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पशु चारे(तूड़े) पर धारा 144 बढ़ सकती है पशु पालकों की परेशानी, जिला में नहीं पर्याप्त पशु चारा
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जिले के किसान जरूरत के समय राजस्थान व पंजाब तथा उत्तर प्रदेश से पशु चारे का लेन देने करते थे लेकिन सरकार का पशु चारे (तूड़े) को लेकर प्रदेश में धारा 144 लगाने से चारे का संकट ओर बढ़ सकता है। पिछले 22 सालों में गेहूं का सबसे कम रकबा इस बार रहा है जिसके कारण जिले में पशु चारे का संकट हो गया है।
किसानों का कहना है कि इस बार जिले में पर्याप्त रकबा नहीं होने के कारण तूड़े की कमी है जिसके चलते प्रति एकड़ भाव भी करीब 25 हजार तक पहुंच गए थे। जिला के किसानों की अधिकांश रिश्तेदारी राजस्थान यूपी के साथ-साथ कुछ पंजाब में भी हैं, जरूरत के समय तीन प्रदेशों के पशु पालक आपस में पशु चारे का लेनदेने करते थे। इस बार जिला में पर्याप्त चार नहीं है, ऐसे में सरकार का यह निर्णय पशुपालकों की परेशानी बढ़ाने वाला है। वहीं नहरी पानी के अभाव व भूमिगत जल स्तर अधिक गहराई में जाने से क्षेत्र में गेहूं का रकबा भी साल दर साल घटता जा रहा है।
यह रहा है 21 सालों का रकबे का रिकॉर्ड
वर्ष रकबा एकड़ में
2001-02 122500
2002-03 102500
2003-04 107500
2004-05 102500
2005-06 95000
2006-07 110000
2007-08 117500
2008-09 107500
2009-10 102500
2010-11 115000
2011-12 102500
2012-13 117500
2013-14 115000
2014-15 122500
2015-16 127500
2016-17 120000
2017-18 122500
2018-19 110750
2019-20 91500
2020-21 86500
2021-22 75000
नहरी पानी के अभाव में घट रहा गेहूं का रकबा
जिले में नहरी पानी के अभाव के कारण लगातार गेहूं का रकबा घट रहा है। ऐसे में पशुचारे के लिए पशुपालकों के समक्ष परेेशानी खड़ी हो सकती है। ऐसे में सरकार का यह निर्णय पशुपालकों की परेशानियों को बढ़ाने वाला है। पहले ही तूड़े के भाव आसमान छू रहे हैं आगे की फसल कैसे होगी यह कोई नहीं जानता। पड़ोसी राज्यों से जरूरत के समय चार भेजा भी जाता था ओर मंगाया भी। ऐसे में यह निर्णय सही नहीं है।
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-रामनिवास पाटोदा, समाजसेवी।
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पंजाब से सस्ते भावों में मिल जाता है पशु चारा
पंजाब में पर्याप्त मात्रा में नहरी पानी उपलब्ध है। ऐसे में गेहूं उत्पादन बड़ी मात्रा में होता है। जरूरत के समय जिला के किसान सस्ते दामों पर वहां से पशु चारा लाते थे। लेकिन सरकार ने तूड़े को लेकर ही धारा 144 लगा दी है। जिला में पर्याप्त पशुचारा नहीं है। ऐसे में पशुओं के चारे की पूर्ति कहां से हो पाएगी।
-धर्मपाल नंबरदार, गांव पायगा।
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जरूरत के समय भेजा व मंगाया जाता रहा है पशुचारा
वर्ष 2005 में मानसूनी बरसात नहीं होने के कारण जिला में पशु चारे का संकट खड़ा हो गया था। ऐसे में पंजाब से भारी मात्रा में पशु चारे की खरीद हुई थी। वहीं राजस्थान में भी जब मानसूनी सीजन कमजोर रहता है तो महेंद्रगढ़ जिले से पशु चारा भेजा जाता है लेकिन अब जिले में पर्याप्त पशु चारा नहीं है। ऐसे में पशुचारे के आवागम पर रोक लगाने से पशु पालकों की परेशानी बढ़ेगी।
-मनबीर सिंह अगिहार, पशुपालक।
बाहर से पशुचारा नहीं आएगा तो कहां से होगी पूर्ति
जिला में इस समय पशु चारे की भारी मांग है। जो तूड़ा पिछले पांच वर्षों में 100 से 150 रुपये प्रति मन के हिसाब से मिलता था लेकिन अब यही पशु चारा 500 रुपये प्रति मन तक पहुंच गया है। ऐसे में यदि मानसूनी सीजन में पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं होती है तो यह संकट ओर अधिक बढ़ जाएगा। जिला के 90 प्रतिशत घरों में पशु पालन होती है। वहीं 50 प्रतिशत घरों की आजीविका भी पशु पालन से चलती है। ऐसे में सरकार का यह निर्णय पशुपालकों की परेशानी बढ़ाएगा।
-अशोक यादव, नांगल सिरोही
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किसानों का कहना है कि इस बार जिले में पर्याप्त रकबा नहीं होने के कारण तूड़े की कमी है जिसके चलते प्रति एकड़ भाव भी करीब 25 हजार तक पहुंच गए थे। जिला के किसानों की अधिकांश रिश्तेदारी राजस्थान यूपी के साथ-साथ कुछ पंजाब में भी हैं, जरूरत के समय तीन प्रदेशों के पशु पालक आपस में पशु चारे का लेनदेने करते थे। इस बार जिला में पर्याप्त चार नहीं है, ऐसे में सरकार का यह निर्णय पशुपालकों की परेशानी बढ़ाने वाला है। वहीं नहरी पानी के अभाव व भूमिगत जल स्तर अधिक गहराई में जाने से क्षेत्र में गेहूं का रकबा भी साल दर साल घटता जा रहा है।
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यह रहा है 21 सालों का रकबे का रिकॉर्ड
वर्ष रकबा एकड़ में
2001-02 122500
2002-03 102500
2003-04 107500
2004-05 102500
2005-06 95000
2006-07 110000
2007-08 117500
2008-09 107500
2009-10 102500
2010-11 115000
2011-12 102500
2012-13 117500
2013-14 115000
2014-15 122500
2015-16 127500
2016-17 120000
2017-18 122500
2018-19 110750
2019-20 91500
2020-21 86500
2021-22 75000
नहरी पानी के अभाव में घट रहा गेहूं का रकबा
जिले में नहरी पानी के अभाव के कारण लगातार गेहूं का रकबा घट रहा है। ऐसे में पशुचारे के लिए पशुपालकों के समक्ष परेेशानी खड़ी हो सकती है। ऐसे में सरकार का यह निर्णय पशुपालकों की परेशानियों को बढ़ाने वाला है। पहले ही तूड़े के भाव आसमान छू रहे हैं आगे की फसल कैसे होगी यह कोई नहीं जानता। पड़ोसी राज्यों से जरूरत के समय चार भेजा भी जाता था ओर मंगाया भी। ऐसे में यह निर्णय सही नहीं है।
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-रामनिवास पाटोदा, समाजसेवी।
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पंजाब से सस्ते भावों में मिल जाता है पशु चारा
पंजाब में पर्याप्त मात्रा में नहरी पानी उपलब्ध है। ऐसे में गेहूं उत्पादन बड़ी मात्रा में होता है। जरूरत के समय जिला के किसान सस्ते दामों पर वहां से पशु चारा लाते थे। लेकिन सरकार ने तूड़े को लेकर ही धारा 144 लगा दी है। जिला में पर्याप्त पशुचारा नहीं है। ऐसे में पशुओं के चारे की पूर्ति कहां से हो पाएगी।
-धर्मपाल नंबरदार, गांव पायगा।
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जरूरत के समय भेजा व मंगाया जाता रहा है पशुचारा
वर्ष 2005 में मानसूनी बरसात नहीं होने के कारण जिला में पशु चारे का संकट खड़ा हो गया था। ऐसे में पंजाब से भारी मात्रा में पशु चारे की खरीद हुई थी। वहीं राजस्थान में भी जब मानसूनी सीजन कमजोर रहता है तो महेंद्रगढ़ जिले से पशु चारा भेजा जाता है लेकिन अब जिले में पर्याप्त पशु चारा नहीं है। ऐसे में पशुचारे के आवागम पर रोक लगाने से पशु पालकों की परेशानी बढ़ेगी।
-मनबीर सिंह अगिहार, पशुपालक।
बाहर से पशुचारा नहीं आएगा तो कहां से होगी पूर्ति
जिला में इस समय पशु चारे की भारी मांग है। जो तूड़ा पिछले पांच वर्षों में 100 से 150 रुपये प्रति मन के हिसाब से मिलता था लेकिन अब यही पशु चारा 500 रुपये प्रति मन तक पहुंच गया है। ऐसे में यदि मानसूनी सीजन में पर्याप्त मात्रा में बारिश नहीं होती है तो यह संकट ओर अधिक बढ़ जाएगा। जिला के 90 प्रतिशत घरों में पशु पालन होती है। वहीं 50 प्रतिशत घरों की आजीविका भी पशु पालन से चलती है। ऐसे में सरकार का यह निर्णय पशुपालकों की परेशानी बढ़ाएगा।
-अशोक यादव, नांगल सिरोही