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Mahendragarh-Narnaul News: सारंगी बांसुरी व तबले की जुगलबंदी ने संगीतमय बनाया माहौल

Sun, 01 Mar 2026 11:18 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 01 Mar 2026 11:18 PM IST
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The jugalbandi of sarangi, flute and tabla created a musical atmosphere.
फोटो संख्या:86- लोक कलां उत्सव विरासत के समापन पर दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ करते विधायक कंवर स
महेंद्रगढ़। रामायण के सार को समर्पित नित्य में रात नृत्य नाटिका ने लोक कला उत्सव के समापन पर अद्भुत प्रस्तुति से दर्शकों को खूब रोमांचित किया। सारंगी बांसुरी व तबले की राष्ट्र स्तर की जुगलबंदी ने माहौल को पूरी तरह संगीतमय बना दिया। विधायक कंवर सिंह यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
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उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के निदेशक सुदेश शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह ने की। जबकि संगीत नाटक एकेडमी चंडीगढ़ के उप चेयरमैन अमित गंगानी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
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23 फरवरी से 1 मार्च तक उत्तर मध्य उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज व निजी स्कूल महेंद्रगढ़ के तत्वाधान में लोक कलां विरासत उत्सव का आयोजन किया गया।
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उत्सव के दौरान नाटक लोक नृत्य, कवि सम्मेलन, शास्त्रीय गायन, शास्त्रीय वादन, नृत्य नाटिकाओं का मंचन अलग-अलग दिन किया गया। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन राष्ट्रपति अवार्डी डा. धर्मेश कौशिक ने किया।
विधायक कंवर सिंह यादव ने कहा कि नृत्य संगीत व लोक कलाएं हमारे जीवन को संस्कारवान बनाने के लिए प्रेरित करते है। निदेशक सुदेश शर्मा ने कहा कि हम सब मिलकर भारत की लोक विरासत को जीवत रखने में अपना-अपना सहयोग दें। राव बहादुर सिंह ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें ताकि आपके व्यक्तित्व को सबलता मिल सके।

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शास्त्रीय वादन ने जमाया रंग
लोक कला विरासत उत्सव के सातवें दिन पंडित विनोद कुमार व साथी ने सारंगी, बांसुरी व तबले पर विभिन्न रागों का सुंदर चित्रण कर शास्त्रीय वादन की आकर्षक प्रस्तुतियां दी। प्रयागराज से आए इन कलाकारों ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक बार अपने कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी है। लोक कला विरासत उत्सव के समापन पर दिल्ली से आई उनकी टीम ने नृत्य में राम, नृत्य नाटिका के माध्यम से रामायण के एक-एक चरित्र पर शास्त्रीय नृत्य दृश्कों को बार-बार तालिया बजाने पर मजबूर कर दिया। महिलाओं ने अपने नृत्य के माध्यम से खूब वाहवाही लूटी।
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