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Mahendragarh-Narnaul News: पांच साल में धूम्रपान करने वालों में 25 प्रतिशत युवाओं की संख्या बढ़ी
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फोटो 02बस स्टैंड पर बीड़ी पीता व्यक्ति। संवाद
नारनौल। जिले में पांच सालों में सिगरेट पीने वालों की संख्या में करीब 25 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है जिनमें ज्यादातर युवाओं की संख्या है। स्कूल व कॉलेजों में पढ़ने वाले युवा स्टाइल मारने व स्टेटस दिखाने के लिए सिगरेट पीना शुरू करते हैं लेकिन बाद में वे आदी हो जाते हैं। सीएमओ डॉ. अशोक कुमार के बताया कि पांच सालों में सिगरेट पीने वालों की संख्या में करीब 25 प्रतिशत युवाओं की बढ़ोतरी हुई है।
दूसरी ओर कुछ ऐसे भी लोग हैं जो 10 से लेकर 15 सालों से इस व्यसन के आदी रह चुके थे लेकिन अब उन्होंने धूम्रपान की लत से बिलकुल तौबा कर ली है। उनके अनुसार शुरुआत में उन्होंने सिगरेट शौकिया तौर पर शुरू की थी और बाद में वे इसके आदी होते चले गए।
एक साल में 508 लोगों ने नशा छोड़ा
नागरिक अस्पताल के कमरा नंबर 41 में बने तंबाकू निवारण केंद्र में गत 12 माह में सिगरेट बीड़ी की लत छोड़ने के लिए आने वाले युवाओं की संख्या 508 रही है जबकि इनमें से इस लत को पूरी तरह से छोड़ पाने में केवल 10 ही सफल हुए हैं इसके अलावा हर माह नागरिक अस्पताल में 300 से अधिक लोग इस लत को छोड़ने के लिए काउंसलिंग करवाने आते हैं।
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इंचार्ज एनटीसीपी डॉ. अनिल यादव के मुताबिक पिछले एक साल में जिले में सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने वाले 53 लोगों के चालान काटे गए और इनसे कुल 1250 रुपये का चालान वसूला गया है।
स्कूल में पढ़ने के दौरान कभी कभार शौक के तौर पर सिगरेट पीता था। उसके बाद खुद खरीद कर पीने लगे। करीब दस साल सिगरेट पीने के बाद बेटी की जिद पर अब दो साल से छोड़ दी।
जितेंद्र उर्फ जीतू, हुडा सेक्टर।
करीब 15 साल तक शराब व सिगरेट का आदी रहा। चार साल पहले पापा ने सिगरेट पीते हुए देख लिया था हालांकि इस बात को लेकर उन्होंने आज तक कुछ नहीं बोला लेकिन ये बात हमेशा मुझे असहज करती रही। अब तीन साल से शराब व सिगरेट दोनों को छोड़ दिया।
हिमांशु गुप्ता, निजामपुर रोड
11वीं में था तक दोस्तों के साथ सिगरेट पीनी शुरू की थी। ये कब आदत बन गई यह पता ही नहीं चला। शादी के बाद इसी को लेकर रोज बहस होती थी। अब करीब ढाई साल हो गए सिगरेट को हाथ नहीं लगाया है।
योगेश कुमार, कैलाश नगर।
वर्जन:
काफी युवा केंद्र में आते हैं अपनी सिगरेट की लत छोड़ने के लिए। शुरूआत में शौक के तौर पर पीना शुरू करते हैं इसके बाद उन्हें आदत हो जाती है। इनमें से कुछ स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव कैंसर के डर के चलते अपनी लत को छोड़ पाने में सफल भी हो जाते हैं।
डॉ. अनिल यादव, इंचार्ज, तंबाकू निवारण केंद्र, नारनौल।
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दूसरी ओर कुछ ऐसे भी लोग हैं जो 10 से लेकर 15 सालों से इस व्यसन के आदी रह चुके थे लेकिन अब उन्होंने धूम्रपान की लत से बिलकुल तौबा कर ली है। उनके अनुसार शुरुआत में उन्होंने सिगरेट शौकिया तौर पर शुरू की थी और बाद में वे इसके आदी होते चले गए।
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एक साल में 508 लोगों ने नशा छोड़ा
नागरिक अस्पताल के कमरा नंबर 41 में बने तंबाकू निवारण केंद्र में गत 12 माह में सिगरेट बीड़ी की लत छोड़ने के लिए आने वाले युवाओं की संख्या 508 रही है जबकि इनमें से इस लत को पूरी तरह से छोड़ पाने में केवल 10 ही सफल हुए हैं इसके अलावा हर माह नागरिक अस्पताल में 300 से अधिक लोग इस लत को छोड़ने के लिए काउंसलिंग करवाने आते हैं।
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इंचार्ज एनटीसीपी डॉ. अनिल यादव के मुताबिक पिछले एक साल में जिले में सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने वाले 53 लोगों के चालान काटे गए और इनसे कुल 1250 रुपये का चालान वसूला गया है।
स्कूल में पढ़ने के दौरान कभी कभार शौक के तौर पर सिगरेट पीता था। उसके बाद खुद खरीद कर पीने लगे। करीब दस साल सिगरेट पीने के बाद बेटी की जिद पर अब दो साल से छोड़ दी।
जितेंद्र उर्फ जीतू, हुडा सेक्टर।
करीब 15 साल तक शराब व सिगरेट का आदी रहा। चार साल पहले पापा ने सिगरेट पीते हुए देख लिया था हालांकि इस बात को लेकर उन्होंने आज तक कुछ नहीं बोला लेकिन ये बात हमेशा मुझे असहज करती रही। अब तीन साल से शराब व सिगरेट दोनों को छोड़ दिया।
हिमांशु गुप्ता, निजामपुर रोड
11वीं में था तक दोस्तों के साथ सिगरेट पीनी शुरू की थी। ये कब आदत बन गई यह पता ही नहीं चला। शादी के बाद इसी को लेकर रोज बहस होती थी। अब करीब ढाई साल हो गए सिगरेट को हाथ नहीं लगाया है।
योगेश कुमार, कैलाश नगर।
वर्जन:
काफी युवा केंद्र में आते हैं अपनी सिगरेट की लत छोड़ने के लिए। शुरूआत में शौक के तौर पर पीना शुरू करते हैं इसके बाद उन्हें आदत हो जाती है। इनमें से कुछ स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव कैंसर के डर के चलते अपनी लत को छोड़ पाने में सफल भी हो जाते हैं।
डॉ. अनिल यादव, इंचार्ज, तंबाकू निवारण केंद्र, नारनौल।