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Mahendragarh-Narnaul News: निजी स्कूलों को 17 मार्च तक पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी सीटें

Sun, 15 Mar 2026 11:17 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 15 Mar 2026 11:17 PM IST
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Private schools must upload seat details to the portal by March 17.
फोटो नंबर-16जिला ​शिक्षा अ​धिकारी कार्यालय नारनौल।
नारनौल। आरटीई के तहत निजी स्कूलों को नर्सरी कक्षा में दाखिले के लिए 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होंगी। निजी स्कूलों को 17 मार्च तक पोर्टल पर सीटें अपलोड करनी होगी। इन सीटों पर बीपीएल, अनाथ, वीरांगनाओं के बच्चे निशुल्क प्रवेश कराया जाएगा।
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जिले के 245 निजी स्कूल आरटीई योजना के अंतर्गत आते हैं। इन स्कूलों को 17 मार्च तक अपनी उपलब्ध सीटों की जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
इसके बाद 18 से 24 मार्च तक जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा स्कूलों के मान्यता संबंधी दस्तावेजों की जांच की जाएगी। 25 से 30 मार्च तक स्कूलों द्वारा दी गई सीटों की जानकारी का सत्यापन किया जाएगा।
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इसके उपरांत 31 मार्च से 7 अप्रैल तक अभिभावक अपने बच्चों के दाखिले के लिए उज्ज्वल पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। 9 अप्रैल को ड्रा के माध्यम से परिणाम घोषित कर विद्यार्थियों को स्कूलों का आवंटन किया जाएगा।
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चयनित विद्यार्थियों का दाखिला 10 अप्रैल से 23 अप्रैल तक संबंधित स्कूलों में कराया जाएगा। यदि इसके बाद भी सीटें खाली रहती हैं तो 30 अप्रैल से 5 मई तक वेटिंग सूची में शामिल बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों को निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया है। सरकारी स्कूलों में पहले से ही मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था है। वहीं निजी स्कूलों में भी चिराग योजना के माध्यम से दाखिले की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
विभाग के अनुसार नर्सरी में दाखिला लेने वाले बच्चे अपने निवास से एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले स्कूलों में ही प्रवेश ले सकेंगे और उनका यह दाखिला आठवीं कक्षा तक मान्य रहेगा।
इस अवधि में उनकी शिक्षा का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी। यदि कोई स्कूल आरटीई के तहत बच्चों को दाखिला देने से मना करता है तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

वर्जन:
आरटीई के तहत नर्सरी कक्षा के लिए निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें संरक्षित कर बच्चों को दाखिला दिया जाता है। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। -सुनील दत्त, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, नारनौल
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