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मंत्री के प्रयास से लौटी आंखों की रोशनी, मिले तो बोली आपकी तरह बनूंगी

Sat, 19 Mar 2022 11:36 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 19 Mar 2022 11:36 PM IST
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The eyesight returned due to the efforts of the minister, if I get it, I will be like you
गांव पालड़ी पनिहारा में बच्ची लवकेश से बातचीत करते मंत्री ओमप्रकाश यादव। संवाद - फोटो : Narnol
दोनों आंखों से न देख पाने वाली गांव पालड़ी पनिहारा निवासी 9 वर्षीय लवकेश आंखों की रोशनी मिलने के बाद जब सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री से मिली तो मंत्री व लवकेश दोनों भावुक हो गए। इस दृश्य को देेखकर आसपास खड़े लोग भी भावुक होकर मंत्री व लवकेश के बीच हुई बातचीत को बड़े ध्यान से सुन रहे थे। पांच वर्ष पूर्व पिता की सड़क हादसे में मौत होने व माता आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण नाना गांव पालड़ी पनिहारा निवासी देवदत्त ने गत सितंबर 2021 में मंत्री ओमप्रकाश यादव से नारनौल कैंप कार्यालय में मिलकर लवकेश की आंखों के ऑपरेशन की गुहार लगाई थी।
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देवदत्त ने मंत्री से कहा कि बेटी नीतू के पति देवास निवासी राजकुमार का सड़क दुर्घटना में देहांत हो चुका है। यह विधवा बेटी ससुराल में कोई सहारा न होने के कारण मायका में मेरे पास ही रहती है। बेटी नीतू की संतान लवकेश को जन्मजात दोनों आंखों से दिखाई नहीं देता। छोटी बच्ची होने की वजह से किसी अनहोनी के डर से उसके पास 24 घंटे किसी न किसी को रहना पड़ता है। लवकेश अक्सर कहती थी कि नानू मैं भी कभी किताब पढ़ पाऊंगी। इस दुनिया को देख पाऊंगी। नौ साल की नातिन के यह शब्द प्रतिदिन कानों में गूंजते थे और आंखें भर आती थीं। देवदत्त की यह बात सुन भावुक हुए मंत्री ओमप्रकाश यादव ने वादा किया तथा अपने निजी खर्च से दिल्ली के एम्स अस्पताल में बच्ची का ऑपरेशन करवाया। ऑपरेशन के बाद बच्ची को दिखाई देने लगा। संवाद
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गांव पालड़ी मेले में थे मुख्यातिथि तो पहुंचे लवकेश के घर
शुक्रवार शाम को गांव पालड़ी पनिहारा में मेला कार्यक्रम था जिसमें मंत्री ओम प्रकाश यादव को भी जाना था। गांव का नाम सामने आते ही मंत्री को देवदत्त की नातिन लवकेश से मिलने की इच्छा हुई। मंत्री बच्ची लवकेश से मिले और पूछा...बेटी अब आपकी आंखें कैसी हैं। देवदत्त व उसकी बेटी नीतू ने नन्हीं बच्ची के कानों में धीरे से बताया कि यह वहीं हैं, जिन्होंने आपका ऑपरेशन करवाया। यह सुनकर बच्ची की आंखों में चमक आ गई और बोली...मंत्री जी अब मैं भी किताब पढ़कर आपके जैसी मंत्री बनूंगी। यह सुनकर मंत्री जी भावुक हो गए और उस बच्ची को गले लगा लिया। इस दौरान देवदत्त व उनके परिजनों ने मंत्री का आभार जताया और कहा कि यह पल उनके जीवन का अहम यादगार पल रहेगा।
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