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मांगों को लेकर रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने महाप्रबंधक को ज्ञापन सौंपा
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मांगों को लेकर जीएम कार्यालय के कर्मचारी को ज्ञापन सौंपते रोडवेज यूनियन के पदाधिकारी। संवाद
- फोटो : Narnol
रोडवेज कर्मचारी यूनियन हरियाणा संबंधित हरियाणा कर्मचारी महासंघ ने सोमवार को परिवहन विभाग के निजीकरण सहित अन्य मांगों को लेकर रोडवेज महाप्रबंधक के नाम उनके कार्यालय कर्मचारी को एक ज्ञापन सौंपा।
नारनौल डिपो प्रधान अनिल भीलवाड़ा ने बताया कि राज्य परिवहन एक जन विभाग है, जोकि रियायत छूट आधार पर सुविधाजनक यात्रियों को यात्रा प्रदान कर रहा है। हरियाणा राज्य परिवहन विभाग आम जनता को सरल सुरक्षित सुविधा देने के लिए बनाया गया है। एशिया महाद्वीप के 67 उपक्रमों में कम लागत पर जनता को सुरक्षित सरल सुविधा देने में हरियाणा राज्य परिवहन प्रथम स्थान पर है, मगर सरकार परिवहन विभाग का निजीकरण करने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार स्टेज कैरिज स्कीम 2016 को रद्द करने व लंबित मांगों को लागू करने के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने आज ज्ञापन सौंपकर विभाग के निजीकरण पर रोक लगाने, स्टेज स्कीम कैरिज स्कीम 2016 के खिलाफ तर्कों सहित लिखित सुझाव दिए।
डिपो प्रधान अनिल भीलवाड़ा ने बताया कि छात्र-छात्राओं, जनप्रतिनिधियों, आम जनता व रोडवेज कर्मचारियों की परिवहन विभाग के निजीकरण की मांग नहीं है। फिर भी सरकार निजी बसों को लंबे रूट परमिट दे रही है। जिससे विभाग खत्म हो जाएगा और सरकार को राजस्व की भी हानि होगी। निजी बस प्रतिमाह सरकार को एक मुक्त किश्त 12000 टैक्स दे रही है। जबकि हरियाणा रोडवेज की एक बस प्रतिमाह 40 से 60 हजार टैक्स दे रही है। स्टेज कैरीज स्कीम के तहत मुख्य मार्गों पर परमिट देना मोटर एक्ट व्हीकल का उल्लंघन है। परिवहन विभाग के निजीकरण व प्राइवेट बसें चलाने से जनता को बेहतर सुरक्षित परिवहन सेवा नहीं मिलेगी। स्थायी रोजगार के अवसर समाप्त हो जाएंगे। सरकार रोडवेज कर्मचारियों के विरोध के चलते निवर्तमान परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार की अध्यक्षता में 13 जून 2017 को ही मीटिंग में स्टेज कैरिज को रद्द कर चुकी है। मगर अब सरकार स्कीम को लागू करके वादाखिलाफी कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार जन हितैषी है तो विभाग में बढ़ती आबादी अनुसार 14000 सरकारी बसें शामिल करें। ताकि आम जनता, छात्र-छात्राओं को बेहतर और सुरक्षित सुविधा मिलने के साथ-साथ बेरोजगार को स्थायी रोजगार मिल सके। इस अवसर पर उप प्रधान रामफल राता, सचिव कर्मवीर गाहड़ा, संगठन सचिव रतिराम, कोषाध्यक्ष रवींद्र छापड़ा, प्रवक्ता राजेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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नारनौल डिपो प्रधान अनिल भीलवाड़ा ने बताया कि राज्य परिवहन एक जन विभाग है, जोकि रियायत छूट आधार पर सुविधाजनक यात्रियों को यात्रा प्रदान कर रहा है। हरियाणा राज्य परिवहन विभाग आम जनता को सरल सुरक्षित सुविधा देने के लिए बनाया गया है। एशिया महाद्वीप के 67 उपक्रमों में कम लागत पर जनता को सुरक्षित सरल सुविधा देने में हरियाणा राज्य परिवहन प्रथम स्थान पर है, मगर सरकार परिवहन विभाग का निजीकरण करने पर तुली हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार स्टेज कैरिज स्कीम 2016 को रद्द करने व लंबित मांगों को लागू करने के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने आज ज्ञापन सौंपकर विभाग के निजीकरण पर रोक लगाने, स्टेज स्कीम कैरिज स्कीम 2016 के खिलाफ तर्कों सहित लिखित सुझाव दिए।
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डिपो प्रधान अनिल भीलवाड़ा ने बताया कि छात्र-छात्राओं, जनप्रतिनिधियों, आम जनता व रोडवेज कर्मचारियों की परिवहन विभाग के निजीकरण की मांग नहीं है। फिर भी सरकार निजी बसों को लंबे रूट परमिट दे रही है। जिससे विभाग खत्म हो जाएगा और सरकार को राजस्व की भी हानि होगी। निजी बस प्रतिमाह सरकार को एक मुक्त किश्त 12000 टैक्स दे रही है। जबकि हरियाणा रोडवेज की एक बस प्रतिमाह 40 से 60 हजार टैक्स दे रही है। स्टेज कैरीज स्कीम के तहत मुख्य मार्गों पर परमिट देना मोटर एक्ट व्हीकल का उल्लंघन है। परिवहन विभाग के निजीकरण व प्राइवेट बसें चलाने से जनता को बेहतर सुरक्षित परिवहन सेवा नहीं मिलेगी। स्थायी रोजगार के अवसर समाप्त हो जाएंगे। सरकार रोडवेज कर्मचारियों के विरोध के चलते निवर्तमान परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार की अध्यक्षता में 13 जून 2017 को ही मीटिंग में स्टेज कैरिज को रद्द कर चुकी है। मगर अब सरकार स्कीम को लागू करके वादाखिलाफी कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार जन हितैषी है तो विभाग में बढ़ती आबादी अनुसार 14000 सरकारी बसें शामिल करें। ताकि आम जनता, छात्र-छात्राओं को बेहतर और सुरक्षित सुविधा मिलने के साथ-साथ बेरोजगार को स्थायी रोजगार मिल सके। इस अवसर पर उप प्रधान रामफल राता, सचिव कर्मवीर गाहड़ा, संगठन सचिव रतिराम, कोषाध्यक्ष रवींद्र छापड़ा, प्रवक्ता राजेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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