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सरकार ने जिले में 25 प्रतिशत भी एमएसपी पर नहीं खरीदा बाजरा
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नारनौल अनाज मंडी में व्यापारी की दुकान के बाहर पड़ी बाजरे की ढेरी।
- फोटो : Narnol
सरकार किसानों के अनाज का एक-एक दाना खरीदने का दावा कर रही है, लेकिन जिले के किसानों का न तो बाजरा खरीदा गया और न उन्हें अपने फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल पाया है। ऐसे में जिले के किसान अब तक 2 लाख 20 हजार क्विंटल के करीब बाजरा मंडियों में व्यापारियों को औने-पौने दामों पर बेच चुके हैं। जबकि सरकारी एजेंसी द्वारा मात्र 2433 क्विंटल बाजरा ही खरीदा किया गया है। वह भी बिना समर्थन मूल्य के खरीदा गया है।
सरकार ने इस बार एमएसपी पर बाजरा न खरीदकर किसानों को भावांतर भरपाई योजना के तहत 600 रुपये उनके खातों में डाले जाने की घोषणा की है, लेकिन अभी तक किसानों के खाते में यह राशि भी नहीं पहुंची है। इस प्रकार किसान अपने का ठगा सा महसूस कर रहे हैं। सरकार द्वारा बाजरे का समर्थन मूल्य 2250 रुपये निर्धारित किया गया था। जबकि उनका बाजरा 1100 से 1300 प्रति क्विंटल के हिसाब बिका है।
बता दें कि सरकार ने एक अक्तूबर से खरीफ फसल को सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीद करने का निर्णय लिया था, लेकिन जिले में बाजरा खरीद के लिए एजेंसियों के पास कोई सूचना या पत्र नहीं पहुंचा। इस कारण कई दिनों तक खरीद शुरू नहीं हुई। बाद में सरकार ने बाजरे की सरकारी खरीद न करने का निर्णय लेते हुए किसानों को मंडियों में अपना अनाज बेचने की बात कही थी। सरकार ने बाजरे का बाजार भाव 1650 मानते हुए किसानों को भावांतर भरपाई योजना के तहत 600 रुपये उनके खाते में डालने तथा 25 प्रतिशत बाजरा सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीदने का निर्णय लिया था। मगर जिले में एमएसपी पर सरकार द्वारा निर्धारित 25 प्रतिशत भी बाजरा नहीं खरीद किया गया है।
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दक्षिणी हरियाणा में बाजरे की पैदावार अधिक होती है। इस बार बाजरा फसल के लिए करीब 57583 किसानों ने मेरी फसल ब्योरा के तहत पंजीकरण करवाया था। जिन्होंने 208028 एकड़ में बाजरा बोया था। जबकि सरकार ने इस बार बाजरे की जगह मूंग बोने के लिए फसल विविधीकरण योजना लागू कर किसानों को प्रेरित किया था। इसमें मूंग बोने पर किसानों को 4000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन के रूप में देने की योजना थी। इस पर जिले के किसानों ने 22117 एकड़ में मूंग की बिजाई की। मूंग के लिए 10889 किसानों ने पंजीकरण करवाया था, मगर अभी जिले में मूंग की खरीद नहीं हो पाई और न ही किसानों को प्रोत्साहन राशि मिली है।
हैफेड द्वारा सरकार के निर्देशानुसार नारनौल व अटेली अनाज मंडियों में बाजरे की खरीद की गई है। इनमें नारनौल मंडी में 4000 हजार के करीब कट्टे खरीदे गए हैं। जबकि अटेली में 400 के करीब कट्टे खरीदे गए। - आरके शर्मा, जिला प्रबंधक हैफेड नारनौल।
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सरकार ने इस बार एमएसपी पर बाजरा न खरीदकर किसानों को भावांतर भरपाई योजना के तहत 600 रुपये उनके खातों में डाले जाने की घोषणा की है, लेकिन अभी तक किसानों के खाते में यह राशि भी नहीं पहुंची है। इस प्रकार किसान अपने का ठगा सा महसूस कर रहे हैं। सरकार द्वारा बाजरे का समर्थन मूल्य 2250 रुपये निर्धारित किया गया था। जबकि उनका बाजरा 1100 से 1300 प्रति क्विंटल के हिसाब बिका है।
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बता दें कि सरकार ने एक अक्तूबर से खरीफ फसल को सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीद करने का निर्णय लिया था, लेकिन जिले में बाजरा खरीद के लिए एजेंसियों के पास कोई सूचना या पत्र नहीं पहुंचा। इस कारण कई दिनों तक खरीद शुरू नहीं हुई। बाद में सरकार ने बाजरे की सरकारी खरीद न करने का निर्णय लेते हुए किसानों को मंडियों में अपना अनाज बेचने की बात कही थी। सरकार ने बाजरे का बाजार भाव 1650 मानते हुए किसानों को भावांतर भरपाई योजना के तहत 600 रुपये उनके खाते में डालने तथा 25 प्रतिशत बाजरा सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीदने का निर्णय लिया था। मगर जिले में एमएसपी पर सरकार द्वारा निर्धारित 25 प्रतिशत भी बाजरा नहीं खरीद किया गया है।
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दक्षिणी हरियाणा में बाजरे की पैदावार अधिक होती है। इस बार बाजरा फसल के लिए करीब 57583 किसानों ने मेरी फसल ब्योरा के तहत पंजीकरण करवाया था। जिन्होंने 208028 एकड़ में बाजरा बोया था। जबकि सरकार ने इस बार बाजरे की जगह मूंग बोने के लिए फसल विविधीकरण योजना लागू कर किसानों को प्रेरित किया था। इसमें मूंग बोने पर किसानों को 4000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन के रूप में देने की योजना थी। इस पर जिले के किसानों ने 22117 एकड़ में मूंग की बिजाई की। मूंग के लिए 10889 किसानों ने पंजीकरण करवाया था, मगर अभी जिले में मूंग की खरीद नहीं हो पाई और न ही किसानों को प्रोत्साहन राशि मिली है।
हैफेड द्वारा सरकार के निर्देशानुसार नारनौल व अटेली अनाज मंडियों में बाजरे की खरीद की गई है। इनमें नारनौल मंडी में 4000 हजार के करीब कट्टे खरीदे गए हैं। जबकि अटेली में 400 के करीब कट्टे खरीदे गए। - आरके शर्मा, जिला प्रबंधक हैफेड नारनौल।