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Mahendragarh-Narnaul News: पिता के संस्कारों की छांव में पली बच्चों की सफलता
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रमेश कुमार, एसएचओ, थाना सदर, महेंद्रगढ़
महेंद्रगढ़/नारनौल। अक्सर माता-पिता ही बच्चों के पहले गुरु होते हैं। यहां पर दी जा रही कुछ शख्सियत के लिए भी पिता प्रेरणास्रोत बने और उनमें देशसेवा व देशभक्ति का जज्बा पैदा कर दिया। आज अपने पिता की उन बातों की याद आंखें नम हो रही हैं और पिता की बातों को याद कर कामयाबी पर फक्र कर रहे हैं।
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फोटो-14
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मैंने पिता डॉ. जेएस यादव से मुझे देशभक्ति के साथ सामाजिक न्याय के लिए आवाज उठानी सीखाई है। उन्होंने मुझे अखबार पढ़ने, विचार लिखने और विषयों को गहराई से समझने की आदत दी जो आज तक मेरे साथ है।-अरविंद यादव, मेजर जनरल
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फोटो-15
मैंने अपने पिता मूलचंद शर्मा से शिक्षा का महत्व और समाजसेवा की भावना सीखी। वे एक आदर्श शिक्षक थे जिनकी आदत थी कि हर व्यक्ति को शिक्षा से आगे बढ़ना चाहिए। उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा ने मुझे शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की सीख दी।-डॉ. विश्वेश्वर कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी
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फोटो-16
मैंने अपने पिता रामअवतार शर्मा से सीखा कि बेटियों की शिक्षा और स्वावलंबन सबसे जरूरी है। वे हर स्थिति में मेरा साथ देते और मेरी पढ़ाई व जरूरतों का पूरा ध्यान रखते। उनका समर्थन, विश्वास और हौसला मेरे जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बना।-डॉ. ममता शर्मा, प्राध्यापिका, राजकीय महिला महाविद्यालय
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फोटो-17
मैंने अपने पिता मास्टर किशन लाल शर्मा से अनुशासन, मेहनत और शिक्षा का महत्व सीखा। उनकी आदत थी कि वे अपनी जरूरतों से पहले मेरी पढ़ाई को प्राथमिकता देते थे। उनके मार्गदर्शन ने मुझे डॉक्टर बनने की प्रेरणा दी।-डॉ. दिनेश शर्मा, हड्डी रोग वरिष्ठ विशेषज्ञ
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फोटो-18
मैंने अपने पिता गंगाराम शर्मा से ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की सीख ली। उनकी आदत थी कि वे हर कार्य को पूरी लगन और सच्चाई से करते थे। उन्होंने मुझे सिखाया कि मेहनत और शिक्षा ही सफलता का आधार हैं। -कृष्ण कुमार शर्मा, अधिवक्ता
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मेरे पिता मांगेराम सिंह आर्मी में थे और देशसेवा का जज्बा काफी था। उन्होंने कहा कि बेटा हार कभी मत मानना, देशसेवा के लिए चट्टानों जैसी मुसीबतों से भी लड़ जाना। देशसेवा करने का जज्बा उन्हीं से आया है।- रमेश कुमार, एसएचओ, थाना सदर, महेंद्रगढ़
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पिता नरेश कुमार बचपन में सफलता की कहानी सुनाते और इनके अनुसार चलने को प्रेरित करते। बचपन में पिता का साथ तो छूट गया लेकिन उनकी कही वो बातें आज भी याद हैं।-पंकज, एसएचओ, शहर थाना, महेंद्रगढ़
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मेरे पिता मूलचंद शर्मा शिक्षक थे और हमें भी शिक्षा क्षेत्र में जाने के लिए प्रेरित किया। मैं लोकल में पढ़ाई करना चाहता था लेकिन पिता ने बाहर यूनिवर्सिटी में जाकर पढ़ने को कहा और आज उन्हीं की बदौलत यह मुकाम पाया।-डॉ. विश्वेश्वर कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी, महेंद्रगढ़
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मेरे पिताजी रामसिंह हैड मास्टर पद से रिटायर हैं। उन्होंने मुझे कहा कि खुद पर भरोसा करके लक्ष्य तय करने पर ही सपना पूरा होगा। पहली बार में असफल हो सकती हो, लेकिन कोशिश मत छोड़ना। इसी बात का अनुसरण कर आज प्रोफेसर बन पाई।-डॉ. नीलम यादव, सहायक प्रोफेसर, बायोकेमिस्ट्री, हकेंवि
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मैंने पिता डॉ. जेएस यादव से मुझे देशभक्ति के साथ सामाजिक न्याय के लिए आवाज उठानी सीखाई है। उन्होंने मुझे अखबार पढ़ने, विचार लिखने और विषयों को गहराई से समझने की आदत दी जो आज तक मेरे साथ है।-अरविंद यादव, मेजर जनरल
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मैंने अपने पिता मूलचंद शर्मा से शिक्षा का महत्व और समाजसेवा की भावना सीखी। वे एक आदर्श शिक्षक थे जिनकी आदत थी कि हर व्यक्ति को शिक्षा से आगे बढ़ना चाहिए। उनके मार्गदर्शन और प्रेरणा ने मुझे शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की सीख दी।-डॉ. विश्वेश्वर कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी
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मैंने अपने पिता रामअवतार शर्मा से सीखा कि बेटियों की शिक्षा और स्वावलंबन सबसे जरूरी है। वे हर स्थिति में मेरा साथ देते और मेरी पढ़ाई व जरूरतों का पूरा ध्यान रखते। उनका समर्थन, विश्वास और हौसला मेरे जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बना।-डॉ. ममता शर्मा, प्राध्यापिका, राजकीय महिला महाविद्यालय
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मैंने अपने पिता मास्टर किशन लाल शर्मा से अनुशासन, मेहनत और शिक्षा का महत्व सीखा। उनकी आदत थी कि वे अपनी जरूरतों से पहले मेरी पढ़ाई को प्राथमिकता देते थे। उनके मार्गदर्शन ने मुझे डॉक्टर बनने की प्रेरणा दी।-डॉ. दिनेश शर्मा, हड्डी रोग वरिष्ठ विशेषज्ञ
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मैंने अपने पिता गंगाराम शर्मा से ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की सीख ली। उनकी आदत थी कि वे हर कार्य को पूरी लगन और सच्चाई से करते थे। उन्होंने मुझे सिखाया कि मेहनत और शिक्षा ही सफलता का आधार हैं। -कृष्ण कुमार शर्मा, अधिवक्ता
मेरे पिता मांगेराम सिंह आर्मी में थे और देशसेवा का जज्बा काफी था। उन्होंने कहा कि बेटा हार कभी मत मानना, देशसेवा के लिए चट्टानों जैसी मुसीबतों से भी लड़ जाना। देशसेवा करने का जज्बा उन्हीं से आया है।- रमेश कुमार, एसएचओ, थाना सदर, महेंद्रगढ़
पिता नरेश कुमार बचपन में सफलता की कहानी सुनाते और इनके अनुसार चलने को प्रेरित करते। बचपन में पिता का साथ तो छूट गया लेकिन उनकी कही वो बातें आज भी याद हैं।-पंकज, एसएचओ, शहर थाना, महेंद्रगढ़
मेरे पिता मूलचंद शर्मा शिक्षक थे और हमें भी शिक्षा क्षेत्र में जाने के लिए प्रेरित किया। मैं लोकल में पढ़ाई करना चाहता था लेकिन पिता ने बाहर यूनिवर्सिटी में जाकर पढ़ने को कहा और आज उन्हीं की बदौलत यह मुकाम पाया।-डॉ. विश्वेश्वर कौशिक, जिला शिक्षा अधिकारी, महेंद्रगढ़
मेरे पिताजी रामसिंह हैड मास्टर पद से रिटायर हैं। उन्होंने मुझे कहा कि खुद पर भरोसा करके लक्ष्य तय करने पर ही सपना पूरा होगा। पहली बार में असफल हो सकती हो, लेकिन कोशिश मत छोड़ना। इसी बात का अनुसरण कर आज प्रोफेसर बन पाई।-डॉ. नीलम यादव, सहायक प्रोफेसर, बायोकेमिस्ट्री, हकेंवि

रमेश कुमार, एसएचओ, थाना सदर, महेंद्रगढ़

रमेश कुमार, एसएचओ, थाना सदर, महेंद्रगढ़

रमेश कुमार, एसएचओ, थाना सदर, महेंद्रगढ़

रमेश कुमार, एसएचओ, थाना सदर, महेंद्रगढ़

रमेश कुमार, एसएचओ, थाना सदर, महेंद्रगढ़

रमेश कुमार, एसएचओ, थाना सदर, महेंद्रगढ़

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