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Mahendragarh-Narnaul News: साबी नदी का पुल फिर खुला, नारनौल-अलवर सफर हुआ आसान
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फोटो नंबर- 10मरम्मत कार्य के बाद पुल से गुजरते वाहन। संवाद
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नारनौल। नारनौल-अलवर-बहरोड़ स्टेट हाईवे-14 पर सोडावास और कारोड़ा के बीच साबी नदी पर बने पुराने पुल से करीब एक महीने बाद फिर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। करीब 1 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से पुल की मरम्मत कर इसे 31 अगस्त को सभी वाहनों के लिए खोल दिया गया।
राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने पुल की मरम्मत का काम 20 जुलाई को शुरू किया था। करीब एक महीने चले कार्य के दौरान पुल के आठ मुख्य जॉइंट्स की मरम्मत की गई। इसके बाद जॉइंट्स पर मैस्टिक कोट चढ़ाकर उन्हें मजबूत किया गया। मरम्मत पूरी होने के बाद प्रशासन ने पुल को यातायात के लिए खोल दिया।
पुल बंद होने के दौरान प्रशासन ने यातायात जारी रखने के लिए सोडावास की एक बस्ती से होकर कच्चा वैकल्पिक रास्ता बनवाया था। रास्ता संकरा होने के कारण यहां दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती थी। इससे नारनौल और अलवर के बीच चलने वाली रोडवेज बसें भी प्रभावित हुईं।
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साबी नदी पर बना यह पुल वर्ष 1990 में तैयार हुआ था। करीब 36 साल पुराने पुल पर लगातार बढ़ते यातायात और रखरखाव की कमी से जर्जर स्थिति पैदा हो गई थी। प्रशासन ने समय रहते पुल पर वाहनों की आवाजाही रोककर मरम्मत करवाई, जिससे संभावित हादसे को टाला जा सका।
30 से 40 मिनट की देरी से पहुंच रही थीं बसें
नारनौल-अलवर के बीच रोजाना 14 रोडवेज बसें चलती हैं। वैकल्पिक रास्ते पर जाम के कारण बसें 30 से 40 मिनट की देरी से गंतव्य तक पहुंच रही थीं। अब पुल खुलने से बसों का संचालन फिर निर्धारित समय के अनुसार होने लगा है।
वर्जन:
राजस्थान प्रशासन ने करीब एक माह बाद पुल को दोबारा आवागमन के लिए खोल दिया है। अब डिपो की सभी बसें अपने निर्धारित समय पर अलवर आ जा रही हैं।-ब्रह्मप्रकाश, मुख्य निरीक्षक, डिपो नारनौल
वर्जन:
काफी पुराना होने के कारण पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। अब इसकी मरम्मत बेहतरीन व तय मानकों के अनुसार करवाई गई है और उम्मीद है कि अब कई सालों तक पुल पर आवागमन सुचारू रहेगा। -डॉ. आर्तिका शुक्ला, जिला कलेक्टर, अलवर
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राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने पुल की मरम्मत का काम 20 जुलाई को शुरू किया था। करीब एक महीने चले कार्य के दौरान पुल के आठ मुख्य जॉइंट्स की मरम्मत की गई। इसके बाद जॉइंट्स पर मैस्टिक कोट चढ़ाकर उन्हें मजबूत किया गया। मरम्मत पूरी होने के बाद प्रशासन ने पुल को यातायात के लिए खोल दिया।
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पुल बंद होने के दौरान प्रशासन ने यातायात जारी रखने के लिए सोडावास की एक बस्ती से होकर कच्चा वैकल्पिक रास्ता बनवाया था। रास्ता संकरा होने के कारण यहां दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती थी। इससे नारनौल और अलवर के बीच चलने वाली रोडवेज बसें भी प्रभावित हुईं।
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साबी नदी पर बना यह पुल वर्ष 1990 में तैयार हुआ था। करीब 36 साल पुराने पुल पर लगातार बढ़ते यातायात और रखरखाव की कमी से जर्जर स्थिति पैदा हो गई थी। प्रशासन ने समय रहते पुल पर वाहनों की आवाजाही रोककर मरम्मत करवाई, जिससे संभावित हादसे को टाला जा सका।
30 से 40 मिनट की देरी से पहुंच रही थीं बसें
नारनौल-अलवर के बीच रोजाना 14 रोडवेज बसें चलती हैं। वैकल्पिक रास्ते पर जाम के कारण बसें 30 से 40 मिनट की देरी से गंतव्य तक पहुंच रही थीं। अब पुल खुलने से बसों का संचालन फिर निर्धारित समय के अनुसार होने लगा है।
वर्जन:
राजस्थान प्रशासन ने करीब एक माह बाद पुल को दोबारा आवागमन के लिए खोल दिया है। अब डिपो की सभी बसें अपने निर्धारित समय पर अलवर आ जा रही हैं।-ब्रह्मप्रकाश, मुख्य निरीक्षक, डिपो नारनौल
वर्जन:
काफी पुराना होने के कारण पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। अब इसकी मरम्मत बेहतरीन व तय मानकों के अनुसार करवाई गई है और उम्मीद है कि अब कई सालों तक पुल पर आवागमन सुचारू रहेगा। -डॉ. आर्तिका शुक्ला, जिला कलेक्टर, अलवर