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पूर्णिमा पर सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में करें स्नान : ऋषिराज
Thu, 14 Nov 2024 11:56 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Thu, 14 Nov 2024 11:56 PM IST
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फोटो संख्या:52- पंडित ऋषि राज शितिकंठा--संवाद
कनीना। कार्तिक माह में आने वाली पूर्णिमा पवित्र मानी गई है। पंडित ऋषि राज शितिकंठा के अनुसार कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 15 नवंबर को सुबह 06:25 बजे शुरू और समापन 16 नवंबर को देर रात को 3: 04 बजे होगा। ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए कार्तिक पूर्णिमा का पर्व 15 नवंबर को मनाया जाएगा।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली भी मनाई जाती है। देव दीपावली को देवताओं कि दीपावली के उत्सव के रूप में जाना जाता है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी में स्नान करना होता है। अगर नदी में स्नान करना संभव नहीं है तो घर पर भी कर सकते हैं। कार्तिक स्नान का आरंभ शरद पूर्णिमा से होता है तथा इसका समापन कार्तिक पूर्णिमा के दिन किया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। धन की देवी माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। कार्तिक पूर्णिमा के दिन मुख्य द्वार पर दीपक जलाना चाहिए।
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कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली भी मनाई जाती है। देव दीपावली को देवताओं कि दीपावली के उत्सव के रूप में जाना जाता है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी में स्नान करना होता है। अगर नदी में स्नान करना संभव नहीं है तो घर पर भी कर सकते हैं। कार्तिक स्नान का आरंभ शरद पूर्णिमा से होता है तथा इसका समापन कार्तिक पूर्णिमा के दिन किया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए। धन की देवी माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए पीपल के पेड़ की पूजा करनी चाहिए। कार्तिक पूर्णिमा के दिन मुख्य द्वार पर दीपक जलाना चाहिए।
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