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पेट्रोल 101 के पार, अब होने लगा बसों का इंतजार, बस स्टैंड पर बढ़ गई यात्रियों की संख्या
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महेंद्रगढ़। पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ी रही कीमतों के कारण महेंद्रगढ़ बस स्टैंड से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या भी पिछले कुछ दिनों में 1500 तक बढ़ गई है। पिछले माह महेंद्रगढ़ बस स्टैंड से प्रतिदिन करीब 3 हजार यात्री सफर करते थे उनकी संख्या भी अब बढ़कर 4500 हो गई है।
वहीं विद्यार्थियों ने भी हर माह मिलने वाली स्कूटी के पेट्रोल व अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए पॉकेट मनी को खर्च करना मुनासिब नहीं समझा है। जो विद्यार्थी पॉकेट मनी के रूप में मिलने वाले पैसे से बाइक व स्कूटी में पेट्रोल डलवाकर शिक्षण संस्थानों में पहुंचते थे वे भी अब सार्वजनिक वाहनों का सहारा ले रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के बस स्टैंडों पर भी बसों का इंतजार करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। दैनिक कार्यों में बाइक का प्रयोग करने वाले युवाओं ने भी बाइकों का सहारा लेना छोड़ दिया है। किसानों को भी लगातार डीजल व पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है। ऐसे में जो किसान किराए पर खेतों की जुताई कराते थे वे भी पिछले दो सालों में दोगुने रेट होने से परेशान हैं।
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- बसों का लिया सहारा:
लगातार बढ़ते दामों से पॉकेट मनी में काम चलाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में स्कूटी छोड़ बस का सहारा लेना पड़ गया। लगातार बढ़ती कीमतों के चलते अब स्कूटी चलाना महंगा हो गया है। ऑटो से कालेज पहुंचने में देरी भी हो जाती है। ऑटो चालक भी मनमर्जी से चलते हैं। - छात्रा तन्नू जांगड़ा, पाली
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- स्कूटी छोड़ ऑटो का लिया सहारा:
पहले परिजन बाइक पर कॉलेज छोड़ने आते थे। अब पैैट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण ऑटो व राज्य परिवहन की बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। बढ़ती कीमतों से आम आदमी परेशान है। सरकार को इसके लिए कोई पॉलिसी बनाकर नियंत्रण करना होगा। - छात्रा आरती, पहाड़वास
- दैनिक कार्यों में छोड़ा बाइक का प्रयोग:
पहले जहां दैनिक कार्यों में दिनभर बाइक का प्रयोग करता था अब बाइक की बजाए ग्रामीण कार्यों को निपटाने के लिए साइकिल का प्रयोग कर रहा हूूं। पिछले कुछ दिनों से पैट्रोल के भावों में लगातार वृद्धि होने से आम आदमी पर इसका अतिरिक्त आर्थिक भार भी बढ़ गया है। - कर्मपाल यादव, सीगड़ा
- अब लिया बसों का सहारा:
पहले जहां शहर के कार्यों के लिए प्रतिदिन बाइक का प्रयोग होता था अब बसों के सहारे काम निपटाए जा रहे हैं। यूं ही पैट्रोल-डीजन के दामों में वृद्धि होती गई तो आम आदमी का वाहन चलाना भी मुश्किल हो जाएगा। - अशोक यादव, नांगल सिरोही
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- बाइक चलाना हुआ महंगा:
पिछले कुछ दिनों से पैट्रोल-डीजल के भावों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में बाइक चलाना महंगा हो गया है। पहले जहां छोटे-मोटे कामों के लिए बाइक का प्रयोग होता था अब वह धीरे-धीरे कम कर दिया है। 50 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने के लिए बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। - सतीश कुमार, राठीवास
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- महंगी हुई खेती:
पिछले दो सालों में जुताई सहित अन्य कृषि कार्यों के लिए रेट दोगुने हो गए हैं। डीजल व पैट्रोल के भावों में हो रही वृद्धि भी अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ रहा है। दो वर्ष पूर्व जुताई के जो रेट 350 थे वह अब 600 से भी अधिक हो गए हैं। ऐसे में किसानों पर आर्थिक भार भी बढ़ रहा है।
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वहीं विद्यार्थियों ने भी हर माह मिलने वाली स्कूटी के पेट्रोल व अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए पॉकेट मनी को खर्च करना मुनासिब नहीं समझा है। जो विद्यार्थी पॉकेट मनी के रूप में मिलने वाले पैसे से बाइक व स्कूटी में पेट्रोल डलवाकर शिक्षण संस्थानों में पहुंचते थे वे भी अब सार्वजनिक वाहनों का सहारा ले रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के बस स्टैंडों पर भी बसों का इंतजार करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। दैनिक कार्यों में बाइक का प्रयोग करने वाले युवाओं ने भी बाइकों का सहारा लेना छोड़ दिया है। किसानों को भी लगातार डीजल व पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से आर्थिक परेशानी उठानी पड़ रही है। ऐसे में जो किसान किराए पर खेतों की जुताई कराते थे वे भी पिछले दो सालों में दोगुने रेट होने से परेशान हैं।
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- बसों का लिया सहारा:
लगातार बढ़ते दामों से पॉकेट मनी में काम चलाना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में स्कूटी छोड़ बस का सहारा लेना पड़ गया। लगातार बढ़ती कीमतों के चलते अब स्कूटी चलाना महंगा हो गया है। ऑटो से कालेज पहुंचने में देरी भी हो जाती है। ऑटो चालक भी मनमर्जी से चलते हैं। - छात्रा तन्नू जांगड़ा, पाली
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- स्कूटी छोड़ ऑटो का लिया सहारा:
पहले परिजन बाइक पर कॉलेज छोड़ने आते थे। अब पैैट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण ऑटो व राज्य परिवहन की बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। बढ़ती कीमतों से आम आदमी परेशान है। सरकार को इसके लिए कोई पॉलिसी बनाकर नियंत्रण करना होगा। - छात्रा आरती, पहाड़वास
- दैनिक कार्यों में छोड़ा बाइक का प्रयोग:
पहले जहां दैनिक कार्यों में दिनभर बाइक का प्रयोग करता था अब बाइक की बजाए ग्रामीण कार्यों को निपटाने के लिए साइकिल का प्रयोग कर रहा हूूं। पिछले कुछ दिनों से पैट्रोल के भावों में लगातार वृद्धि होने से आम आदमी पर इसका अतिरिक्त आर्थिक भार भी बढ़ गया है। - कर्मपाल यादव, सीगड़ा
- अब लिया बसों का सहारा:
पहले जहां शहर के कार्यों के लिए प्रतिदिन बाइक का प्रयोग होता था अब बसों के सहारे काम निपटाए जा रहे हैं। यूं ही पैट्रोल-डीजन के दामों में वृद्धि होती गई तो आम आदमी का वाहन चलाना भी मुश्किल हो जाएगा। - अशोक यादव, नांगल सिरोही
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- बाइक चलाना हुआ महंगा:
पिछले कुछ दिनों से पैट्रोल-डीजल के भावों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में बाइक चलाना महंगा हो गया है। पहले जहां छोटे-मोटे कामों के लिए बाइक का प्रयोग होता था अब वह धीरे-धीरे कम कर दिया है। 50 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करने के लिए बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। - सतीश कुमार, राठीवास
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- महंगी हुई खेती:
पिछले दो सालों में जुताई सहित अन्य कृषि कार्यों के लिए रेट दोगुने हो गए हैं। डीजल व पैट्रोल के भावों में हो रही वृद्धि भी अतिरिक्त आर्थिक भार बढ़ रहा है। दो वर्ष पूर्व जुताई के जो रेट 350 थे वह अब 600 से भी अधिक हो गए हैं। ऐसे में किसानों पर आर्थिक भार भी बढ़ रहा है।