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ठगों ने बदला साइबर क्राइम का तरीका
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बढ़ते डिजिटलकरण के दौर में साइबर जालसाजी करने वाले पुलिस के लिए चुनौती बन रहे है। जहां पहले ये बैंक कर्मचारी बनकर लोगों को ठगते थे। अब ये ट्रेवल एजेंट, फर्जी कंपनी मैनेजर, फर्जी लिंक, बार कोड, गूगल-पे, फोन-पे के माध्यम से लोगों को अपना शिकार बना रहे है। तकनीक के सहारे ये जालसाज देश के किसी भी कोने में बैठकर किसी को भी साझे में लेकर आसानी से उससे पैसे ठग लेते है। जिले में एक माह के दौरान दर्जनों मामले साइबर क्राइम के दर्ज किए गए है। जालसाज जितनी आसानी से लोगों को ठग रहे है उतनी आसानी से पुलिस इन तक नहीं पहुंच पा रही है।
जिले में भी इस वर्ष सैकड़ों लोग साइबर जालसाजों के झांसे में आकर ठगी के शिकार हो चुके हैं। नए-नए तरीके से जालसाजों द्वारा की जा रही ठगी ने जिला पुलिस की चुनौतियां भी बढ़ा दी है। इन मामले में जालसाजों ने लोगों से लाखों रुपये ठग लिये है। ऐसे में पुलिस द्वारा समय-समय जालसाजों के झांसे में आने से बचने के लिए एडवाइजरी जारी कर रही है। इससे लोगों में जागरूकता भी आई है। मगर जालसाज अब लोगों से बैंक कर्मचारी बनकर ओटीपी आदि नहीं बल्कि कंपनी मैनेजर, ट्रेवल एजेंट व रिस्तेदार बनकर झांसे में लेकर उनसे ठगी करने लगे है।
29 जुलाई को शिव कॉलोनी निवासी संजय अग्रवाल ने जालसाजों द्वारा कंपनी की फ्रेंचाइजी देने के नाम दो लाख रुपये ठगने की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। इसी प्रकार 2 अगस्त को कर्मचारी कॉलोनी में रह रहे जुनैद खान ने बिना किसी से ओपीटी शेयर किए खाते से 14986 रुपये निकलने, 10 अगस्त को शिवाजी नगर निवासी एक व्यक्ति ने परिचित बनकर 5 लाख रुपये ठगने, 11 अगस्त को मोहल्ला प्राणपुरा निवासी वीरेंद्र के फोन-पे के माध्यम से 30 हजार रुपये निकालने, 24 अगस्त को भूषण निवासी रवींद्र को झांसा देकर 1 लाख 20 रुपये ठगने, 27 अगस्त को नारहेडी निवासी सुरेंद्र सिंह को ट्रैक्टर देने के नाम पर 2 लाख 41 हजार ठगने, 30 अगस्त को परमानंद के खाते से दस हजार रुपये निकलने तथा 31 अगस्त को कैलाश नगर निवासी सुधीर कुमार की क्यू आर कोड के माध्यम से एक लाख रुपये खाते से निकालने की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
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जिले में साइबर क्राइम के लिए कोई थाना नहीं है। इतना जरूर है कि जिला मुख्यालय पर साइबर सेल का कार्यालय अलग से बनाया गया है जहां से ऐसे मामलों पर नजर रखी जाती है मगर साइबर सेल में सीमित संसाधन होने के कारण ऐसे अपराधियों तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। वहीं साइबर थानों में पर्याप्त संसाधन होने के साथ-साथ स्टाफ भी प्रशिक्षित होता है जोकि ऐसे मामले आते ही उनकी ट्रेसिंग कर धरपकड़ शुरू कर देते है।
जालसाज फेक ट्रेवल वेबसाइट या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन के जरिए लोगों से संपर्क करते हैं। मेक माई ट्रिप, एयर बीएनबी आदि ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म के नामों का आमतौर पर ऐसे विज्ञापनों, वेबसाइटों और सोशल मीडिया पेजों पर दुरुपयोग किया जाता है। साइबर अपराधी लोगों को तब झांसे में फंसाते हैं जब वे सोशल मीडिया पर प्रसारित नकली यात्रा विज्ञापनों का जवाब देते हैं। जालसाज लोगों से संपर्क करते हैं, एक ट्रेवल कंपनी या एक एयरलाइन से होने का दावा करते हैं। यात्रा पैकेजों पर अविश्वसनीय छूट प्रदान करते हैं। लोगों की बुकिंग प्रक्रिया के माध्यम से लिया जाता है और ऑनलाइन बैंकिंग विधियों के माध्यम से भुगतान लिया जाता है।
फोन पर या सोशल मीडिया या ई मेल के माध्यम से अच्छे यात्रा पैकेज की पेशकश करने वाले व्यक्ति की अच्छी तरह से जांच करें। वैद्यता के लिए ऐसे वेबसाइट यूआरएल की जांच करें और यदि डोमेन नामों में थोड़े से परिवर्तन द्वारा परिवर्तित किया गया है तो ऐसे वेबसाइट पर बुकिंग करने से बचें। कंपनी की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए ट्रेवल कंपनी और प्रदान किए पैकेज को पूरी तरह से ऑनलाइन खोजें। साइबर क्राइम डॉट जीओवी डॉट इन पोर्टल पर ऐसी किसी भी प्रकार की घटना की रिपोर्ट करें।
साइबर अपराध पर रोक लगाने के लिए पुलिस द्वारा समय-समय लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की जाती है। साइबर अपराध के मामलों पर नजर रखने के लिए साइबर सेल का अलग से कार्यालय बनाया गया है। हाल ही पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े मामले के एक आरोपित को गिरफ्तार किया गया है। ऐसे जालसाजों से बचने के लिए लोगों को भी जागरूक होना पड़ेगा तभी हम इस प्रकार ठगी से बच सकेंगे। -चंद्रमोहन, एसपी, नारनौल।
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जिले में भी इस वर्ष सैकड़ों लोग साइबर जालसाजों के झांसे में आकर ठगी के शिकार हो चुके हैं। नए-नए तरीके से जालसाजों द्वारा की जा रही ठगी ने जिला पुलिस की चुनौतियां भी बढ़ा दी है। इन मामले में जालसाजों ने लोगों से लाखों रुपये ठग लिये है। ऐसे में पुलिस द्वारा समय-समय जालसाजों के झांसे में आने से बचने के लिए एडवाइजरी जारी कर रही है। इससे लोगों में जागरूकता भी आई है। मगर जालसाज अब लोगों से बैंक कर्मचारी बनकर ओटीपी आदि नहीं बल्कि कंपनी मैनेजर, ट्रेवल एजेंट व रिस्तेदार बनकर झांसे में लेकर उनसे ठगी करने लगे है।
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29 जुलाई को शिव कॉलोनी निवासी संजय अग्रवाल ने जालसाजों द्वारा कंपनी की फ्रेंचाइजी देने के नाम दो लाख रुपये ठगने की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। इसी प्रकार 2 अगस्त को कर्मचारी कॉलोनी में रह रहे जुनैद खान ने बिना किसी से ओपीटी शेयर किए खाते से 14986 रुपये निकलने, 10 अगस्त को शिवाजी नगर निवासी एक व्यक्ति ने परिचित बनकर 5 लाख रुपये ठगने, 11 अगस्त को मोहल्ला प्राणपुरा निवासी वीरेंद्र के फोन-पे के माध्यम से 30 हजार रुपये निकालने, 24 अगस्त को भूषण निवासी रवींद्र को झांसा देकर 1 लाख 20 रुपये ठगने, 27 अगस्त को नारहेडी निवासी सुरेंद्र सिंह को ट्रैक्टर देने के नाम पर 2 लाख 41 हजार ठगने, 30 अगस्त को परमानंद के खाते से दस हजार रुपये निकलने तथा 31 अगस्त को कैलाश नगर निवासी सुधीर कुमार की क्यू आर कोड के माध्यम से एक लाख रुपये खाते से निकालने की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
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जिले में साइबर क्राइम के लिए कोई थाना नहीं है। इतना जरूर है कि जिला मुख्यालय पर साइबर सेल का कार्यालय अलग से बनाया गया है जहां से ऐसे मामलों पर नजर रखी जाती है मगर साइबर सेल में सीमित संसाधन होने के कारण ऐसे अपराधियों तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। वहीं साइबर थानों में पर्याप्त संसाधन होने के साथ-साथ स्टाफ भी प्रशिक्षित होता है जोकि ऐसे मामले आते ही उनकी ट्रेसिंग कर धरपकड़ शुरू कर देते है।
जालसाज फेक ट्रेवल वेबसाइट या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन के जरिए लोगों से संपर्क करते हैं। मेक माई ट्रिप, एयर बीएनबी आदि ऑनलाइन बुकिंग प्लेटफॉर्म के नामों का आमतौर पर ऐसे विज्ञापनों, वेबसाइटों और सोशल मीडिया पेजों पर दुरुपयोग किया जाता है। साइबर अपराधी लोगों को तब झांसे में फंसाते हैं जब वे सोशल मीडिया पर प्रसारित नकली यात्रा विज्ञापनों का जवाब देते हैं। जालसाज लोगों से संपर्क करते हैं, एक ट्रेवल कंपनी या एक एयरलाइन से होने का दावा करते हैं। यात्रा पैकेजों पर अविश्वसनीय छूट प्रदान करते हैं। लोगों की बुकिंग प्रक्रिया के माध्यम से लिया जाता है और ऑनलाइन बैंकिंग विधियों के माध्यम से भुगतान लिया जाता है।
फोन पर या सोशल मीडिया या ई मेल के माध्यम से अच्छे यात्रा पैकेज की पेशकश करने वाले व्यक्ति की अच्छी तरह से जांच करें। वैद्यता के लिए ऐसे वेबसाइट यूआरएल की जांच करें और यदि डोमेन नामों में थोड़े से परिवर्तन द्वारा परिवर्तित किया गया है तो ऐसे वेबसाइट पर बुकिंग करने से बचें। कंपनी की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए ट्रेवल कंपनी और प्रदान किए पैकेज को पूरी तरह से ऑनलाइन खोजें। साइबर क्राइम डॉट जीओवी डॉट इन पोर्टल पर ऐसी किसी भी प्रकार की घटना की रिपोर्ट करें।
साइबर अपराध पर रोक लगाने के लिए पुलिस द्वारा समय-समय लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की जाती है। साइबर अपराध के मामलों पर नजर रखने के लिए साइबर सेल का अलग से कार्यालय बनाया गया है। हाल ही पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े मामले के एक आरोपित को गिरफ्तार किया गया है। ऐसे जालसाजों से बचने के लिए लोगों को भी जागरूक होना पड़ेगा तभी हम इस प्रकार ठगी से बच सकेंगे। -चंद्रमोहन, एसपी, नारनौल।