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Mahendragarh-Narnaul News: 525 एकड़ जमीन के बदले दो गांवो को हकेंवि में मिली 1-1 आरक्षित सीट
Mon, 13 Mar 2023 11:44 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Mon, 13 Mar 2023 11:44 PM IST
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कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार का आभार व्यक्त करते ग्रामीण।
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेंवि) जाट पाली की स्थापना के समय से ही दाखिलों में आरक्षण की मांग को लेकर आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा विगत 13 वर्षों से आंदोलन चला आ रहा था। विश्वविद्यालय के कुलपति टकेश्वर कुमार के प्रयत्नों से दोनों गांव के लिए एक-एक सीट दाखिलों में आरक्षित कर दी गई है। यह ग्रामीणों के संघर्ष की जीत है। वहीं कुलपति द्वारा इस क्षेत्र के हितों को ध्यान में रखकर जो पहल की गई वह सराहनीय कदम है
आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कैलाश पाली ने ग्रामीणों की यह मांग पूरी होने पर विश्वविद्यालय प्रशासन और विशेष रूप से कुलपति टकेश्वर कुमार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के शिलान्यास के समय नींव रखने आए केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह के सामने ग्रामीणों का मांग पत्र नहीं रखा। इसके कारण जो आरक्षण जमीन के बदले ग्रामीणों को मिलना था उससे स्थानीय लोग वंचित हो गए। इसके तुरंत उपरांत ग्रामीणों ने दाखिलों और नौकरियों में आरक्षण के लिए एक संघर्ष समिति का गठन किया। जिसका नेतृत्व स्वर्गीय रणवीर सिंह द्वारा किया गया।
2 जुलाई 2012 से 12 सितंबर 2012 तक ग्रामीणों ने विश्वविद्यालय के सामने 74 दिन का धरना दिया। इसके बाद राव इंद्रजीत सिंह की पहल पर उस समय के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने ग्रामीणों को बातचीत के लिए बुलाया। लेकिन बातचीत असफल रही और गतिरोध के चलते 12 दिसम्बर 2012 को जंतर मंतर पर जाट पाली के ग्रामीणों ने धरना दिया। वर्तमान केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह भूपेंद्र यादव और राव इंद्रजीत सिंह ने ग्रामीणों का समर्थन किया। लेकिन लगातार स्थानीय नेताओं की अनदेखी के कारण यह मांग सिरे नहीं चढ़ पाई।
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2014 में मलखान सिंह के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल स्मृति ईरानी से मिला और अपनी मांगे रखी लेकिन फिर भी बात नहीं बनी। तदुपरांत कैलाश पाली के नेतृत्व में प्रकाश जावेडकर व सांसद चौधरी धर्मवीर सिंह को भी अपनी मांगों से ग्रामीणों ने अवगत कराया कि दोनों गांवों की 525 एकड़ जमीन ग्रामीणों द्वारा निशुल्क में विश्व विद्यालय को प्रदान की गई है। लेकिन ग्रामीणों को इसका कोई फायदा नही मिला। उन्होंने सकारात्मक रुख अपनाया लेकिन ग्रामीणों को हक नही मिला। लंबे संघर्ष के बाद अब जाकर ग्रामीणों की यह मांग पूरी हुई है जिसमें विशेष अधिकार के तहत दोनों गांव के ग्रामीणों के लिए दाखिलों में एक-एक सीट आरक्षित कर दी गई है।
कैलाश पाली ने बताया की इस संघर्ष मैं सक्रिय भूमिका निभाने वाले दो ग्रामीण रणवीर सिंह रामकिशन स्वर्गवासी हो चुके हैं। पाली-जाट के ग्रामीणों को जो यह आरक्षण मिला उसके लिए इन दोनों के योगदान को कभी भी नहीं भुलाया जा सकता है।
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आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कैलाश पाली ने ग्रामीणों की यह मांग पूरी होने पर विश्वविद्यालय प्रशासन और विशेष रूप से कुलपति टकेश्वर कुमार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के शिलान्यास के समय नींव रखने आए केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह के सामने ग्रामीणों का मांग पत्र नहीं रखा। इसके कारण जो आरक्षण जमीन के बदले ग्रामीणों को मिलना था उससे स्थानीय लोग वंचित हो गए। इसके तुरंत उपरांत ग्रामीणों ने दाखिलों और नौकरियों में आरक्षण के लिए एक संघर्ष समिति का गठन किया। जिसका नेतृत्व स्वर्गीय रणवीर सिंह द्वारा किया गया।
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2 जुलाई 2012 से 12 सितंबर 2012 तक ग्रामीणों ने विश्वविद्यालय के सामने 74 दिन का धरना दिया। इसके बाद राव इंद्रजीत सिंह की पहल पर उस समय के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने ग्रामीणों को बातचीत के लिए बुलाया। लेकिन बातचीत असफल रही और गतिरोध के चलते 12 दिसम्बर 2012 को जंतर मंतर पर जाट पाली के ग्रामीणों ने धरना दिया। वर्तमान केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह भूपेंद्र यादव और राव इंद्रजीत सिंह ने ग्रामीणों का समर्थन किया। लेकिन लगातार स्थानीय नेताओं की अनदेखी के कारण यह मांग सिरे नहीं चढ़ पाई।
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2014 में मलखान सिंह के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल स्मृति ईरानी से मिला और अपनी मांगे रखी लेकिन फिर भी बात नहीं बनी। तदुपरांत कैलाश पाली के नेतृत्व में प्रकाश जावेडकर व सांसद चौधरी धर्मवीर सिंह को भी अपनी मांगों से ग्रामीणों ने अवगत कराया कि दोनों गांवों की 525 एकड़ जमीन ग्रामीणों द्वारा निशुल्क में विश्व विद्यालय को प्रदान की गई है। लेकिन ग्रामीणों को इसका कोई फायदा नही मिला। उन्होंने सकारात्मक रुख अपनाया लेकिन ग्रामीणों को हक नही मिला। लंबे संघर्ष के बाद अब जाकर ग्रामीणों की यह मांग पूरी हुई है जिसमें विशेष अधिकार के तहत दोनों गांव के ग्रामीणों के लिए दाखिलों में एक-एक सीट आरक्षित कर दी गई है।
कैलाश पाली ने बताया की इस संघर्ष मैं सक्रिय भूमिका निभाने वाले दो ग्रामीण रणवीर सिंह रामकिशन स्वर्गवासी हो चुके हैं। पाली-जाट के ग्रामीणों को जो यह आरक्षण मिला उसके लिए इन दोनों के योगदान को कभी भी नहीं भुलाया जा सकता है।