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Mahendragarh-Narnaul News: कचरा साफ करने के टेंडर में ही उठे सवाल, अयोग्य एजेंसी ने मांगी दोबारा जांच
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फोटो नंबर-22नारनौल के रघुनाथपुरा में बना डंपिंग यार्ड। संवाद
नारनौल। शहरों के ठोस कचरे के प्रसंस्करण के लिए जारी टेंडर अब सवालों के घेरे में आ गया है। तकनीकी बोली में अयोग्य घोषित की गई एजेंसी ने टेंडर प्रक्रिया पर ही सवाल उठाते हुए अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग की है। एजेंसी ने तकनीकी बोली में योग्य घोषित करने या पूरी प्रक्रिया के लिए दोबारा टेंडर कराने की मांग की है।
हाई टेक सिक्योरिटी सर्विसेज, जींद और एएस टेक्नो ग्रीन सर्विस की ओर से जिला नगर आयुक्त महेंद्रगढ़, स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक सहित नगर परिषद के अधिकारियों और सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजा गया है।
नगर परिषद नारनौल की ओर से 23 जून 2026 को ठोस कचरा प्रसंस्करण के लिए टेंडर जारी किया गया था। इसमें नारनौल के साथ कनीना, अटेली मंडी, नांगल चौधरी और महेंद्रगढ़ को भी शामिल किया गया है।
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एजेंसी का कहना है कि उसने टेंडर में मांगे गए सभी दस्तावेज ऑनलाइन जमा किए थे। 4 अगस्त को परिषद ने कुछ दस्तावेजों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा, जिसका जवाब उसी दिन ई-मेल से और अगले दिन भौतिक रूप से भी जमा कराया गया। एजेंसी ने पॉजिटिव नेटवर्थ समेत अन्य जरूरी दस्तावेज देने का भी दावा किया है। इसके बावजूद 27 अगस्त को उसे तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया।
एजेंसी का आरोप है कि वह सभी शर्तें पूरी करती थी और उसे बाहर करना उचित नहीं था। उसका यह भी दावा है कि दो कंपनियों को प्रक्रिया में बुलाया गया जबकि उनके रेट अधिक थे और एजेंसी के रेट कम थे। इसी आधार पर उसने जांच और दोबारा टेंडर की मांग की है।
नगर परिषद ने कहा-पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन
नगर आयुक्त रणबीर सिंह ने कहा कि ठोस कचरा प्रसंस्करण का टेंडर नियमानुसार किया गया है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। ऐसे में अब एजेंसी के आरोपों और परिषद के दावे के बीच पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों का जवाब आगे की जांच से ही साफ होगा।
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हाई टेक सिक्योरिटी सर्विसेज, जींद और एएस टेक्नो ग्रीन सर्विस की ओर से जिला नगर आयुक्त महेंद्रगढ़, स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक सहित नगर परिषद के अधिकारियों और सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजा गया है।
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नगर परिषद नारनौल की ओर से 23 जून 2026 को ठोस कचरा प्रसंस्करण के लिए टेंडर जारी किया गया था। इसमें नारनौल के साथ कनीना, अटेली मंडी, नांगल चौधरी और महेंद्रगढ़ को भी शामिल किया गया है।
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एजेंसी का कहना है कि उसने टेंडर में मांगे गए सभी दस्तावेज ऑनलाइन जमा किए थे। 4 अगस्त को परिषद ने कुछ दस्तावेजों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा, जिसका जवाब उसी दिन ई-मेल से और अगले दिन भौतिक रूप से भी जमा कराया गया। एजेंसी ने पॉजिटिव नेटवर्थ समेत अन्य जरूरी दस्तावेज देने का भी दावा किया है। इसके बावजूद 27 अगस्त को उसे तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित कर दिया गया।
एजेंसी का आरोप है कि वह सभी शर्तें पूरी करती थी और उसे बाहर करना उचित नहीं था। उसका यह भी दावा है कि दो कंपनियों को प्रक्रिया में बुलाया गया जबकि उनके रेट अधिक थे और एजेंसी के रेट कम थे। इसी आधार पर उसने जांच और दोबारा टेंडर की मांग की है।
नगर परिषद ने कहा-पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन
नगर आयुक्त रणबीर सिंह ने कहा कि ठोस कचरा प्रसंस्करण का टेंडर नियमानुसार किया गया है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। ऐसे में अब एजेंसी के आरोपों और परिषद के दावे के बीच पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों का जवाब आगे की जांच से ही साफ होगा।