वहीं मौसम के इस बदलते मिजाज से किसान खुश हैं तथा अब बादलों के बाद बरसात के लिए टकटकी लगाए हुए हैं। किसानों का कहना है कि अगर एक बार बरसात हो जाती है तो किसानों के लिए सोना बरसेगा। जिले में इस बार अक्तूबर माह के बाद अभी तक बरसात नहीं हुई है। जिसके कारण हजारों किसानों की फसलें खराब होने के कगार पर है।
इस बार जनवरी माह के आरंभ में सर्दियों के मौसम होते हुए भी गर्मी का अहसास हो रहा था और तापमान 20 डिग्री के आसपास चल रहा था। सात आठ जनवरी को पहाड़ी क्षेत्रों में हिमपात हुआ तथा मैदानी इलाकों में कहीं बरसात तो कहीं ओलावृष्टि हुई। जिसके बाद से मौसम ने अचानक करवट बदल ली तथा न्यूनतम तापमान माइनस 0.5 तक तथा अधिकतम तापमान भी 15 डिग्री तक रिकार्ड किया गया। जिसकी वजहह से किसानों को अपनी फसल खराब होने का डर सताने लगा था। लेकिन अब शनिवार शाम से फिर से क्षेत्र में बादल छाए हुए हैं। रविवार को भी दिन के समय बादल छाए रहे तथा सोमवार को दिनभर बादल छाये व शीत लहर चली। जिसके कारण न्यूनतम तापमान में दो दिनों से फिर वृद्धि देखी जा रही है। इससे किसानों की फसलों को बचाव होने की संभावना है। वहीं बादलों की वजह से किसानों के चेहरों पर रौनक है।
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बारिश के इंतजार में किसान
इस बार अक्तूबर माह के बाद बरसात नहीं हुई है। ऐसे में किसानों बरसात का इंतजार तीन माह से है, बरसात न होने के कारण किसान परेशान होने लगे हैं। मिर्जापुर के किसान हरिकिशन बाछौद के पवन कुमार, जयप्रकाश, नीरपुर के सुनील कुमार, रामौतार आदि का कहना है कि इस बार रबी की फसल के मौसम में एक बार भी बरसात नहीं हुई है। कई बार दो से तीन बार जनवरी माह में बरसात हो जाती है। जिससे फसल अच्छी हो जाती है, मगर इस बार बरसात न होने के कारण फसल अच्छा पैदावार नहीं देगी। किसानों का कहना है कि अगर अभी भी बरसात होती है तो फसलों को फायदा हो जाएगा।
किसानों को सताने लगी फसलों की चिंता
इस मौसम के कारण लोगों का हाल बेहाल है। वहीं किसानों को अपनी फसलों की चिंता सताने लगी थी। किसानों का कहना है कि यदि मौसम का यही हाल रहा तो उनकी पूरे साल की मेहनत खराब हो जाएगी।
नहीं हैं सिंचाई के पर्याप्त संसाधन
महेंद्रगढ़ कृषि प्रधान जिला है। इस जिले में रबी फसल के दौरान सरसों, गेहूं, जौ एवं चना की फसलें प्रमुखता से ली जा जाती है। कृषि योग्य उपजाऊ जमीन होने के बावजूद सिंचाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण किसानों को अक्सर बरसात पर ही निर्भर रहना पड़ता है। बरसात में साल-दर-साल गिरावट आती जा रही है और कृषि योग्य उपजाऊ जमीन का रकबा घटता जा रहा है। अबकी बार रबी फसल के दौरान किसानों को बरसात की कमी बेहद खली है। इलाके में पिछले करीब चार महीनों से कोई बरसात नहीं हुई है। इसी का परिणाम रहा कि सिंचाई के अभाव में अंतिम दिनों में खरीफ फसल पूरी तरह पक नहीं पाई थी और किसानों को भारी नुकसान हो रहा था।
प्रमुख फसल मानी जाती है रबी की फसल
क्षेत्र में रबी की फसल प्रमुख फसल मानी जाती है। यहां पर सरसों व गेहूं की फसल ही मुख्य फसल मानी जाती है। यहां के किसानों का शादी-ब्याह व अन्य सभी कामकाज इसी फसल के बाद होते हैं।
पारा माइनस में जाने से खराब होने लगी थी फसलें
जिला में पारा दो दिनों तक 11 व 12 जनवरी को माइनस 0.5 डिग्री सेल्सियस रहा है। वहीं 13 जनवरी को न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस रहा था। इससे रबी की प्रमुख फसलों में चने की फसल के अलावा सरसों की फसल में नुकसान होने लग गया था। वहीं सब्जियों में बैंगन, टमाटर व मटर की फसल को भी नुकसान हो रहा था।
इस बार रबी फसल के समय बरसात नहीं हुई है। अब बादल छाने से थोड़ी उम्मीद बंधी है। अगर बरसात हो जाए तो सोने पर सुहागा होगा। -विजय सिंह, भूंगारका
आसमान में एक सप्ताह पूर्व भी बादल छाये थे, उससे केवल ठंड बढ़कर रह गई। बरसात नहीं हुई, ठंड बढने से फसलों को खतरा है। इसलिए बरसात जरूरी है।-ज्ञानीराम, बिगोपुर
मैंने चने व सरसों की फसल बोई है। यहां पानी की कमी है इसलिए किसान बरसात पर निर्भर हैं। बरसात होने पर किसानों को लाभ पहुंचेगा।-हसंराज, किसान
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इस तरह से मौसम बदलाव के दिन के समय लोगों को सर्दी का अहसास हुआ तथा ठंडी हवाएं भी चली वहीं मौसम के इस बदलते मिजाज से किसान खुश हैं तथा अब बादलों के बाद बरसात के लिए टकटकी लगाए हुए हैं। किसानों का कहना है कि अगर एक बार बरसात हो जाती है तो किसानों के लिए सोना बरसेगा। जिले में इस बार अक्तूबर माह के बाद अभी तक बरसात नहीं हुई है। जिसके कारण हजारों किसानों की फसलें खराब होने के कगार पर है।
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इस बार जनवरी माह के आरंभ में सर्दियों के मौसम होते हुए भी गर्मी का अहसास हो रहा था और तापमान 20 डिग्री के आसपास चल रहा था। सात आठ जनवरी को पहाड़ी क्षेत्रों में हिमपात हुआ तथा मैदानी इलाकों में कहीं बरसात तो कहीं ओलावृष्टि हुई। जिसके बाद से मौसम ने अचानक करवट बदल ली तथा न्यूनतम तापमान माइनस 0.5 तक तथा अधिकतम तापमान भी 15 डिग्री तक रिकार्ड किया गया। जिसकी वजहह से किसानों को अपनी फसल खराब होने का डर सताने लगा था। लेकिन अब शनिवार शाम से फिर से क्षेत्र में बादल छाए हुए हैं। रविवार को भी दिन के समय बादल छाए रहे तथा सोमवार को दिनभर बादल छाये व शीत लहर चली। जिसके कारण न्यूनतम तापमान में दो दिनों से फिर वृद्धि देखी जा रही है। इससे किसानों की फसलों को बचाव होने की संभावना है। वहीं बादलों की वजह से किसानों के चेहरों पर रौनक है।
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बारिश के इंतजार में किसान
इस बार अक्तूबर माह के बाद बरसात नहीं हुई है। ऐसे में किसानों बरसात का इंतजार तीन माह से है, बरसात न होने के कारण किसान परेशान होने लगे हैं। मिर्जापुर के किसान हरिकिशन बाछौद के पवन कुमार, जयप्रकाश, नीरपुर के सुनील कुमार, रामौतार आदि का कहना है कि इस बार रबी की फसल के मौसम में एक बार भी बरसात नहीं हुई है। कई बार दो से तीन बार जनवरी माह में बरसात हो जाती है। जिससे फसल अच्छी हो जाती है, मगर इस बार बरसात न होने के कारण फसल अच्छा पैदावार नहीं देगी। किसानों का कहना है कि अगर अभी भी बरसात होती है तो फसलों को फायदा हो जाएगा।
किसानों को सताने लगी फसलों की चिंता
इस मौसम के कारण लोगों का हाल बेहाल है। वहीं किसानों को अपनी फसलों की चिंता सताने लगी थी। किसानों का कहना है कि यदि मौसम का यही हाल रहा तो उनकी पूरे साल की मेहनत खराब हो जाएगी।
नहीं हैं सिंचाई के पर्याप्त संसाधन
महेंद्रगढ़ कृषि प्रधान जिला है। इस जिले में रबी फसल के दौरान सरसों, गेहूं, जौ एवं चना की फसलें प्रमुखता से ली जा जाती है। कृषि योग्य उपजाऊ जमीन होने के बावजूद सिंचाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होने के कारण किसानों को अक्सर बरसात पर ही निर्भर रहना पड़ता है। बरसात में साल-दर-साल गिरावट आती जा रही है और कृषि योग्य उपजाऊ जमीन का रकबा घटता जा रहा है। अबकी बार रबी फसल के दौरान किसानों को बरसात की कमी बेहद खली है। इलाके में पिछले करीब चार महीनों से कोई बरसात नहीं हुई है। इसी का परिणाम रहा कि सिंचाई के अभाव में अंतिम दिनों में खरीफ फसल पूरी तरह पक नहीं पाई थी और किसानों को भारी नुकसान हो रहा था।
प्रमुख फसल मानी जाती है रबी की फसल
क्षेत्र में रबी की फसल प्रमुख फसल मानी जाती है। यहां पर सरसों व गेहूं की फसल ही मुख्य फसल मानी जाती है। यहां के किसानों का शादी-ब्याह व अन्य सभी कामकाज इसी फसल के बाद होते हैं।
पारा माइनस में जाने से खराब होने लगी थी फसलें
जिला में पारा दो दिनों तक 11 व 12 जनवरी को माइनस 0.5 डिग्री सेल्सियस रहा है। वहीं 13 जनवरी को न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस रहा था। इससे रबी की प्रमुख फसलों में चने की फसल के अलावा सरसों की फसल में नुकसान होने लग गया था। वहीं सब्जियों में बैंगन, टमाटर व मटर की फसल को भी नुकसान हो रहा था।
इस बार रबी फसल के समय बरसात नहीं हुई है। अब बादल छाने से थोड़ी उम्मीद बंधी है। अगर बरसात हो जाए तो सोने पर सुहागा होगा। -विजय सिंह, भूंगारका
आसमान में एक सप्ताह पूर्व भी बादल छाये थे, उससे केवल ठंड बढ़कर रह गई। बरसात नहीं हुई, ठंड बढने से फसलों को खतरा है। इसलिए बरसात जरूरी है।-ज्ञानीराम, बिगोपुर
मैंने चने व सरसों की फसल बोई है। यहां पानी की कमी है इसलिए किसान बरसात पर निर्भर हैं। बरसात होने पर किसानों को लाभ पहुंचेगा।-हसंराज, किसान