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11 दिन में 3 हजार केस पर सुनवाई लटकी

Mon, 12 Aug 2019 12:06 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 12 Aug 2019 12:06 AM IST
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protest
। पिछले 11 दिनों से जारी अधिवक्ताओं की हड़ताल से तीन हजार केस प्रॉक्सी हो गए हैं। हड़ताल के कारण अधिवक्ता कोर्ट नहीं पहुंच रहे। दोनों ही कोर्टों में सन्नाटा छाया रहता है। प्रतिदिन दोनों ही कोर्ट में लगभग 300 केस आ रहे हैं जिससे मुवक्किल को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। अभी हड़ताल कब तक चलेगी, इसके बार में कुछ कहा नहीं जा सकता, क्योंकि रविवार को धरना उठाने के लिए पहुंचे शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा, लोक निर्माण मंत्री राव नरबीर सिंह तथा सांसद के आश्वासन से भी नहीं माने थे।
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बता दें कि एक अगस्त से बार की बिल्डिंग और कोर्ट में सन्नाटा छाया हुुआ है। बार के चारों साइडों के रास्ते बंद हैं। प्रतिदिन आने वाले मुवक्किलों को तारीख पर तारीख मिलती जा रही है। महेंद्रगढ़ कोर्ट में सिविल तथा आपराधिक मामले के चल रहे हैं। दोनों कोर्ट में 150-150 केसों की सुनवाई होती है परंतु हड़ताल के चलते अब इन केसों की कोई पैरवी नहीं कर रहा। पिछले 11 दिनों से फैमिली कोर्ट और एडीजे कोर्ट की मांग को लेकर हड़ताल पर बैठे हुए हैं। दो दिन से वो मुख्यालय की मांग भी करने लगे हैं।
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आठ वर्ष में छह से हुई दो कोर्ट:
नया ज्यूडिशियल कॉम्पलेक्स बनने के बाद महेंद्रगढ़ में लगभग छह कोर्ट चलती थी। अब महेंद्रगढ़ में मात्र दो कोर्ट ही बची हैं। अधिवक्ताओं ने बताया कि एक जज के पास हजार-हजार फाइलें हैं। हालत यह है कि मुवक्किल को फरवरी 2020 की तारीख दी जा रही हैं। कोर्ट कम होने के कारण मुवक्किल को लंबी तारीख मिल रही है। जिन केसों का कम समय में निपटारा होना चाहिए उनमें काफी समय लग रहा है।
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आधार संरचना तैयार, आदेश की जरुरत :
कोर्ट के अंदर फैमिली और एडीजे कोर्ट के लिए आधार संरचना तैयार है। सरकार को भवन के लिए एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ेगा। क्योंकि ज्यूडिशियल कॉम्पलेक्स महेंद्रगढ़ में स्पेस की कमी नहीं है। इससे पहले भी छह कोर्ट चल रही थीं। इतना ही नहीं जजों के लिए छह नए क्वार्टर भी बना दिए गए हैं जिनका अभी उद्घाटन नहीं हुआ है। अधिवक्ताओं का कहना है कि हाई कोर्ट से हरी झंडी मिली चुकी है। अब प्रदेश सरकार के आदेशों का इंतजार है। जो देरी अब हो रही है वो प्रदेश सरकार की ओर से हो रही है।
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