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Mahendragarh-Narnaul News: स्वामी रामभद्राचार्य ने किया शिव विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन

Sat, 24 Jan 2026 11:23 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 24 Jan 2026 11:23 PM IST
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Swami Rambhadracharya gave a heartfelt description of the Shiva-Parvati wedding ceremony.
फोटो नंबर-30कथा के दौरान  स्वामी  रामभद्राचार्य जी से आशीर्वाद लेते भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहनल
नारनौल। जोरासी श्याम मंदिर में आयोजित 151 कुंडीय सहस्त्र चंडी महायज्ञ व श्रीरामकथा का शनिवार को भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष धर्म सम्राट महंत श्री ज्ञानदास महाराज (हनुमानगढ़ी, अयोध्या) की ओर से दीप प्रज्वलन से की गई। इसके पश्चात जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज ने श्रीराम कथा का विधिवत शुभारंभ किया।
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कथा के प्रथम दिन जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने शिव विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। महाराज जी ने रामकथा के महत्व का भी वर्णन किया। उन्होंने भगवान शिव की अनोखी बारात, माता मैना के भय, भूत-प्रेतों की बारात और शिव के दिव्य स्वरूप धारण करने के प्रसंगों से भक्तों को भावविभोर कर दिया।
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कथा पंडाल में हजारों श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर रामकथा का रसपान किया और भाव-विभोर नजर आए। मंच पर अनेक संत-महात्मा एवं विद्वान उपस्थित रहे। कथा के पहले दिन हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहनलाल बडोली भी कार्यक्रम में पहुंचे।
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उन्होंने कहा कि इस प्रकार के भव्य आयोजन सनातन संस्कृति को मजबूती प्रदान करते हैं और हमारी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हैं। वहीं हरियाणा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने भी रामकथा का श्रवण किया।

प्रशासन को सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए था : महंत संजय दास महाराज
धर्मसम्राट महंत ज्ञानदास के उत्तराधिकारी ने महंत संजय दास महाराज ने पत्रकारों से कहा कि माघ स्नान पर शंकराचार्य और महामंडलेश्वर सहित कई संतजन स्नान के लिए जाते हैं। उन्होंने स्वामी मुक्तेश्वरानंद जी से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि यह बात सामने आई थी कि उनसे चंवर-छत्र हटाकर सामान्य रूप से जाने को कहा गया। उनके साथ उस समय 100 से 200 लोग अवश्य रहे होंगे लेकिन यह कोई महाकुंभ नहीं था, जहां अत्यधिक भीड़ होती है। ऐसे में प्रशासन को संयमित और सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए था। इस अवसर पर रामकथा आयोजन समिति के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास जी महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के महंत मुरली दास जी महाराज, तीनों अनी अखाड़ा के पूर्व प्रधानमंत्री महंत माधव दास महाराज, निर्वाणी अखाड़ा के सचिव महंत सत्यदेव दास महाराज व श्रृंगी ऋषि पीठाधीश्वर महंत हेमंत दास जी सहित अनेक संतजन उपस्थित रहे।
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