{"_id":"6844814982fed89ea00d6fdc","slug":"there-is-only-two-days-of-supply-of-drinking-water-left-in-mahindergarh-narnol-news-c-203-1-sroh1010-117643-2025-06-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: महेंद्रगढ़ में सिर्फ दो दिन आपूर्ति के लिए बचा है पेयजल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: महेंद्रगढ़ में सिर्फ दो दिन आपूर्ति के लिए बचा है पेयजल
Sat, 07 Jun 2025 11:43 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 07 Jun 2025 11:43 PM IST
विज्ञापन
फोटो संख्या:57- मालड़ा बास के जलघर के टैंक में कम पानी--स्रोत- ग्रामीण
महेंद्रगढ़। 25 दिनों से महेंद्रगढ़ के लिए पेयजल की जीवन रेखा कही जाने वाली जेएलएन नहर में पानी नहीं आने से अधिकांश जलघर खाली हो चुके हैं। पानी दो दिन आपूर्ति के लिए बचा है।
शहरी आबादी की प्यास बुझाने के लिए जिम्मेदार भी 48 घंटे में महज एक घंटे ही पेयजल आपूर्ति कर पा रहे हैं। एक घंटे पानी की आपूर्ति के लिए भी विभाग ट्यूबवेलों का सहारा ले रहा है। जो केवल दो दिन ही शहरी आपूर्ति के लिए पर्याप्त है। भीषण गर्मी के मौसम में पानी के अभाव में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
नहर विभाग के अधिकारियों के मानें तो 15 जून को जेएलएन नहर में पानी आने की संभावना है। ऐसे में शहर में पहले से चल रही पेयजल की किल्लत और अधिक बढ़ जाएगी। सूखे टैंकों के कारण विभाग की ओर से अब पांच बोरवेलों के माध्यम से शहर की आबादी की प्यास बुझाने का दावा किया जा रहा है।
विज्ञापन
तीन सप्ताह से जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर में राशनिंग के आधार पर पानी की आपूर्ति शुरू की गई थी। गांव देवास जल परियोजना पर 24 करोड़ लीटर की क्षमता के चार टैंकों में से अब तीन टैंक खाली हो चुके हैं। एक में महज चार-पांच फिट ही पानी शेष है। जो केवल दो दिन ही शहरवासियों को आपूर्ति के लिए बचा है।
इंसेट
अब विभाग को बोरवेल का ही सहारा
जन स्वास्थ्य विभाग के पास गांव देवास जल परियोजना पर चार टैंकों के अलावा पांच बोरवेल भी लगाए गए हैं। वहीं शहर व आसपास के इलाकों में भी करीब 12 बोरवेल हैं, लेकिन यह शहरी आबादी को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने में नाकाम हैं। हालांकि इस बार नौतपा के दौरान 37 एमएम बारिश और ठंडे रहे मौसम ने भी जन स्वास्थ्य विभाग की काफी हद तक सहायता की थी, लेकिन पिछले दो दिनों से लगातार बढ़ रहे तापमान में अब पानी की मांग भी बढ़ गई है, लेकिन विभाग के पास कोई विकल्प नहीं है।
-- -- -- -- -- -- -
- वर्जन
15 जून को नहरी पानी आने की उम्मीद है। शहरवासियों को राशनिंग के आधार पर पानी की आपूर्ति की जा रही है। विभाग के पास करीब 17 बोरवेल हैं। इनसे शहर में पेयजल आपूर्ति की जा रही है। नहरी पानी आने के बाद टैंकों को भरने के बाद ही नियमित आपूर्ति हो सकती है। - जियाराम, उपमंडल अधिकारी जन स्वास्थ्य विभाग
विज्ञापन
शहरी आबादी की प्यास बुझाने के लिए जिम्मेदार भी 48 घंटे में महज एक घंटे ही पेयजल आपूर्ति कर पा रहे हैं। एक घंटे पानी की आपूर्ति के लिए भी विभाग ट्यूबवेलों का सहारा ले रहा है। जो केवल दो दिन ही शहरी आपूर्ति के लिए पर्याप्त है। भीषण गर्मी के मौसम में पानी के अभाव में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
नहर विभाग के अधिकारियों के मानें तो 15 जून को जेएलएन नहर में पानी आने की संभावना है। ऐसे में शहर में पहले से चल रही पेयजल की किल्लत और अधिक बढ़ जाएगी। सूखे टैंकों के कारण विभाग की ओर से अब पांच बोरवेलों के माध्यम से शहर की आबादी की प्यास बुझाने का दावा किया जा रहा है।
विज्ञापन
तीन सप्ताह से जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से शहर में राशनिंग के आधार पर पानी की आपूर्ति शुरू की गई थी। गांव देवास जल परियोजना पर 24 करोड़ लीटर की क्षमता के चार टैंकों में से अब तीन टैंक खाली हो चुके हैं। एक में महज चार-पांच फिट ही पानी शेष है। जो केवल दो दिन ही शहरवासियों को आपूर्ति के लिए बचा है।
इंसेट
अब विभाग को बोरवेल का ही सहारा
जन स्वास्थ्य विभाग के पास गांव देवास जल परियोजना पर चार टैंकों के अलावा पांच बोरवेल भी लगाए गए हैं। वहीं शहर व आसपास के इलाकों में भी करीब 12 बोरवेल हैं, लेकिन यह शहरी आबादी को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने में नाकाम हैं। हालांकि इस बार नौतपा के दौरान 37 एमएम बारिश और ठंडे रहे मौसम ने भी जन स्वास्थ्य विभाग की काफी हद तक सहायता की थी, लेकिन पिछले दो दिनों से लगातार बढ़ रहे तापमान में अब पानी की मांग भी बढ़ गई है, लेकिन विभाग के पास कोई विकल्प नहीं है।
- वर्जन
15 जून को नहरी पानी आने की उम्मीद है। शहरवासियों को राशनिंग के आधार पर पानी की आपूर्ति की जा रही है। विभाग के पास करीब 17 बोरवेल हैं। इनसे शहर में पेयजल आपूर्ति की जा रही है। नहरी पानी आने के बाद टैंकों को भरने के बाद ही नियमित आपूर्ति हो सकती है। - जियाराम, उपमंडल अधिकारी जन स्वास्थ्य विभाग