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Mahendragarh-Narnaul News: 9 साल की उम्र में उतरे थे मंच पर, 55 कलाकार आज भी निभा रहे हैं रामलीला के किरदार
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संवाद न्यूज एजेंसी
महेंद्रगढ़। श्री आदर्श रामलीला कमेटी से जुड़े करीब 55 कलाकार ऐसे हैं, जिन्होंने सिर्फ 9 साल की उम्र में मंच पर कदम रखा था और आज भी अलग-अलग पात्रों का अभिनय कर रहे हैं। बचपन में शुरू हुआ यह सिलसिला आज भी जारी है। इन कलाकारों ने रामलीला की परंपरा को पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रखने में अहम भूमिका निभाई है।
वर्ष 1971 में एक छोटे से पंडाल में शुरू हुई यह रामलीला अब भव्य मंच तक पहुंच चुकी है। शुरुआत में करीब 70 सदस्य और कलाकार मिलकर इसका मंचन करते थे। सीमित साधनों के बावजूद कलाकारों की श्रद्धा और उत्साह ने आयोजन को आगे बढ़ाया। समय के साथ बेहतर मंच, रोशनी और दूसरी सुविधाएं जुड़ती गईं। अब कमेटी से जुड़े सदस्यों और कलाकारों की संख्या 125 से ज्यादा हो चुकी है।
कमेटी के सदस्यों का कहना है कि रामलीला सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का जरिया भी है। तंबू से भव्य मंच तक का सफर तय करने के बावजूद इससे जुड़े लोगों का समर्पण और धार्मिक भावना आज भी वैसी ही है। यही निरंतरता इस रामलीला की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है।
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1971 में सर्वेसर्वा रामसिंह यादव की निगरानी में रामलीला शुरू की गई थी। समय के साथ यह भव्य रंगमंच तक पहुंच गई है। इस बार 13 दिन तक युवा और कमेटी के सदस्य श्रीराम की मानवीय लीलाओं का मंचन करेंगे।-सुरेंद्र बंटी, प्रधान, श्री आदर्श रामलीला कमेटी
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मैं 1971 से रामलीला से जुड़कर मंच को आगे बढ़ा रहा हूं। रिहर्सल के दौरान युवाओं को हर बारीकी सिखाई जा रही है, ताकि मंचन में उन्हें कोई दिक्कत न हो। मैं खुद भी कई किरदार निभा चुका हूं और तीन बार प्रधान भी रह चुका हूं।-मास्टर हरिसिंह, स्टेज संचालक
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पिछले 55 साल से रामलीला के दौरान युवाओं को नशे से दूर रहने, भारतीय संस्कृति से जुड़ने और श्रीराम के आदर्शों पर चलने के प्रति जागरूक किया जाता है। वे कलाकारों को अभिनय की बारीकियां भी सिखाते रहते हैं।-लक्ष्मी नारायण सैनी, डायरेक्टर
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उन्होंने बचपन में बाल कलाकार के रूप में रामलीला से शुरुआत की थी। वे दो बार निदेशक के पद पर रह चुके हैं। अब तक वे रावण, मेघनाद, श्रवण, दशरथ, ताड़का और पुजारी का किरदार निभा चुके हैं। इस बार भी वे रावण की भूमिका निभाएंगे।-शुभम तिवाड़ी, निदेशक
महेंद्रगढ़। श्री आदर्श रामलीला कमेटी से जुड़े करीब 55 कलाकार ऐसे हैं, जिन्होंने सिर्फ 9 साल की उम्र में मंच पर कदम रखा था और आज भी अलग-अलग पात्रों का अभिनय कर रहे हैं। बचपन में शुरू हुआ यह सिलसिला आज भी जारी है। इन कलाकारों ने रामलीला की परंपरा को पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रखने में अहम भूमिका निभाई है।
वर्ष 1971 में एक छोटे से पंडाल में शुरू हुई यह रामलीला अब भव्य मंच तक पहुंच चुकी है। शुरुआत में करीब 70 सदस्य और कलाकार मिलकर इसका मंचन करते थे। सीमित साधनों के बावजूद कलाकारों की श्रद्धा और उत्साह ने आयोजन को आगे बढ़ाया। समय के साथ बेहतर मंच, रोशनी और दूसरी सुविधाएं जुड़ती गईं। अब कमेटी से जुड़े सदस्यों और कलाकारों की संख्या 125 से ज्यादा हो चुकी है।
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कमेटी के सदस्यों का कहना है कि रामलीला सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि भगवान श्रीराम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का जरिया भी है। तंबू से भव्य मंच तक का सफर तय करने के बावजूद इससे जुड़े लोगों का समर्पण और धार्मिक भावना आज भी वैसी ही है। यही निरंतरता इस रामलीला की सबसे बड़ी पहचान मानी जाती है।
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1971 में सर्वेसर्वा रामसिंह यादव की निगरानी में रामलीला शुरू की गई थी। समय के साथ यह भव्य रंगमंच तक पहुंच गई है। इस बार 13 दिन तक युवा और कमेटी के सदस्य श्रीराम की मानवीय लीलाओं का मंचन करेंगे।-सुरेंद्र बंटी, प्रधान, श्री आदर्श रामलीला कमेटी
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मैं 1971 से रामलीला से जुड़कर मंच को आगे बढ़ा रहा हूं। रिहर्सल के दौरान युवाओं को हर बारीकी सिखाई जा रही है, ताकि मंचन में उन्हें कोई दिक्कत न हो। मैं खुद भी कई किरदार निभा चुका हूं और तीन बार प्रधान भी रह चुका हूं।-मास्टर हरिसिंह, स्टेज संचालक
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पिछले 55 साल से रामलीला के दौरान युवाओं को नशे से दूर रहने, भारतीय संस्कृति से जुड़ने और श्रीराम के आदर्शों पर चलने के प्रति जागरूक किया जाता है। वे कलाकारों को अभिनय की बारीकियां भी सिखाते रहते हैं।-लक्ष्मी नारायण सैनी, डायरेक्टर
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उन्होंने बचपन में बाल कलाकार के रूप में रामलीला से शुरुआत की थी। वे दो बार निदेशक के पद पर रह चुके हैं। अब तक वे रावण, मेघनाद, श्रवण, दशरथ, ताड़का और पुजारी का किरदार निभा चुके हैं। इस बार भी वे रावण की भूमिका निभाएंगे।-शुभम तिवाड़ी, निदेशक