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Mahendragarh-Narnaul News: कभी काम के लिए दर-दर भटकीं, अब दूसरों को दे रहीं रोजगार

Wed, 12 Nov 2025 11:25 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Wed, 12 Nov 2025 11:25 PM IST
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She once wandered from door to door in search of work, now she provides employment to others.
फोटो 03 खामोश देवी। संवाद
नारनौल। साल 1989 में महरमपुर गांव में एक फौजी के घर जन्मी खामोश देवी पढ़ना चाहती थी लेकिन जब वह 9वीं कक्षा में थी तो पिता ने शादी करा दी।
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बड़ी मुशिकल से ससुराल में रहते हुए 12वीं तक की ही पढ़ाई कर सकी। ससुराल पक्ष से कई बार मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना सहने के बाद कुछ करने की ठानी और ब्यूटी पार्लर का कोर्स सीखा और 12 सालों की मेहनत के दम पर आज अपना ब्यूटी पार्लर चला रही हैं। खामोश ने बताया कि जब वह 10वीं में पढ़ रही थीं तो बेटे को जन्म दिया लेकिन उसके सिर में पानी भर जाने की कोई बीमारी थी।
इसके चलते इलाज में बहुत रुपये खर्च हुए। उस दौरान सभी ने पैसों को लेकर उसे खूब ताने मारे। तानों से तंग आकर उसने सोच लिया कि कुछ करना है। हालांकि उनका बेटा अब एकदम स्वस्थ है। खामोश ने बताया कि पीएनबी के ग्रामीण स्वरोजगार केंद्र में साल 2014 में एक माह का प्रशिक्षण लिया था।
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इसके बाद 12 सालों तक शहर के जाने माने पार्लरों में धक्के भी खाए, घरों में जाकर भी मेकअप किया। तब कहीं जाकर 2023 में 6 लाख रुपयों की लागत लगाकर महेंद्रगढ़ रोड पर पार्लर खोलने में सफल हुई। खामोश ने बताया कि जहां कोर्स किया था, आज वहीं फ्री में बच्चों को क्लास देने जाती हूं।
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इंसेट
तीन लड़कियां करती हैं काम.
खामोश के पार्लर में फिलहाल तीन युवतियों का स्टाफ है। इनमें से एक को वह फ्री में सीखा रही हैं। इसके अलावा जब से पार्लर शुरू किया है, तब से लेकर अब तक 5 अन्य को सीखा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि अब ससुराल पक्ष भी खुश हैं और हर माह खर्चा निकालकर 30 से 40 हजार की बचत भी हो जाती है। खामोश का मानना है कि महिलाओं को घर में बैठकर समय बर्बाद नहीं करना चाहिए। छोटा या बड़ा कैसा भी काम कर अपना आत्म सम्मान बढ़ाएं व आत्मनिर्भर बन कर दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनें।
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