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श्रीमद्भागवत साक्षात नारायण का स्वरूप : बजरंग शास्त्री
Sat, 25 Oct 2025 12:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 25 Oct 2025 12:21 AM IST
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फोटो नंबर-35गांव भूषण कलां में भागवत आरती करते श्रद्धालु। स्रोत-आयोजक
नारनौल। समीपवर्ती गांव भूषण कलां में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को भी श्रद्धालुओं ने कथा सुनी।
भागवताचार्य बजरंग शास्त्री महाराज ने कथा का शुभारंभ करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत साक्षात नारायण का स्वरूप है जो मोक्ष प्रदान करने वाली है। उन्होंने कहा कि सत्य में ही राम, कृष्ण और शिव का वास है यही कारण है कि इसे सत्यम शिवम सुंदरम कहा गया है। आचार्य ने बताया कि परिवार का पालन-पोषण करना भी धर्म है, परंतु हर श्वास में प्रभु का स्मरण ही मानव जीवन का परम धर्म है।
कथा में भगवान के 24 अवतारों, व्यास जी, शुकदेव जी, राजा परीक्षित, कुंती स्तुति तथा वराह अवतार की दिव्य लीलाओं का वर्णन किया गया। कथा के अंत में शुकदेव-परीक्षित झांकी प्रस्तुत की गई और सुंदर भजनों पर भक्त झूम उठे। कार्यक्रम के संयोजक विकास जसोरिया ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 12:15 से शाम 4:15 बजे तक आयोजित की जा रही है।
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भागवताचार्य बजरंग शास्त्री महाराज ने कथा का शुभारंभ करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत साक्षात नारायण का स्वरूप है जो मोक्ष प्रदान करने वाली है। उन्होंने कहा कि सत्य में ही राम, कृष्ण और शिव का वास है यही कारण है कि इसे सत्यम शिवम सुंदरम कहा गया है। आचार्य ने बताया कि परिवार का पालन-पोषण करना भी धर्म है, परंतु हर श्वास में प्रभु का स्मरण ही मानव जीवन का परम धर्म है।
कथा में भगवान के 24 अवतारों, व्यास जी, शुकदेव जी, राजा परीक्षित, कुंती स्तुति तथा वराह अवतार की दिव्य लीलाओं का वर्णन किया गया। कथा के अंत में शुकदेव-परीक्षित झांकी प्रस्तुत की गई और सुंदर भजनों पर भक्त झूम उठे। कार्यक्रम के संयोजक विकास जसोरिया ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 12:15 से शाम 4:15 बजे तक आयोजित की जा रही है।
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