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Mahendragarh-Narnaul News: शेर सिंह ने 294 किमी कांवड़ यात्रा की
Fri, 18 Jul 2025 11:52 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 18 Jul 2025 11:52 PM IST
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फोटो संख्या:57- पहली कावड़ लेकर पहुंचा शिवभक्त शेरसिंह--स्रोत- आयोजक
महेंद्रगढ़। नारनौल क्षेत्र के गांव डोहर कलां निवासी 85 वर्षीय सेनानिवृत्त थानेदार शेरसिंह ने श्रद्धा के आड़े उम्र को भी नहीं आने दिया।
शेर सिंह शुक्रवार हरिद्वार से 294 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा कर महेंद्रगढ़ के गांव पाली पहुंचे। आंखों के दो बड़े ऑपरेशन के बाद शेर सिंह ने भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था के चलते यह यात्रा पूरी करने पर परिवार व ग्रामीणों को भी गर्व है।
हरिद्वार से कांवड़ यात्रा पूरी कर शुक्रवार को गांव पाली पहुंचे शेरसिंह ने बताया कि पिछले छह माह के दौरान आंखों के दो बड़े ऑपरेशन हुए हैं। लेकिन भगवान भोलेनाथ की कृपा से अब सही है। पूरे परिवार ने उम्र के इस पड़ाव स्वास्थ्य को देखते उन्हें यात्रा पर जाने को मना किया था।
सबसे अधिक उनके पौत्र वधु प्रिया ने काफी प्रयास किया था कि उन्होंने बार-बार स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों का हवाला देते हुए कांवड़ यात्रा पर जाने से मना किया, लेकिन जब उन्होंने भोलेनाथ की कांवड़ लाने की जिद पकड़ी तो परिवार ने भी पूरा सहयोग किया।
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यह गांव में भी पहली बार हुआ है जब कोई 85 साल की उम्र में कांवड़ यात्रा की हो। वह भगवान शिव का भक्त है और अपने संकल्प के अनुसार यह यात्रा पूरी की है। इस दौरान परिवार के सदस्य भी लगातार फोन के माध्यम से हौसला बढ़ाते रहे।
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शेर सिंह शुक्रवार हरिद्वार से 294 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा कर महेंद्रगढ़ के गांव पाली पहुंचे। आंखों के दो बड़े ऑपरेशन के बाद शेर सिंह ने भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था के चलते यह यात्रा पूरी करने पर परिवार व ग्रामीणों को भी गर्व है।
हरिद्वार से कांवड़ यात्रा पूरी कर शुक्रवार को गांव पाली पहुंचे शेरसिंह ने बताया कि पिछले छह माह के दौरान आंखों के दो बड़े ऑपरेशन हुए हैं। लेकिन भगवान भोलेनाथ की कृपा से अब सही है। पूरे परिवार ने उम्र के इस पड़ाव स्वास्थ्य को देखते उन्हें यात्रा पर जाने को मना किया था।
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सबसे अधिक उनके पौत्र वधु प्रिया ने काफी प्रयास किया था कि उन्होंने बार-बार स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों का हवाला देते हुए कांवड़ यात्रा पर जाने से मना किया, लेकिन जब उन्होंने भोलेनाथ की कांवड़ लाने की जिद पकड़ी तो परिवार ने भी पूरा सहयोग किया।
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यह गांव में भी पहली बार हुआ है जब कोई 85 साल की उम्र में कांवड़ यात्रा की हो। वह भगवान शिव का भक्त है और अपने संकल्प के अनुसार यह यात्रा पूरी की है। इस दौरान परिवार के सदस्य भी लगातार फोन के माध्यम से हौसला बढ़ाते रहे।