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म्हारों संदीप खेला में सोना जीतेगो

Wed, 28 Jul 2021 11:48 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jul 2021 11:48 PM IST
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Sandeep will be win the Gold
म्हारों संदीप खेलामें सोना जीतेगो। यह उम्मीद संदीप पुनिया के पिता प्रीतम से जताई है। ओलंपिक में गोल्ड जीतकर लाने के लिए घर वाले संदीप पुनिया को पूरा मोटिवेट कर रहे हैं। तपती दोपहरी में खेती का काम एवं बकरी चराने के बाद भी संदीप के पिता 65 वर्षीय बुजुर्ग पिता अपने बेटे के पास सप्ताह में दो तीन बार फोन कर लेते हैं और उसको मोटिवेट करते हैं। संदीप ने बताया कि उसके कहा कि स्वास्थ्य का ध्यान रखना, आत्मविश्वास, अपना बेस्ट करके दिखाना। ये तीनों चीजें होने पर उसको जरूर गोल्ड मिलेगा। यह चर्चा उसके पिता गांव में भी करते रहते हैं और ग्रामीणों को भी संदीप से यही उम्मीद है। इसके अलावा ग्रामीण भी व्हाट्सएप कर उसको अग्रिम बधाई दे रहे हैं। संदीप पुनिया ने बताया कि उसकी जाट रेजीमेंट के अधिकारी भी उसको बहुत प्रोत्साहित करते हैं।
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संदीप पुनिया पिछले एक वर्ष से जमकर अभ्यास कर रहे हैं। लगभग आठ महीने से वो बेंगलोर भारतीय खेल प्राधिकरण में जमकर अभ्यास कर रहे हैं। नवंबर माह में वह आखिरी बार अपने गांव सुरेहती जाखल आया था। उसके बाद से वो घर नहीं गए हैं। अब फोन भी इतनी बात वो नहीं करते, केवल सप्ताह में एक बार रविवार को वह अपने परिजनों एवं पत्नी से बात करते हैं। उस समय भी केवल दस से 15 मिनट की बात हो पाती है।
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देश का नंबर वन रेसवॉकर संदीप पुनिया दूसरी बार वॉकिंग में देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है। इस बार क्षेत्रवासियों को गोल्ड मेडल की उम्मीद है। 30 जुलाई की रात को दिल्ली एयरपोर्ट से जापान की राजधानी टोकियो के लिए रवाना होंगे। वहां पर खेल गांव में 5 अगस्त को उसका मैच होगा। भारतीय समय अनुसार यह मैच 1 बजे तथा जापान के समय अनुसार यह मैच शाम साढ़े पांच बजे शुरू होगा।
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गांवों के मेलों में 50 से 100 रुपये की कुश्ती लड़ने वाला संदीप पुनिया टोकियो ओलंपिक खेलों में 20 किलोमीटर रेसवॉकर में अपना दम दिखाएंगे। संदीप भारतीय खेल प्राधिकरण बेंगलोर में प्रतिदिन 35 से 40 किलोमीटर चलकर निरंतर अभ्यास कर रहे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने की वजह से बचपन से उसको संघर्ष करना पड़ा है। मात्र सात वर्ष की उम्र में मां का साया सिर से उठ गया। घर में कोई रोजगार नहीं था मात्र पशुपालन एवं खेती कर घर का गुुजारा चला रहे थे। संदीप पुनिया ने बताया कि वो दिन में दो एकड़ जमीन ऊंट से जोत देते थे और बकरी भी चराई हैं। फसल कटाई के समय भी वो परिवार की पूरी सहायता करते थे। स्कूल से आने के बाद अधिकतर समय उनका खेत में ही बीतता था। थोड़ा बहुत कुश्ती करना जानते थे तो वो गांवों के मेलों में 50 से 100 रुपये की कुश्ती करते। जो पैसे आते उससे घर खर्च में प्रयोग कर लेते थे। 2006 में रावतुलाराम खेल स्टेडियम में ओपन भर्ती में उनका चयन हो गया। उसके बाद वहां उनकी मुलाकात रेसवॉकर कोच से हुई उन्होंने ही उसको रेसवॉक के लिए तैयार किया।
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