{"_id":"67a4fd6a01d1b0444203044d","slug":"urban-population-will-not-face-shortage-of-drinking-water-for-15-years-narnol-news-c-203-1-sroh1010-115043-2025-02-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: 15 साल तक शहरी आबादी को नहीं होगी पेयजल की कमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: 15 साल तक शहरी आबादी को नहीं होगी पेयजल की कमी
Thu, 06 Feb 2025 11:50 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 06 Feb 2025 11:50 PM IST
विज्ञापन
फोटो संख्या:60- देवास के जलघर के टैंक नंबर एक में भरा पानी--संवाद
- फोटो : संवाद
महेंद्रगढ़। महेंद्रगढ़ शहर की आबादी को 15 साल तक अब पेयजल की किल्लत नहीं होगी। जन स्वास्थ्य विभाग जल्द ही 19.18 करोड़ रुपये की लागत से गांव देवास और चितलांग की भूमि पर 12 करोड़ लीटर पानी की क्षमता के दो वाटर टैंक बनाएगा।
जिम्मेदारों का दावा है कि एक माह के समय में काम शुरू कर दिया जाएगा। यह परियोजना पूरी होने के बाद जन स्वास्थ्य विभाग के पास कुल 36 करोड़ लीटर पानी स्टोरेज की क्षमता होगी। इस समय शहर की करीब 50 हजार की आबादी को गांव देवास स्थित 24 करोड़ लीटर है क्षमता वाली जल परियोजना से जलापूर्ति हो रही है। नहरी पानी आधारित चार टैंकों के माध्यम से शहरी आबादी को एक माह में 15 दिन ही नियमित पेयजल आपूर्ति हो पाती है।
15 दिन बाद पानी की राशनिंग करनी पड़ती है। वहीं यदि नहरी पानी आने में कुछ देरी होती है तो पानी की राशनिंग का समय भी बढ़ा दिया जाता है। गांव देवास स्थित जल परियोजना के तहत वर्षों पूर्व छह-छह करोड़ लीटर पानी की क्षमता के चार टैंक बनाए गए थे। नहरी पानी पर आधारित यह परियोजना वर्तमान आबादी को महीन में प्रतिदिन पेयजल आपूर्ति में नाकाफी है।
विज्ञापन
गांव देवास व चितलांग की भूमि पर करीब दस एकड़ में अब छह-छह करोड़ लीटर पानी की क्षमता के दो नए टैंक बनाए जाएंगे। यह परियोजना 15 सालों में बढ़ने वाली आबादी को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। अब जन स्वास्थ्य विभाग के पास शहरी आबादी को नियमित पेयजल आपूर्ति के लिए छह-छह करोड़ लीटर पानी की क्षमता के छह टैंक हो जाएंगे। कुल पेयजल की क्षमता भी 12 करोड़ लीटर बढ़कर 36 करोड़ लीटर हो जाएगी जो शहरी आबादी की 15 सालों तक प्यास बुझाने में सक्षम है। सालों पूर्व गांव देवास में बने जलघर को वर्ष 2011 की जनगणना के हिसाब से महज 39 हजार की आबादी के लिए तैयार किया गया था, लेकिन 15 सालों में आबादी भी बढ़कर 50 हजार से अधिक पहुंच गई है। इसके कारण विभाग का पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था गड़बड़ा रही थी। लेकिन यह परियोजना पूरी होने के बाद शहरी आबादी को पेयजल की कमी नहीं होगी। संवाद
-- -- -- -- -- -- -- -
- वर्जन:
परियोजना के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। प्रदेश सरकार की ओर से बजट की भी स्वीकृति दी जा चुकी है। एक माह में काम शुरू कराने के लिए तैयारी की जा रही हैं। परियोजना पूरी होने के बाद शहर में पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा।
-- - दीपचंद, कनिष्ठ अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग महेंद्रगढ़।
विज्ञापन
जिम्मेदारों का दावा है कि एक माह के समय में काम शुरू कर दिया जाएगा। यह परियोजना पूरी होने के बाद जन स्वास्थ्य विभाग के पास कुल 36 करोड़ लीटर पानी स्टोरेज की क्षमता होगी। इस समय शहर की करीब 50 हजार की आबादी को गांव देवास स्थित 24 करोड़ लीटर है क्षमता वाली जल परियोजना से जलापूर्ति हो रही है। नहरी पानी आधारित चार टैंकों के माध्यम से शहरी आबादी को एक माह में 15 दिन ही नियमित पेयजल आपूर्ति हो पाती है।
विज्ञापन
15 दिन बाद पानी की राशनिंग करनी पड़ती है। वहीं यदि नहरी पानी आने में कुछ देरी होती है तो पानी की राशनिंग का समय भी बढ़ा दिया जाता है। गांव देवास स्थित जल परियोजना के तहत वर्षों पूर्व छह-छह करोड़ लीटर पानी की क्षमता के चार टैंक बनाए गए थे। नहरी पानी पर आधारित यह परियोजना वर्तमान आबादी को महीन में प्रतिदिन पेयजल आपूर्ति में नाकाफी है।
विज्ञापन
गांव देवास व चितलांग की भूमि पर करीब दस एकड़ में अब छह-छह करोड़ लीटर पानी की क्षमता के दो नए टैंक बनाए जाएंगे। यह परियोजना 15 सालों में बढ़ने वाली आबादी को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। अब जन स्वास्थ्य विभाग के पास शहरी आबादी को नियमित पेयजल आपूर्ति के लिए छह-छह करोड़ लीटर पानी की क्षमता के छह टैंक हो जाएंगे। कुल पेयजल की क्षमता भी 12 करोड़ लीटर बढ़कर 36 करोड़ लीटर हो जाएगी जो शहरी आबादी की 15 सालों तक प्यास बुझाने में सक्षम है। सालों पूर्व गांव देवास में बने जलघर को वर्ष 2011 की जनगणना के हिसाब से महज 39 हजार की आबादी के लिए तैयार किया गया था, लेकिन 15 सालों में आबादी भी बढ़कर 50 हजार से अधिक पहुंच गई है। इसके कारण विभाग का पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था गड़बड़ा रही थी। लेकिन यह परियोजना पूरी होने के बाद शहरी आबादी को पेयजल की कमी नहीं होगी। संवाद
- वर्जन:
परियोजना के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। प्रदेश सरकार की ओर से बजट की भी स्वीकृति दी जा चुकी है। एक माह में काम शुरू कराने के लिए तैयारी की जा रही हैं। परियोजना पूरी होने के बाद शहर में पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा।

फोटो संख्या:60- देवास के जलघर के टैंक नंबर एक में भरा पानी--संवाद- फोटो : संवाद