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Mahendragarh-Narnaul News: आईजी ने पुलिस लाइन में दंगा नियंत्रण रिहर्सल परखने के साथ दिए निर्देश
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फोटो 02 पुलिस लाइन का दौरा करते आईजी। पुलिस
नारनौल। कानून एवं व्यवस्था आईजी कुलदीप सिंह ने सोमवार को नारनौल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल की तैयारियों और कार्यक्षमता का बारीकी से जायजा लिया।
आईजी ने जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति की गहन समीक्षा की। अपने निरीक्षण के दौरान आईजी ने सबसे पहले दंगा नियंत्रण के लिए गठित विशेष कंपनियों की जांच की। उन्होंने जवानों की मुस्तैदी परखने के लिए मौके पर ही दंगा नियंत्रण गतिविधियों की रिहर्सल करवाई।
इस प्रक्रिया में एक कृत्रिम दीवार का निर्माण कर पथराव जैसी विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। साथ ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न प्रकार की पुलिस फॉर्मेशन का भी अभ्यास कराया गया ताकि किसी भी आपात स्थिति में पुलिस बल प्रभावी कार्रवाई कर सके।
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इसके बाद आईजी ने पुलिस लाइन स्थित मीटिंग हॉल में सभी थाना प्रभारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। जिसमें मुख्य रूप से पांच बिंदुओं पर चर्चा की गई। उन्होंने जिले के सीलिंग प्लान के बारे में जानकारी ली और सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए।
सीसीटीवी कैमरों की उपयोगिता पर जोर देते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि जिले में लगे कैमरों का नियमित ऑडिट किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीवीआर को सुरक्षित व गुप्त स्थान पर रखा जाए, कैमरों की टाइमिंग रियल टाइम होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी कैमरे, विशेषकर पेट्रोल पंप, बैंक और एटीएम के बाहर लगे कैमरे, उनके उपकरण, चालू हालत में हों और उनमें रिकॉर्डिंग हो रही हो।
इसके अलावा आईजी ने गुमशुदगी के मामलों को लेकर अधिकारियों को सचेत किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को बिल्कुल भी हल्के में न लिया जाए और पुलिस पूरी तरह अलर्ट रहकर कार्रवाई करे।
बैठक के अंत में पुलिस कल्याण पर चर्चा करते हुए उन्होंने पुलिस कर्मचारियों के नियमानुसार साप्ताहिक विश्राम (वीकली रेस्ट) और छुट्टियों को लेकर चर्चा की। साथ ही, उन्होंने बेहतर और सराहनीय कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों के रिवॉर्ड को लेकर चर्चा की।
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आईजी ने जिले में कानून-व्यवस्था की स्थिति की गहन समीक्षा की। अपने निरीक्षण के दौरान आईजी ने सबसे पहले दंगा नियंत्रण के लिए गठित विशेष कंपनियों की जांच की। उन्होंने जवानों की मुस्तैदी परखने के लिए मौके पर ही दंगा नियंत्रण गतिविधियों की रिहर्सल करवाई।
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इस प्रक्रिया में एक कृत्रिम दीवार का निर्माण कर पथराव जैसी विषम परिस्थितियों से निपटने के लिए मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। साथ ही भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न प्रकार की पुलिस फॉर्मेशन का भी अभ्यास कराया गया ताकि किसी भी आपात स्थिति में पुलिस बल प्रभावी कार्रवाई कर सके।
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इसके बाद आईजी ने पुलिस लाइन स्थित मीटिंग हॉल में सभी थाना प्रभारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। जिसमें मुख्य रूप से पांच बिंदुओं पर चर्चा की गई। उन्होंने जिले के सीलिंग प्लान के बारे में जानकारी ली और सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के निर्देश दिए।
सीसीटीवी कैमरों की उपयोगिता पर जोर देते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि जिले में लगे कैमरों का नियमित ऑडिट किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीवीआर को सुरक्षित व गुप्त स्थान पर रखा जाए, कैमरों की टाइमिंग रियल टाइम होनी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी कैमरे, विशेषकर पेट्रोल पंप, बैंक और एटीएम के बाहर लगे कैमरे, उनके उपकरण, चालू हालत में हों और उनमें रिकॉर्डिंग हो रही हो।
इसके अलावा आईजी ने गुमशुदगी के मामलों को लेकर अधिकारियों को सचेत किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को बिल्कुल भी हल्के में न लिया जाए और पुलिस पूरी तरह अलर्ट रहकर कार्रवाई करे।
बैठक के अंत में पुलिस कल्याण पर चर्चा करते हुए उन्होंने पुलिस कर्मचारियों के नियमानुसार साप्ताहिक विश्राम (वीकली रेस्ट) और छुट्टियों को लेकर चर्चा की। साथ ही, उन्होंने बेहतर और सराहनीय कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों के रिवॉर्ड को लेकर चर्चा की।