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युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बचाएं : पंकज महाराज
Sun, 23 Jun 2024 11:04 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 23 Jun 2024 11:04 PM IST
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फोटो संख्या:51-रेलवे रोड के पास आयोजित सत्संग में प्रवचन देते पंकज महाराज--स्रोत--आयोजक
महेंद्रगढ़। रेलवे स्टेशन के सामने मैदान में रविवार सुबह 11 बजे सत्संग समारोह का आयोजन किया गया। इसमें जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था मथुरा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज महाराज पहुंचे। उनका रामोतार खैरवाल, हरियाणा संगत के अध्यक्ष बुधराम यादव, जिलाध्यक्ष नरेश कुमार सैनी, रामनिवास ने पुष्पहार भेंट कर स्वागत किया।
सत्संग समारोह में पंकज महाराज ने कहा कि वर्तमान में युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त में फंसते जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश के युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाएं। यही नौजवान बच्चे देश की धरोहर हैं। यदि एक अच्छा समाज बनाना है तो इन बच्चों को नशों से बचाना है।
चौरासी लाख याेनियों में मानव सर्वश्रेष्ठ है इसमें से प्रभु के पास जाने का रास्ता है। देवता तक मानव शरीर पाने की कामना करते हैं। दोनों आंखों के मध्य भाग में आत्मा विराजमान है जिसे संतजन सूरत कहते हैं।
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उन्होंने कहा कि हमारे गुरु महाराज जयगुरुदेव ने जीवात्माओं के कल्याण और अच्छे समाज के निर्माण के लिए अथक परिश्रम किया। गुरु के बिना इस संसार की कोई विद्या नहीं सीख सकते तो गुरु के बिना भवसागर से पार कैसे जा सकते हैं। ऐसे समर्थ गुरु जब भाग्य से मिल जाते हैं तो हमें यह समझाते हैं कि इसी मनुष्य शरीर में प्रभु को पाने का एक दरवाजा है। जिसको तीसरा तिल, ज्ञान चक्षु, शिव नेत्र कहते हैं। ऐसे भेदी गुरु ही अपनी दया करके कलयुग की साधना सुरत-शब्द योग (नाम योग) का मार्ग देकर जीवों से साधना कराकर भवसागर से पार कर देते हैं।
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सत्संग समारोह में पंकज महाराज ने कहा कि वर्तमान में युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त में फंसते जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश के युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाएं। यही नौजवान बच्चे देश की धरोहर हैं। यदि एक अच्छा समाज बनाना है तो इन बच्चों को नशों से बचाना है।
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चौरासी लाख याेनियों में मानव सर्वश्रेष्ठ है इसमें से प्रभु के पास जाने का रास्ता है। देवता तक मानव शरीर पाने की कामना करते हैं। दोनों आंखों के मध्य भाग में आत्मा विराजमान है जिसे संतजन सूरत कहते हैं।
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उन्होंने कहा कि हमारे गुरु महाराज जयगुरुदेव ने जीवात्माओं के कल्याण और अच्छे समाज के निर्माण के लिए अथक परिश्रम किया। गुरु के बिना इस संसार की कोई विद्या नहीं सीख सकते तो गुरु के बिना भवसागर से पार कैसे जा सकते हैं। ऐसे समर्थ गुरु जब भाग्य से मिल जाते हैं तो हमें यह समझाते हैं कि इसी मनुष्य शरीर में प्रभु को पाने का एक दरवाजा है। जिसको तीसरा तिल, ज्ञान चक्षु, शिव नेत्र कहते हैं। ऐसे भेदी गुरु ही अपनी दया करके कलयुग की साधना सुरत-शब्द योग (नाम योग) का मार्ग देकर जीवों से साधना कराकर भवसागर से पार कर देते हैं।

फोटो संख्या:51-रेलवे रोड के पास आयोजित सत्संग में प्रवचन देते पंकज महाराज--स्रोत--आयोजक