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Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   Place restrictions on overloaded vehicles, or else I will jump tower

ओवरलोड वाहनों पर लगाओ पाबंदी, वरना कूद जाऊंगा टावर से

Fri, 16 May 2014 01:14 AM IST
नारनौल
नारनौल Updated Fri, 16 May 2014 01:14 AM IST
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साहब ओवर लोड वाहनों की उड़ती धूल से पिता गंवा चुका हूं। मां की हालात गंभीर है। पिता के चले जाने से उसका जीवन भी धुएं जैसे उड़ने लगा है। इस उड़ती धूल से खफा होकर कई बार अधिकारियों से भी समाधान के लिए गुहार लगा चुका हूं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
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अब इसी मजबूरी से मैंने मोबाइल टावर पर चढ़कर नीचे कूदने की सोची। अगर 24 घंटे में ओवरलोड वाहनों पर इस तरफ पाबंदी नहीं लगाई तो सही में टावर से कूद जाऊंगा।
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दुख भरी यह दास्तां धौलेड़ा गांव के निवासी हरिशचंद्र ने बृहस्पतिवार की सुबह मोबाइल टावर पर चढ़कर सुनाई। दरअसल, ओवर लोड वाहनों के आवागमन की धूल से ग्रामीणों का जीवन यहां दुभर हो रहा है। धूल सांस के साथ फेफड़ों में जमा हो रही है।
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इसके प्रभाव से ग्रामीण टीबी, दमा, आंख, एलर्जी आदि बीमारियों से पीड़ित होने लगे हैं। समाधान को लेकर ग्रामीण मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, डीसी व एसपी आदि उच्चाधिकारियों को लिखित शिकायत भेज चुके हैं लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।


इसी से परेशान हरिशचंद्र बृहस्पतिवार को करीब 6 बजे बीएसएनएल के मोबाइल टावर पर चढ़ गया। उसने ओवर लोड वाहनों के खिलाफ कार्रवाई, बिजली-पानी व्यवस्था करवाने की गुहार लगाई। 24 घंटे में सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित द्वारा कूदने की चेतावनी दी गई।

मौके पर एकत्रित ग्रामीणों ने घटना की जानकारी प्रशासनिक अधिकारियों को दी। इसके बाद थाना प्रभारी नरेंद्र कुमार घटना स्थल पर पहुंचे। एसएचओ नरेंद्र कुमार ने पीड़ित को समझाकर टावर के नीचे उतारने की कोशिश की लेकिन हरिश्चंद्र डीसी को मौके पर बुलाने की जिद्द पर अड़ा रहा।

इसके बाद नायब तहसीलदार, सिंचाई विभाग के एसडीओ, बिजली निगम के एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, बीएसएनएल के डीईटी ईश्वर सिंह यादव धौलेड़ा पहुंचे। उन्होंने पीड़ित को लिखित आश्वासन देकर टावर से उतारने का प्रयास किया।


 10 साल से नारकीय जीवन जी रहे ग्रामीण
पीड़ित हरिश्चंद्र ने कहा कि ग्रामीण ओवर लोड वाहनों द्वारा उड़ाए जा रहे धूल और क्रेशर से निकलने वाली धूल से पिछले 10 साल से नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। उसने कहा कि अधिकारी एक घंटे यहां रहकर दिखाएं तो मोबाइल टावर से स्वयं नीचे उतर जाऊंगा। उसने बताया कि डस्ट के कारण ग्रामीण टीबी के शिकार होने लगे हैं। पिछले दिनों पिता रामचंद्र टीबी से पीड़ित होकर जान गवां चुके हैं। अब मां की हालात गंभीर है। इसलिए मजबूरी वश टावर से कूदने की योजना बनाई है।


 बोली मां, बेटा उतर जाओ, मेरा बुढ़ापा खराब हो जाएगा
बेटे हरिश्चंद्र को टावर पर चढ़ते देख बीमार मां लालीदेवी घबरा गईं। उन्होंने कहा, सड़क पर उड़ती धूल से पति रामचंद्र को गवां चुकी हूं। अब तुम्हारे मरने के बाद बुढ़ापा खराब हो जाएगा। बेटा सही सलामत नीचे उतर जाओ। मां की अपील पर ग्रामीण भी भावुक हो गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इससे पहले करीब 11 बजे विधवा मां ने धोलेड़ा-नारनौल सड़क मार्ग को जाम किया, लेकिन गांव के ही ग्रामीणों ने आपसी सूझबूझ से काम लेते हुए दोपहर साढ़े बारह बजे जाम खोल दिया।


डीडीपीओ के आश्वासन के बाद उतरा युवक
डीडीपीओ दीपक यादव दोपहर करीब साढ़े बाहर बजे घटना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित की विभिन्न समस्याओं को गंभीर ठहराया। उन्होंने कहा कि डीसी के आदेश पर ही वह यहां आए हैं। आपकी हर समस्या को डीसी के सामने रखा जाएगा। इसके बाद उन्होंने 15 दिन के अंदर समाधान का लिखित पत्र हरिशचंद्र को दिया, तब कहीं जाकर परेशान हरिशचंद्र टावर से उतरा।

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