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मृतक के नाम जारी किया ट्यूबवेल कनेक्शन
ब्यूरो/अमर उजाला नारनाैल
Updated Fri, 29 May 2015 12:49 AM IST
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बिजली निगम की कार्यशैली और लापरवाही के भी क्या कहने। बिजली निगम ने ऐसा कारनामा कर दिखाया जो नामुमकिन है। विभाग ने एक व्यक्ति की मौत के एक साल बाद उसके हस्ताक्षर लेकर उसके नाम ट्यूबवेल कनेक्शन जारी कर दिया। निगम की लापरवाही यहीं नहीं खत्म हुई।
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इसके बाद निगम ने मृतक के परिवार से मीटर खरीदवाया व उसे किसी और उपभोक्ता को सौंप दिया। इस मीटर का बिल मृतक के घर आना शुरू हुआ। मामले की शिकायत अधिकारियों को दी, पर विधवा की कहीं नहीं सुनी गई। मृतक महेंद्र सिंह की पत्नी सुमित्रा देवी गांव गाहड़ा ने बताया कि उन्होंने गांव जाट में जमीन ली हुई है वहां पर उसे कुआं बनाना था।
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इसके लिए 2008 में दक्षिण हरियाणा विद्युत निगम के महेंद्रगढ़ कार्यालय में फाइल लगाई थी। जिसमें उन्होंने सारे दस्तावेज और सिक्योरिटी आदि जमा करवा दी थी लेकिन काफी दिन बीत जाने पर उनकी फाइल पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इसके लिए वह तत्कालीन एसडीओ से मिली और एसडीओ ने जेई के नाम रिमॉर्क कर दी। उन्होंने जेई पर आरोप लगाया कि जेई ने उनके इस कार्य पर कोई ध्यान नहीं दिया।
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वह बिजली मीटर लगवाने के लिए चक्कर काटती रही लेकिन उनकी किसी ने भी सुनवाई नहीं की। उन्होंने बताया कि 7 वर्ष बीत जाने के बाद भी उनके कुएं पर मीटर नहीं लगा जबकि बिजली विभाग ने लगभग 25 हजार का बिजली बिल उनको थमा दिया। उसने बताया कि बिजली निगम उसका बार-बार चक्कर लगवा रहा है जिससे उसका आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक परेशानी होती है।
मृत व्यक्ति के नाम झूठा बिल
महिला ने बताया कि उसके पति की मौत सिविल अस्पताल कनीना के डेथ सर्टिफिकेट के अनुसार 2009 में हो चुकी है। लेकिन बिजली विभाग के कर्मचारियों ने उनके पति महेंद्र सिंह के नाम 2010 में कागजों में मीटर दिखा दिया लेकिन वास्तविकता यह है कि उनके कुएं पर कोई मीटर ही नहीं है। सुमित्रा ने तत्कालीन जेई पर आरोप लगाया कि उसने कागजों पर उनके पति झूठे साइन किये हैं।
महिला ने बिजली बिल भरने से मना किया
महिला ने कहा कि जब उन्होंने विभाग की बिजली ही खर्च नहीं की तो वह किसी बात की बिल भरे। उन्होंने बताया कि वह अपने घर गांव गाहड़ा में रहती हैं तथा जाट गांव की सिम के पास उनका कुआं है जिससे वो बटाई पर दे देती हैं। बिजली निगम के एसडीओ नरेंद्र कुमार ने बताया कि मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं है अगर ऐसा है तो विभाग की बड़ी लापरवाही है। शुक्रवार को मामले की जांच करेंगे। जांच में जो दोषी पाया गया, उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।