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Mahendragarh-Narnaul News: दिन तो काम में कट गया साहब...रात कैसे कटेगी
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फोटो 02 रात को चूल्हे पर खाना पकाते मजदूर दंपती। संवाद
नारनौल। रेलवे स्टेशन पर ढाई साल से चल रहे निर्माण के चलते यहां पर 11 प्रवासी मजदूरों के परिवार अस्थाई निवास बनाकर रह रहे हैं। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जी रहे ये लोग खाना भी एक समय खा पाते हैं। दयनीय जीवन की हद तो तब हो जाती है जब रात में इनके बिस्तर में चूहे और बिच्छू घूस जाते हैं।
ऐसे में थके हारे जब रात को सोना चाहते हैं तो नींद भी पूरी नहीं हो पाती लेकिन अपने परिवार व बच्चों के लिए ये मजदूर हर परेशानी को झेल रहे हैं। इन अस्थाई निवासों के कमरे ऐसे की इंसान सीधा खड़ा हो सकता।
काम खत्म करने के बाद ये मजदूर स्टेशन के आसपास से लकड़ी का जुगाड़ करते हैं ताकि खाना पकाया जा सके। ऐसे में कभी लकड़ी मिलती है और न मिलने की दशा में खरीदकर लानी पड़ती है। बच्चे अपने दादा दादी के पास ही गांव में रहते हैं।
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चूल्हे पर खाना पकातीं हैं महिलाएं
रात करीब साढ़े आठ बजे जब टीम रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो रामसिंह व मंगल सिंह दोनों की पत्नी चूल्हे पर खाना पका रही थी। इनके पति भी इन्हीं के पास बैठकर हाथ सेंक रहे थे। उन्होंने बताया कि उनके अलावा यहां पर यूपी व एमपी के 16-17 परिवार और भी हैं।
रात को चूहे से लगता है डर
यहां रहने वाले मजदूरों ने बताया कि दिन तो काम करते-करते ही निकल जाता है लेकिन रात बड़ी मुश्किल से गुजरती है। उन्होंने बताया कि रात के समय चूहे तो बिस्तर में घुसते ही हैं और तीन चार बार तो बिच्छू भी बिस्तर में घुस चुके हैं। गनीमत ये रही कि कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन इनका डर हमेशा सताता रहता है।
बॉक्स:
9 साल का था, तब से घर से दूर रहकर मजदूरी कर रहा हूं। अब बीवी साथ में है और बच्चा यूपी में घर पर दादा-दादी के साथ ही रहता है। साल में एक बार कुछ दिनों के लिए परिवार से मिलना होता है।-मनीष प्रतापति, मजदूर
बॉक्स:
रात के समय चूहे बहुत परेशान करते हैं और दो तीन बार तो काट भी चुके हैं। ऐसे में उनके डर के कारण रात को ठीक से नींद भी पूरी नहीं हो पाती है।-पवन, मजदूर
बॉक्स:
बच्चों की परवरिश अच्छे से हो जाए, बस ये ही सोचकर घर से दूर मजदूरी कर रहे हैं लेकिन रात में कई बार चूहे व बिच्छू भी बिस्तर में घुस जाते हैं। ऐसे में डर के कारण ठीक से सो भी नहीं पाते हैं।-रोहित, मजदूर
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ऐसे में थके हारे जब रात को सोना चाहते हैं तो नींद भी पूरी नहीं हो पाती लेकिन अपने परिवार व बच्चों के लिए ये मजदूर हर परेशानी को झेल रहे हैं। इन अस्थाई निवासों के कमरे ऐसे की इंसान सीधा खड़ा हो सकता।
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काम खत्म करने के बाद ये मजदूर स्टेशन के आसपास से लकड़ी का जुगाड़ करते हैं ताकि खाना पकाया जा सके। ऐसे में कभी लकड़ी मिलती है और न मिलने की दशा में खरीदकर लानी पड़ती है। बच्चे अपने दादा दादी के पास ही गांव में रहते हैं।
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चूल्हे पर खाना पकातीं हैं महिलाएं
रात करीब साढ़े आठ बजे जब टीम रेलवे स्टेशन पर पहुंची तो रामसिंह व मंगल सिंह दोनों की पत्नी चूल्हे पर खाना पका रही थी। इनके पति भी इन्हीं के पास बैठकर हाथ सेंक रहे थे। उन्होंने बताया कि उनके अलावा यहां पर यूपी व एमपी के 16-17 परिवार और भी हैं।
रात को चूहे से लगता है डर
यहां रहने वाले मजदूरों ने बताया कि दिन तो काम करते-करते ही निकल जाता है लेकिन रात बड़ी मुश्किल से गुजरती है। उन्होंने बताया कि रात के समय चूहे तो बिस्तर में घुसते ही हैं और तीन चार बार तो बिच्छू भी बिस्तर में घुस चुके हैं। गनीमत ये रही कि कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन इनका डर हमेशा सताता रहता है।
बॉक्स:
9 साल का था, तब से घर से दूर रहकर मजदूरी कर रहा हूं। अब बीवी साथ में है और बच्चा यूपी में घर पर दादा-दादी के साथ ही रहता है। साल में एक बार कुछ दिनों के लिए परिवार से मिलना होता है।-मनीष प्रतापति, मजदूर
बॉक्स:
रात के समय चूहे बहुत परेशान करते हैं और दो तीन बार तो काट भी चुके हैं। ऐसे में उनके डर के कारण रात को ठीक से नींद भी पूरी नहीं हो पाती है।-पवन, मजदूर
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बच्चों की परवरिश अच्छे से हो जाए, बस ये ही सोचकर घर से दूर मजदूरी कर रहे हैं लेकिन रात में कई बार चूहे व बिच्छू भी बिस्तर में घुस जाते हैं। ऐसे में डर के कारण ठीक से सो भी नहीं पाते हैं।-रोहित, मजदूर